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विकास के नाम पर घोटाला
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:41 AM IST
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शामली। ग्राम पंचायत बाबरी की निधि से आठ महीने के दौरान करीब 85 लाख रुपये निकाले गए। कभी ईंट भट्ठा मालिक को पेमेंट के नाम पर, तो कभी मैटिरियल सप्लायर को भुगतान के नाम पर। छह लोगों के नाम से ही करीब 71 लाख रुपये निकाले गए। आरटीआई के तहत बैंक से इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से कार्रवाई कराने की मांग की है। जिलाधिकारी ने प्रकरण की जांच के लिए दो अधिकारियों की समिति गठित कर दी है।
गांव बाबरी के प्रदीप कुमार और आलम खां ने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र के साथ बाबरी ग्राम पंचायत निधि के बैंक खाते से दो अप्रैल से लेकर 17 दिसंबर तक निकाली गई धनराशि की डिटेल भी दी है।
यह डिटेल उन्होंने सूचना अधिकार के तहत प्राप्त की। प्रदीप और आलम ने शिकायत पत्र में बताया कि दो अप्रैल को बाबरी ग्राम पंचायत निधि खाते में करीब 33 लाख रुपये थे, जिसके बाद विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य कराने के लिए ट्रेजरी से अलग-अलग किश्तों में पैसा आया। 17 दिसंबर तक एक करोड़ 30 लाख 70 हजार रुपये आए, जिनमें से करीब 87 लाख 23 हजार 168 रुपये निकाल लिए गए। खाते में 43 लाख 46 हजार रुपये शेष हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान तथा पंचायत सचिव ने साठगांठ करके ग्राम पंचायत की निधि का कैश निकाल लिया। खाते से जितनी रकम निकाली गई, उतना पैसा गांव में विकास पर खर्च भी नहीं किया गया।
यह भी आरोप है कि जिन विकास कार्यों के नाम पर पैसा निकाला गया, उनकी स्वीकृति भी नहीं ली गई। बैंक स्टेटमेंट में ईंट भट्ठे वाले के पेमेंट के नाम पर करीब 28 लाख रुपये निकाले गए, जबकि इतनी रकम से खरीदी गई ईंटों का प्रयोग गांव में कहीं पर भी नहीं हुआ। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की जांच करा आरोपी ग्राम प्रधान तथा पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई कराई जाए। जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी भूपेंद्र सिंह और अधिशासी अभियंता (ग्रामीण अभियंत्रण विभाग) विष्णु अग्रवाल की कमेटी गठित करके जांच करने का निर्देश दे दिया है। अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट में आरोपों का क्या निष्कर्ष निकलता है।
इनके नाम हुआ सबसे बड़ा भुगतान ः रजत ब्रिक्स फील्ड के नाम 28 लाख 20 हजार रुपये निकाले गए, इसके अलावा प्रमोद के नाम से 20 लाख 21 हजार रुपये, लोकेश के नाम 10 लाख 68 हजार 370 रुपये, पद्म के नाम पांच लाख 19 हजार, राधा गोविंद फर्म के नाम पांच लाख 63 हजार 146 रुपये का भुगतान किया गया। ग्राम प्रधान अनंगपाल ने भी अपने नाम एक लाख 91 हजार रुपये का भुगतान निकाला। इसके अलावा भी बैंक खाते से विभिन्न लोगों के नाम से रकम निकाली गई।
गांव पंचायत की निधि से आठ महीने में निकले करीब 87 लाख रुपये योजनाओं का जो पैसा ग्राम पंचायत निधि के खाते में आया, वह पैसा विकास कार्यों पर ही खर्च किया गया। उसमें हमने किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती है। शिकायत के संबंध में जानकारी मिली है। प्रशासन जांच कराएगा, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि क्या कोई अनियमितता हुई अथवा नहीं। -
अनंगपाल सिंह, ग्राम प्रधान बाबरी
मामले की शिकायत होने पर जांच कमेटी गठित हो चुकी है। कमेटी मौके पर जाकर जांच करेगी तथा बैंक से निकाली गई धनराशि के खर्च होने का सत्यापन करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि ग्राम पंचायत निधि के खाते से निकाली गई धनराशि नियमानुसार खर्च की गई या अनियमितता बरती गई।
यशु रुस्तगी, मुख्य विकास अधिकारी
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गांव बाबरी के प्रदीप कुमार और आलम खां ने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र के साथ बाबरी ग्राम पंचायत निधि के बैंक खाते से दो अप्रैल से लेकर 17 दिसंबर तक निकाली गई धनराशि की डिटेल भी दी है।
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यह डिटेल उन्होंने सूचना अधिकार के तहत प्राप्त की। प्रदीप और आलम ने शिकायत पत्र में बताया कि दो अप्रैल को बाबरी ग्राम पंचायत निधि खाते में करीब 33 लाख रुपये थे, जिसके बाद विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य कराने के लिए ट्रेजरी से अलग-अलग किश्तों में पैसा आया। 17 दिसंबर तक एक करोड़ 30 लाख 70 हजार रुपये आए, जिनमें से करीब 87 लाख 23 हजार 168 रुपये निकाल लिए गए। खाते में 43 लाख 46 हजार रुपये शेष हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान तथा पंचायत सचिव ने साठगांठ करके ग्राम पंचायत की निधि का कैश निकाल लिया। खाते से जितनी रकम निकाली गई, उतना पैसा गांव में विकास पर खर्च भी नहीं किया गया।
यह भी आरोप है कि जिन विकास कार्यों के नाम पर पैसा निकाला गया, उनकी स्वीकृति भी नहीं ली गई। बैंक स्टेटमेंट में ईंट भट्ठे वाले के पेमेंट के नाम पर करीब 28 लाख रुपये निकाले गए, जबकि इतनी रकम से खरीदी गई ईंटों का प्रयोग गांव में कहीं पर भी नहीं हुआ। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की जांच करा आरोपी ग्राम प्रधान तथा पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई कराई जाए। जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी भूपेंद्र सिंह और अधिशासी अभियंता (ग्रामीण अभियंत्रण विभाग) विष्णु अग्रवाल की कमेटी गठित करके जांच करने का निर्देश दे दिया है। अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट में आरोपों का क्या निष्कर्ष निकलता है।
इनके नाम हुआ सबसे बड़ा भुगतान ः रजत ब्रिक्स फील्ड के नाम 28 लाख 20 हजार रुपये निकाले गए, इसके अलावा प्रमोद के नाम से 20 लाख 21 हजार रुपये, लोकेश के नाम 10 लाख 68 हजार 370 रुपये, पद्म के नाम पांच लाख 19 हजार, राधा गोविंद फर्म के नाम पांच लाख 63 हजार 146 रुपये का भुगतान किया गया। ग्राम प्रधान अनंगपाल ने भी अपने नाम एक लाख 91 हजार रुपये का भुगतान निकाला। इसके अलावा भी बैंक खाते से विभिन्न लोगों के नाम से रकम निकाली गई।
गांव पंचायत की निधि से आठ महीने में निकले करीब 87 लाख रुपये योजनाओं का जो पैसा ग्राम पंचायत निधि के खाते में आया, वह पैसा विकास कार्यों पर ही खर्च किया गया। उसमें हमने किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती है। शिकायत के संबंध में जानकारी मिली है। प्रशासन जांच कराएगा, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि क्या कोई अनियमितता हुई अथवा नहीं। -
अनंगपाल सिंह, ग्राम प्रधान बाबरी
मामले की शिकायत होने पर जांच कमेटी गठित हो चुकी है। कमेटी मौके पर जाकर जांच करेगी तथा बैंक से निकाली गई धनराशि के खर्च होने का सत्यापन करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि ग्राम पंचायत निधि के खाते से निकाली गई धनराशि नियमानुसार खर्च की गई या अनियमितता बरती गई।
यशु रुस्तगी, मुख्य विकास अधिकारी