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Shamli News: साधकोें को भ्रामरी प्राणायाम का कराया अभ्यास
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शामली। क्रीड़ा भारती की तरफ से चल रहे निशुल्क योग प्रशिक्षण शिविर के 35वें दिन साधकों को भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। शनिवार को शामली रायफल क्लब पर आयोजित योग शिविर में साधकोें को संबोधित करते हुए संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता योग प्रशिक्षिका पूर्णिमा भार्गव ने भ्रामरी प्राणायाम की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया क्षण मुखी मुद्रा में भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास किया जाना चाहिए। सबसे पहले हाथों की अंगुलियों को चेहरे के विशिष्ट बिंदु, जिनको मर्म बिंदु कहा गया है, उन पर रखकर उनको प्राणायाम से उत्प्रेरित किया जाता है। अंगूठे से कान, आंखों के ऊपर स्थित आवर्त मर्म, मध्यमा अंगुली से दोनों भोंहे के बीच स्थपनी मर्म, अनामिका अंगुली से श्रृंगाटक मर्म व कनिष्ठ अंगुली से नाक पर स्थित फण मर्म दबाया जाता है और जीभ को अपने तालू से लगाकर एकाग्र शक्ति बढ़ाई जाती है। भ्रामरी प्राणायाम करने से मानसिक तनाव, गुस्सा, बेचैनी, घबराहट, उच्च रक्त चाप, हृदय और मस्तिष्क रोग में लाभदायक है। योगाचार्य डा. श्रीपाल सिंह धामा ने योग साधकों को सूक्ष्म योगिक क्रियाओं का अभ्यास कराने के साथ ही सूर्य नमस्कार, पर्वतासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तासन, उत्कटासन आदि और प्राणायाम का अभ्यास कराया। इस अवसर पर क्रीड़ा भारती विभाग संयोजक मुकेश चौधरी, जबर सिंह, सुधीर कुमार राणा प्रधानाचार्य, डॉ. विजेंद्र सिंह, रामेश्वर दयाल आर्य, जितेंद्र सिंह, प्रमिला देवी, कृष्णा कादियान, प्राची शर्मा, लक्की सिंधु, विदुषी चौधरी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया क्षण मुखी मुद्रा में भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास किया जाना चाहिए। सबसे पहले हाथों की अंगुलियों को चेहरे के विशिष्ट बिंदु, जिनको मर्म बिंदु कहा गया है, उन पर रखकर उनको प्राणायाम से उत्प्रेरित किया जाता है। अंगूठे से कान, आंखों के ऊपर स्थित आवर्त मर्म, मध्यमा अंगुली से दोनों भोंहे के बीच स्थपनी मर्म, अनामिका अंगुली से श्रृंगाटक मर्म व कनिष्ठ अंगुली से नाक पर स्थित फण मर्म दबाया जाता है और जीभ को अपने तालू से लगाकर एकाग्र शक्ति बढ़ाई जाती है। भ्रामरी प्राणायाम करने से मानसिक तनाव, गुस्सा, बेचैनी, घबराहट, उच्च रक्त चाप, हृदय और मस्तिष्क रोग में लाभदायक है। योगाचार्य डा. श्रीपाल सिंह धामा ने योग साधकों को सूक्ष्म योगिक क्रियाओं का अभ्यास कराने के साथ ही सूर्य नमस्कार, पर्वतासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तासन, उत्कटासन आदि और प्राणायाम का अभ्यास कराया। इस अवसर पर क्रीड़ा भारती विभाग संयोजक मुकेश चौधरी, जबर सिंह, सुधीर कुमार राणा प्रधानाचार्य, डॉ. विजेंद्र सिंह, रामेश्वर दयाल आर्य, जितेंद्र सिंह, प्रमिला देवी, कृष्णा कादियान, प्राची शर्मा, लक्की सिंधु, विदुषी चौधरी आदि मौजूद रहे।
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