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UP के बंटवारे की मांग क्यों?: पहले 10 साल चला था आंदोलन, खूब हुए थे प्रदर्शन, सोनिया गांधी का मिला था समर्थन

Fri, 06 Oct 2023 01:31 AM IST
कपिल kapil महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Published by: कपिल kapil Updated Fri, 06 Oct 2023 01:31 AM IST
सार

Shamli News : कैराना-शामली से दो बार सांसद रहे हरपाल सिंह पंवार ने भी 28 साल पहले पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर करीब 10 साल तक आंदोलन चलाया था।

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Shamli Former MP Harpal Singh had raised demand for division of UP 28 years ago protest was in Delhi many time
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में अंतरराष्ट्रीय जाट संसद से पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने का मुद्दा फिर गरमा गया है। यह मुद्दा कई दशकों से उठाया जाता रहा है। कैराना-शामली से दो बार सांसद रहे हरपाल सिंह पंवार ने भी 28 साल पहले पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर करीब 10 साल तक आंदोलन चलाया था। उनकी मांग थी कि पश्चिमी के चार मंडलों के 22 जिलों को दिल्ली में शामिल करके इंद्रप्रस्थ राज्य घोषित किया जाए।

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मेरठ में गत दिनों अंतरराष्ट्रीय जाट संसद का आयोजन किया गया, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। देश के सभी राज्यों के जाट शामिल हुए। इस जाट संसद में केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाकर मेरठ को उसकी राजधानी बनाने का मुद्दा उठाया। उसके बाद से रोजाना यह मुद्दा गरमा रहा है। 

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अलग राज्य बनाने के आंदोलन को अगर देखें तो शामली क्षेत्र भी इसमें अग्रणी भूमिका निभा चुका है। 1989 से 96 तक दो बार सांसद रहे सांसद हरपाल पंवार ने इस मुद्दे पर जोरदार आंदोलन किया। इसके लिए उन्होंने पश्चिमी यूपी में चार मंडलों के सभी 22 जिलों में सैकड़ों जनजागरण सभाएं आयोजित की और दिल्ली में चार बार जंतर-मंतर धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में सहारनपुर के पूर्व विधायक निर्भयपाल शर्मा ने 1990 के दशक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हरित प्रदेश बनाने की मांग उठाई। बाद में उनकी मौत हो गई।

अलग राज्य बनाने का मुद्दा समय-समय पर किसी न किसी जनप्रतिनिधि और संगठनों के जरिए गरमाया तो गया लेकिन अभी तक मुकाम पर नहीं पहुंचा।

हरपाल सिंह पंवार ने इंद्रप्रस्थ प्रदेश संघर्ष मोर्चा का गठन किया। 1995 से 2005 तक मुरादाबाद, सहारनपुर , मेरठ , आगरा के 22 जिलों को दिल्ली में मिलाकर इंद्रप्रस्थ प्रदेश घोषित किए जाने की मांग जोरदार से उठाई। इसके लिए जनजागरण अभियान के साथ खूब धरना-प्रदर्शन किए। हरपाल सिंह पंवार का कहना था कि पश्चिमी यूपी के चारों मंडलों के 22 जिलों को दिल्ली में मिलाया जाए। दिल्ली के देश के साथ ही इंद्रप्रस्थ प्रदेश की भी राजधानी घोषित हो।

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दिल्ली के सीएम ने दिया था भरोसा
पूर्व सांसद हरपाल सिंह पंवार ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दिल्ली में मिलाकर इंद्रप्रस्थ राज्य बनाने की मांग को लेकर वे कई बार दिल्ली के सीएम रहे साहब सिंह वर्मा से मिले थे। साहब सिंह वर्मा ने मांग को पूरा कराने का वादा किया था। यहीं नहीं, शामली में आयोजित एक सभा में साहब सिंह वर्मा ने मांग को जायज भी ठहराया था। मगर बाद में मांग को पूरा नहीं कराया जा सका था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिले थे और सोनिया गांधी ने भी मांग को जायज माना था।

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अलग राज्य बनाने का मुख्य उद्देश्य
इंद्रप्रस्थ राज्य बनाने की मांग को लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली से जुड़े कई स्थानों पर आंदोलन को जोर-शोर से चलाए जाने को लेकर आंदोलनकारियों का कहना था कि इंद्रप्रस्थ राज्य बनने से पश्चिम उत्तर प्रदेश का विकास होगा। कानून व्यवस्था और बिजली, पानी की समस्या का हल तो निकल ही जाएगा। उनका कहना था कि अलग राज्य बनने से दिल्ली की जमीन पर बोझ नहीं होगा और सभी के लिए आसानी से मकान सहित अधिकतम सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

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