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Shamli: जिला अस्पताल में गर्भवती को भर्ती करने से इनकार, गेट पर प्रसव, वीडियो वायरल होने पर जांच

Fri, 10 Apr 2026 09:27 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 10 Apr 2026 09:27 AM IST
सार

शामली के जिला अस्पताल में भर्ती से इनकार के आरोप के बीच गर्भवती महिला की अस्पताल गेट के बाहर डिलीवरी हो गई। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट लखनऊ भेज दी है।

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Shamli:  Pregnant Woman Delivers Baby Outside District Hospital Gate in Shamli
अस्पताल के गेट पर प्रसव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शामली के जिला अस्पताल में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। भर्ती से इनकार के आरोप के बीच एक गर्भवती महिला की अस्पताल गेट के बाहर ही डिलीवरी हो गई। मौके पर मौजूद महिलाओं ने चादर डालकर खुले में प्रसव कराया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हंगामा करते हुए कार्रवाई की मांग की।

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जानकारी के अनुसार बागपत जिले के असारा गांव निवासी उस्मान ने बताया कि बृहस्पतिवार देर शाम उसकी पत्नी कौशर को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। वह पहले उसे कांधला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गया, जहां हालत गंभीर बताते हुए जिला अस्पताल के लिए भेज दिया गया।
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आरोप है कि रात करीब नौ बजे जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने महिला की स्थिति गंभीर बताते हुए भर्ती करने से इनकार कर दिया और मेरठ ले जाने की सलाह दी। परिजनों का कहना है कि जैसे ही वे अस्पताल गेट से बाहर निकले, महिला की प्रसव पीड़ा तेज हो गई और तत्काल प्रसव की स्थिति बन गई।

इस दौरान वहां मौजूद महिलाओं ने चादर डालकर अस्पताल गेट के बाहर ही प्रसव कराया, जिसमें महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। घटना का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। हंगामे और लोगों के आक्रोश के बीच अस्पताल के चिकित्सक व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और बाद में महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने भर्ती करने के बदले एक हजार रुपये की मांग की थी। इसे लेकर परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

भारतीय किसान यूनियन के नेता असजद चौधरी ने सामाजिक माध्यमों पर वीडियो साझा कर अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने की बात कही है।

उठ रहे कई सवाल
जिला अस्पताल में हाल ही में गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन की सुविधा शुरू की गई है। इसके बावजूद सवाल उठ रहा है कि जब सुविधा उपलब्ध थी तो महिला को भर्ती क्यों नहीं किया गया और उच्च चिकित्सालय ले जाने की सलाह क्यों दी गई। वहीं यदि महिला की हालत गंभीर थी तो वह अस्पताल गेट से कुछ ही दूरी पर सुरक्षित प्रसव कैसे कर पाई।

सीएमएस का पक्ष
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किशोर कुमार आहूजा ने बताया कि मामला गंभीर है। जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि महिला को अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं किया गया। पूरे मामले की रिपोर्ट लखनऊ भेज दी गई है और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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