खबर का असर: पांच साल से चल रहा था माइनिंग अधिकारियों की लोकेशन शेयर करने का खेल, कई राज्यों में फैला नेटवर्क
अमर उजाला ने व्हाट्सएप ग्रुपों में एआरटीओ, माइनिंग अधिकारियों की लोकेशन शेयर करने वाले गिरोह की खबर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की थी। गिरोह में कई जिलों और प्रदेशों लोग शामिल थे। रुपये लेकर लोकेशन शेयर करने का ये खेल पांच साल से चल रहा था। अमर उजाला ने खबर को पिछले दिनों प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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व्हाट्सएप ग्रुपों में यूपी के अलावा अन्य जिलों के एआरटीओ, जिला खनन अधिकारी और अन्य की लोकेशन शेयर करने के मामले में पुलिस ने बड़े गिरोह का भंड़ाफोड कर दिया। गिरोह के शामली के रहने वाले स रगना को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, सरगना समेत 92 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। गिरोह के सरगना ने खुलासा किया कि वह पिछले 5 साल लोकेशन शेयर कर रहे थे। एसपी ने जल्द गिरोह के फरार सदस्यों को भी पकड़ने की बात कहीं है।
अमर उजाला ने 6 अक्तूबर के अंक में व्हाट्सए गुपों पर लोकेशन देने का खेल नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। जिसमें ओवरलोड और अन्य वाहनों को निकलवाने के बदले 1500 तक रुपये लेने के बाद व्हाट्सएप ग्रुप पर लोकेशन शेयर करने के चल रहे खेल का खुलासा किया था।
खुलासा किया था कि गिरोह के सदस्य चंद रुपयों के लालच में यूपी के अलावा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के अधिकारियों की लोकेशन शेयर करते हैं, जिसके कारण राजस्व का चूना सरकार को लग रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद एसपी अभिषेक ने मामले की जांच कैराना थाना प्रभारी को सौंपी थी।
एसपी अभिषेक ने बताया कि अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर मामले की जांच कराई गई। पता चला कि सबका साथ सबका विकास नामक ग्रुप में लोकेशन शेयर करने का खेल चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के सरगना शामली के टटौली के रहने वाले वसीम पुत्र रईस को गिरफ्तार कर लिया। जिसके कब्जे से एक कार, मोबाइल भी बरामद किया गया।
जांच में पता चला कि 91 और लोग ग्रुप में शामिल है, जिनमें ट्रक चालकों के अलावा ट्रक मालिक भी हैं। सभी 92 के खिलाफ आईपीसी की धारा धारा 186 और 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पांच साल से चल रहा था अधिकारियों की लोकेशन शेयर करने का खेल
ग्रुप में 92 सदस्य हैं। लोकेशन शेयर करने के बदले चालक और मालिकों से यूपीआईडी के माध्यम से 1 हजार से लेकर 1500 रुपये लिए जाते थे। मांगने पर इस ग्रुप में जनपद मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत तथा हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, कर्नाटक राज्य के अधिकारियों की लोकेशन उपलब्ध कराई जाती थी।
लोकेशन के अनुसार वाहन चालक अधिकारियों से बचने के लिये गाड़ी को सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर लेते हैं तथा अधिकारियों के जाने के बाद वाहन को गंतव्य तक ले जाने की सूचना देते थे। गिरोह के सरगना ने खुलासा किया कि वह पिछले 5 साल लोकेशन शेयर कर रहे थे।
मुजफ्फरनगर के 36, बागपत के 20, गाजियाबाद के 9, शामली के 4, सहारनपुर के 4, मेरठ के 2, हापुड़ के 1, हरियाणा के 3, दिल्ली के 6, पंजाब, कर्नाटक, उत्तराखंड के 1-1 और बाकी अन्य, जिनका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।