{"_id":"5706c4994f1c1b1e28c81577","slug":"shamli-bypass-compensation-stonewalling","type":"story","status":"publish","title_hn":"शामली बाईपास में मुआवजे का अड़ंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शामली बाईपास में मुआवजे का अड़ंगा
ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
Updated Fri, 08 Apr 2016 02:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। बनत-सेहटा के किसानों और प्रशासन के बीच चल रही मुआवजे की लड़ाई में शामली बाईपास का निर्माण उलझ गया है। जिला प्रशासन और किसानों के बीच मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है।
दिल्ली-यमुनौत्री फोरलेन के शामली बाईपास की जद में गांव बलवा, सिंभालका, शामली, सेहटा और बनत के किसानों की 36.6344 हेक्टेर भूमि आ रही है। पांच किमी लंबे बाईपास के लिए शासन से धनराशि आवंटित हो चुकी है। इन गांवों से 122 किसानों के बैनामे हो चुके हैं। जबकि बनत के 39 किसानों में से मात्र दो किसानों के बैनामे हो पाए हैं।
बनत के किसानों ने 20-25 लोगों को अपनी भूमि प्लाटिंग कर बेच दी है। जिला प्रशासन द्वारा प्लाटिंग भूमि की धारा 143 की हुई है। अब प्लाट वाले के लोग अकृषि और आबादी की भूमि का रेट मांग रहे हैं।
विज्ञापन
जिला प्रशासन इन लोगों की भूमि को कृषि का आधार मानकर मुआवजा देना चाहता है। जिससे बनत के किसान अपनी भूमि का बैनामा कराने से बच रहे हैं। महीपाल सिंह का कहना है कि किसान खसरा का सर्किल रेट चाहते हैं और प्रशासन के रेट पर बैनामा कराने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
दिल्ली-यमुनौत्री फोरलेन के शामली बाईपास की जद में गांव बलवा, सिंभालका, शामली, सेहटा और बनत के किसानों की 36.6344 हेक्टेर भूमि आ रही है। पांच किमी लंबे बाईपास के लिए शासन से धनराशि आवंटित हो चुकी है। इन गांवों से 122 किसानों के बैनामे हो चुके हैं। जबकि बनत के 39 किसानों में से मात्र दो किसानों के बैनामे हो पाए हैं।
विज्ञापन
बनत के किसानों ने 20-25 लोगों को अपनी भूमि प्लाटिंग कर बेच दी है। जिला प्रशासन द्वारा प्लाटिंग भूमि की धारा 143 की हुई है। अब प्लाट वाले के लोग अकृषि और आबादी की भूमि का रेट मांग रहे हैं।
विज्ञापन
जिला प्रशासन इन लोगों की भूमि को कृषि का आधार मानकर मुआवजा देना चाहता है। जिससे बनत के किसान अपनी भूमि का बैनामा कराने से बच रहे हैं। महीपाल सिंह का कहना है कि किसान खसरा का सर्किल रेट चाहते हैं और प्रशासन के रेट पर बैनामा कराने से बच रहे हैं।