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विदेश जाने का सपना पड़ा भारी: डंकी रूट से अमेरिका गए तीन गुजराती लापता, परिवार से मांगी गई करोड़ों की फिरौती
Wed, 30 Sep 2026 09:36 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Wed, 30 Sep 2026 09:36 AM IST
सार
गुजरात से तीन लोग डंकी रूट के जरिए अमेरिका जाने निकले थे। इथियोपिया पहुंचने के बाद उनसे संपर्क टूट गया। इसके बाद परिवार को अपहरण की कॉल आई, जिसमें तीनों की रिहाई के बदले एक करोड़ रुपये मांगे गए। पुलिस जांच कर रही है। इस बीच यह सवाल उठाता है कि तीन गुजराती आखिर इथियोपिया में कहां गायब हो गए?
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अमेरिका जाने निकले तीन गुजराती अचानक गायब
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
गुजरात के मेहसाणा जिले से मदद की एक गुहार सामने आई है। यहां एक ही परिवार के तीन युवा सदस्य अमेरिका जाने के लिए निकले थे, लेकिन वे विदेश में रहस्यमय तरीके से लापता हो गए हैं। उनके परिवार वाले बुरी तरह डरे हुए हैं क्योंकि उनसे भारी-भरकम फिरौती की मांग की जा रही है।
परिवार ने क्यों लिया गैरकानूनी रास्ता?
लापता लोगों की पहचान 30 साल की ममता चावड़ा, उनके 23 साल के चचेरा भाई रुत्विक जनसारी और 27 साल की चचेरी बहन मयूरी सोलंकी के तौर पर हुई है। ममता, जिनके पति पिछले तीन वर्षों से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। उनका वीजा लगातार छह बार रिजेक्ट हो गया परिवार को एक साथ लाने की कोशिश में, रिश्तेदारों ने एक गैर-कानूनी मानव तस्करी नेटवर्क का सहारा लिया, जब अल्पेश पंचाल नाम के एक स्थानीय एजेंट ने उन्हें गैर-पारंपरिक रास्तों से (डंकी रूट) अमेरिका पहुंचाने का वादा किया।
एजेंट ने कितनी रकम ली?
पंचाल ने परिवार का संपर्क वड़ोदरा के एजेंट भार्गव पटेल से कराया, जो प्रति व्यक्ति 75 लाख रुपये की फीस पर तीनों को अमेरिका भेजने के लिए तैयार हो गया। पुलिस के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, परिवार ने एजेंटों को लगभग 70 लाख रुपये पहले ही दे दिए।
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यात्रा की शुरुआत कब से हुई?
यात्रा की शुरुआत 20 सितंबर को हुई, जब तीनों को गोजरिया से राजस्थान के जयपुर ले जाया गया। वहां से, उन्होंने अबू धाबी के लिए एतिहाद एयरवेज की उड़ान भरी और फिर उन्हें इथियोपिया के अदीस अबाबा भेजा गया। इथियोपिया में, वे तीनों एक महीने के ई-वीजा पर स्वाजीलैंड स्ट्रीट पर मौजूद जीएसएफ कैंप नाम की जगह पर रुके थे।
इसके बाद परिवार को सबसे पहले 22 सितंबर को ममता का फोन आया, जिसमें उसने बताया कि वे सुरक्षित कनाडा पहुंच गए हैं। लेकिन, इस फोन के तुरंत बाद, तीनों मोबाइल फोन बंद कर दिए गए और उनसे सीधा संपर्क अचानक टूट गया।
फिरौती में कितनी रकम की मांग की गई?
तीन दिन बाद स्थिति तब और गंभीर हो गई जब परिवार को एक अनजान व्यक्ति का फोन आया। उसने अपना नाम सिर्फ खान बताया। इसके साथ ही कॉलर ने दावा किया कि उसने ममता रुत्विक और मयूरी को अगवा कर लिया है। उनकी रिहाई के लिए एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की।
परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई?
एजेंटों को पहले ही लाखों रुपये देने के बाद आर्थिक तंगी का सामना कर रहे ममता के पिता, कीरितभाई चौहान ने सरकार से दखल देने और उनके बच्चों को बचाने की सार्वजनिक अपील की। बाद में अल्पेश पांचाल ने दावा किया कि वे तीनों कभी कनाडा पहुंचे ही नहीं है। इसके साथ ही आरोप लगाया कि उन्हें इथियोपिया में ही अगवा कर लिया गया था।
पांचाल ने दावा किया कि उनका मुख्य अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यक्ति लापता हो गया है। वहीं, कहा कि उन्होंने अपहरणकर्ताओं को पहले ही 60 लाख रुपये दे दिए थे, जो अब अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं। लंगनाज पुलिस स्टेशन के स्थानीय अधिकारियों ने इस गुमशुदगी की पूरी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने जांच तेज की
पुलिस अधिकारी ट्रैवल एजेंटों की भूमिका की सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं। फिरौती के कॉल का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही तीनों लोगों की सही लोकेशन और सुरक्षा का पता लगाने के लिए तालमेल बिठा रहे हैं।
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परिवार ने क्यों लिया गैरकानूनी रास्ता?
लापता लोगों की पहचान 30 साल की ममता चावड़ा, उनके 23 साल के चचेरा भाई रुत्विक जनसारी और 27 साल की चचेरी बहन मयूरी सोलंकी के तौर पर हुई है। ममता, जिनके पति पिछले तीन वर्षों से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। उनका वीजा लगातार छह बार रिजेक्ट हो गया परिवार को एक साथ लाने की कोशिश में, रिश्तेदारों ने एक गैर-कानूनी मानव तस्करी नेटवर्क का सहारा लिया, जब अल्पेश पंचाल नाम के एक स्थानीय एजेंट ने उन्हें गैर-पारंपरिक रास्तों से (डंकी रूट) अमेरिका पहुंचाने का वादा किया।
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एजेंट ने कितनी रकम ली?
पंचाल ने परिवार का संपर्क वड़ोदरा के एजेंट भार्गव पटेल से कराया, जो प्रति व्यक्ति 75 लाख रुपये की फीस पर तीनों को अमेरिका भेजने के लिए तैयार हो गया। पुलिस के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, परिवार ने एजेंटों को लगभग 70 लाख रुपये पहले ही दे दिए।
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यात्रा की शुरुआत कब से हुई?
यात्रा की शुरुआत 20 सितंबर को हुई, जब तीनों को गोजरिया से राजस्थान के जयपुर ले जाया गया। वहां से, उन्होंने अबू धाबी के लिए एतिहाद एयरवेज की उड़ान भरी और फिर उन्हें इथियोपिया के अदीस अबाबा भेजा गया। इथियोपिया में, वे तीनों एक महीने के ई-वीजा पर स्वाजीलैंड स्ट्रीट पर मौजूद जीएसएफ कैंप नाम की जगह पर रुके थे।
इसके बाद परिवार को सबसे पहले 22 सितंबर को ममता का फोन आया, जिसमें उसने बताया कि वे सुरक्षित कनाडा पहुंच गए हैं। लेकिन, इस फोन के तुरंत बाद, तीनों मोबाइल फोन बंद कर दिए गए और उनसे सीधा संपर्क अचानक टूट गया।
फिरौती में कितनी रकम की मांग की गई?
तीन दिन बाद स्थिति तब और गंभीर हो गई जब परिवार को एक अनजान व्यक्ति का फोन आया। उसने अपना नाम सिर्फ खान बताया। इसके साथ ही कॉलर ने दावा किया कि उसने ममता रुत्विक और मयूरी को अगवा कर लिया है। उनकी रिहाई के लिए एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की।
परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई?
एजेंटों को पहले ही लाखों रुपये देने के बाद आर्थिक तंगी का सामना कर रहे ममता के पिता, कीरितभाई चौहान ने सरकार से दखल देने और उनके बच्चों को बचाने की सार्वजनिक अपील की। बाद में अल्पेश पांचाल ने दावा किया कि वे तीनों कभी कनाडा पहुंचे ही नहीं है। इसके साथ ही आरोप लगाया कि उन्हें इथियोपिया में ही अगवा कर लिया गया था।
पांचाल ने दावा किया कि उनका मुख्य अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यक्ति लापता हो गया है। वहीं, कहा कि उन्होंने अपहरणकर्ताओं को पहले ही 60 लाख रुपये दे दिए थे, जो अब अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं। लंगनाज पुलिस स्टेशन के स्थानीय अधिकारियों ने इस गुमशुदगी की पूरी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने जांच तेज की
पुलिस अधिकारी ट्रैवल एजेंटों की भूमिका की सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं। फिरौती के कॉल का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही तीनों लोगों की सही लोकेशन और सुरक्षा का पता लगाने के लिए तालमेल बिठा रहे हैं।