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बहावड़ी गांव में स्क्रब टाइफस का केस मिला
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शामली। जिले के बहावड़ी गांव में स्क्रब टाइफस का केस मिला है। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मरीज का उपचार हुआ है। इसके बाद मरीज के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
बहावड़ी निवासी किसान महिपाल सिंह की तबियत करीब दस दिन पहले बिगड़ी थी। परिजनों ने उन्हें पहले मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। आराम न लगने पर उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जांच में उनमें स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। अब वह उपचार के बाद घर लौट आए हैं। उनके पुत्र विनीत ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी और फॉगिंग व सफाई कराने की मांग की है। गांव में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और झाड़ियां उगी हुई हैं। शाम तक भी गांव में कोई नहीं पहुंचा। सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल का कहना है उन्हें केस की जानकारी मिली है। टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी।
खतरनाक है स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस के प्रति लापरवाही खतरनाक हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर मौत भी हो सकती है। स्क्रब टायफस एक बैक्टीरिया का संक्रमण है और इसके लक्षण चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं। इस बीमारी में सिर दर्द, सर्दी लगना, बुखार, शरीर में दर्द और तीसरे से पांचवें दिन के बीच शरीर पर लाल दाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह रोग कीड़ों के काटने से फैलता है। संक्रमित होने के बाद मरीज बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करता है और कुछ लोगों में जी मचलाने की भी शिकायत देखी जाती है। स्क्रब टाइफस में बुखार सात से लेकर 12 दिनों तक रहता है। बुखार बिगड़ने की स्थिति में कमजोरी और अधिक बढ़ती है। मरीज को बेहोशी और हृदय संबंधी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। 40 वर्ष से अधिक आयु के 50 प्रतिशत मरीजों और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के मरीजों के लिए स्क्रब टाइफस जानलेवा भी हो सकता है।
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स्क्रब टाइफस से बचे रहने के लिए क्या करें
सीडीसी के अनुसार, स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है। ऐसे में संक्रमित चिगर्स के संपर्क से बचकर रहना उचित होता है। जंगलों और झाड़ वाले इलाकों में यह कीड़े अधिक हो सकते हैं, ऐसे में ऐसी जगहों पर जाने से बचें। यदि आपको कोई भी कीड़ा काट ले तो तुरंत साफ पानी से उस हिस्से को धोकर एंटीबायोटिक दवाएं लगा लें। ऐसे कपड़े पहनें जिससे हाथ और पैर अच्छी तरीके से ढके रह सकें। इस रोग से सुरक्षित रहने के लिए बचाव ही सबसे प्रभावी तरीका है।
घरों के आसपास न उगने दें झाड़ियां
स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए घरों के आसपास झाड़ियां और घास ने उगने दें। झाड़ियों और घास में पाए जाने वाले कीड़ों के माध्यम से यह रोग फैलता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को स्क्रब टाइफस से सतर्क रहने की सलाह दी है।
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बहावड़ी निवासी किसान महिपाल सिंह की तबियत करीब दस दिन पहले बिगड़ी थी। परिजनों ने उन्हें पहले मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। आराम न लगने पर उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जांच में उनमें स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। अब वह उपचार के बाद घर लौट आए हैं। उनके पुत्र विनीत ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी और फॉगिंग व सफाई कराने की मांग की है। गांव में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और झाड़ियां उगी हुई हैं। शाम तक भी गांव में कोई नहीं पहुंचा। सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल का कहना है उन्हें केस की जानकारी मिली है। टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी।
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खतरनाक है स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस के प्रति लापरवाही खतरनाक हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर मौत भी हो सकती है। स्क्रब टायफस एक बैक्टीरिया का संक्रमण है और इसके लक्षण चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं। इस बीमारी में सिर दर्द, सर्दी लगना, बुखार, शरीर में दर्द और तीसरे से पांचवें दिन के बीच शरीर पर लाल दाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह रोग कीड़ों के काटने से फैलता है। संक्रमित होने के बाद मरीज बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करता है और कुछ लोगों में जी मचलाने की भी शिकायत देखी जाती है। स्क्रब टाइफस में बुखार सात से लेकर 12 दिनों तक रहता है। बुखार बिगड़ने की स्थिति में कमजोरी और अधिक बढ़ती है। मरीज को बेहोशी और हृदय संबंधी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। 40 वर्ष से अधिक आयु के 50 प्रतिशत मरीजों और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के मरीजों के लिए स्क्रब टाइफस जानलेवा भी हो सकता है।
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स्क्रब टाइफस से बचे रहने के लिए क्या करें
सीडीसी के अनुसार, स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है। ऐसे में संक्रमित चिगर्स के संपर्क से बचकर रहना उचित होता है। जंगलों और झाड़ वाले इलाकों में यह कीड़े अधिक हो सकते हैं, ऐसे में ऐसी जगहों पर जाने से बचें। यदि आपको कोई भी कीड़ा काट ले तो तुरंत साफ पानी से उस हिस्से को धोकर एंटीबायोटिक दवाएं लगा लें। ऐसे कपड़े पहनें जिससे हाथ और पैर अच्छी तरीके से ढके रह सकें। इस रोग से सुरक्षित रहने के लिए बचाव ही सबसे प्रभावी तरीका है।
घरों के आसपास न उगने दें झाड़ियां
स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए घरों के आसपास झाड़ियां और घास ने उगने दें। झाड़ियों और घास में पाए जाने वाले कीड़ों के माध्यम से यह रोग फैलता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को स्क्रब टाइफस से सतर्क रहने की सलाह दी है।