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पंचायत में बोले नरेश टिकैत- खाप चौधरियों के सम्मान में न हो कोई कमी, जानें- गठवाला खाप की ये अहम बातें
Tue, 31 Aug 2021 12:04 AM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
Published by: कपिल kapil
Updated Tue, 31 Aug 2021 12:04 AM IST
सार
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत संयुक्त किसान मोर्चा की है और इसमें किसान बनकर जाएं।
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शामली में हुई पंचायत।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
शामली के गांव कुड़ाना में हुई गठवाला खाप की पंचायत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि खाप चौधरियों के सम्मान में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। गठवाला खाप को मंच की व्यवस्था संभालनी है। हर घर से दो किलोमीटर आटे की रोटी घी में चुपड़कर लानी है। अब समय आ गया है कि मुजफ्फरनगर महापंचायत को सफल बनाने के लिए खाप के चौधरी बंद कमरे में बैठकर वार्ता कर लें। उन्होंने कहा कि भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि कि मेघालय के राज्यपाल सतपाल मलिक के किसानों के साथ खडे़ होने वाला बयान दिया है। महापंचात के बाद भाकियू उनका अभिनंदन करेगी।
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गांव कुड़ाना की खूनी पट्टी चौपाल में आयोजित गठवाला खाप की इस पंचायत की अध्यक्षता खाप चौधरी राजेंद्र सिंह ने की। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत संयुक्त किसान मोर्चा की है और इसमें किसान बनकर जाएं। वर्ष 2003 में मायावती प्रकरण हो उसमें गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन मलिक और बाबा सीताराम का योगदान रहा है। शामली और मुजफ्फरनगर संयुक्त जिला ऐतिहासिक रहा है। भूल चूक होती रहती है। खाप चौधरियों के सम्मान में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर की सभास्थल के मंच की व्यवस्था गठवाला खाप को संभालनी है। पंचायत का संचालन सवित मलिक, अमित मलिक ने संयुक्त रूप से किया।
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बलि का बकरा नहीं बनना चाहती गठवाला खाप: राजेंद्र सिंह
मुजफ्फरनगर की महापंचायत में शामिल होने के मुद्दे पर आज ही फैसला लेने के लिए गठवाला चौधरी राजेंद्र सिंह पर दबाव बना तो वह बोले गठवाला खाप बलि का बकरा नहीं बनेगी। इस पर पंचायत में हंगामा हो गया और चौधरी नरेश टिकैत उठकर चले गए।
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पंचायत की अध्यक्षता करते हुए गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र मलिक ने कहा कि कुरावे की पंचायत में उन्हें बुलाया गया, वह शामिल हुए। इसके पहले की पंचायतों में उन्हें नहीं बुलाया गया और वह शामिल नहीं हुए। गठवाला खाप हमेशा किसान के साथ रही है। गठवाला खाप ने वर्ष 1987 के आंदोलन में बलिदान दिया था, तब से लेकर किसानों के साथ है, लेकिन वर्ष 2013 के दंगे में गठवाला खाप की सुध नहीं ली है। इस बार गठवाला खाप बलि का बकरा नहीं बनना चाहती है। इस बार वह अगुवाई नहीं करेगी। पांच सितंबर की मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत को लेकर गठवाला खाप के थांबेदारों में कोई बातचीत नहीं हुई है। अगले तीन दिन में गठवाला खाप पंचायत करके मुजफ्फरनगर महापंचायत में जाने का निर्णय लेगी। खाप चौधरी के इतना कहते ही पंचायत में शोरशराबा और हंगामा हो गया। पंचायत में खाप चौधरी राजेंद्र मलिक पर आज ही फैसला करने का दबाव बना रहे थे। राजेंद्र मलिक सुन जाओ, थम जाओ माइक से कहते रहे।