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हादसों के लिए जिम्मेदार असफरों के हर बार बच जाती है गर्दन
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हादसों के जिम्मेदार, बच रहे हर बार
शामली। कैराना में शुक्रवार को अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए हादसे में चार लोगों की जान चली गई। जबकि चार लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। इससे पहले भी जिले में अवैध पटाखों के निर्माण और भंडारण के चलते कई लोग जान गवां चुके हैं। लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है। ऐसे हादसों के लिए कहीं न कहीं पुलिस सहित अन्य महकमों के अफसर भी जिम्मेदार होते हैं। मगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती ही नहीं। जिसके चलते यह अवैध कारोबार फिर से कहीं दूसरी जगह शुरू हो जाता है।
दीपावली से पहले ही जनपद के कई स्थानों पर अवैध रूप से आतिशबाजी बनाने का काम शुरू हो जाता है। यहां से आतिशबाजी एवं पटाखे दूसरे जनपदों में भी सप्लाई किए जाते हैं। अवैध रूप से चलने वाली पटाखा फैक्टरियों के कारीगरों के लिए सुरक्षा के मापदंडों को भी ताक पर रख दिया जाता है। जिससे कई बार बड़े हादसे हो जाते हैं। कुछ दिन तो हादसे को लेकर हो-हल्ला मचता है। बाद में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है।
शामली की ही बात की जाए तो यहां कई बार पटाखों की अवैध फैक्टरियों और गोदामों में इससे पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं। जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय पुलिस के साथ ही खुफिया विभाग, फायर ब्रिगेड, श्रम विभाग आदि महकमे ऐसी फैक्टरियों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते। जबकि कहीं न कहीं इन विभागों के अफसरों पर भी ऐसे हादसों की पूरी जिम्मेदारी बनती है। लेकिन हर बार लापरवाह अफसरों को अभयदान दे दिया जाता है। फैक्टरी संचालित करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है। यदि संबंधित महकमे के अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई हो तो ऐसे हादसों पर अंकुश लग सकता है।
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डीएम जसजीत कौर का कहना है कि कैराना में हुए हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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शामली। कैराना में शुक्रवार को अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए हादसे में चार लोगों की जान चली गई। जबकि चार लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। इससे पहले भी जिले में अवैध पटाखों के निर्माण और भंडारण के चलते कई लोग जान गवां चुके हैं। लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है। ऐसे हादसों के लिए कहीं न कहीं पुलिस सहित अन्य महकमों के अफसर भी जिम्मेदार होते हैं। मगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती ही नहीं। जिसके चलते यह अवैध कारोबार फिर से कहीं दूसरी जगह शुरू हो जाता है।
दीपावली से पहले ही जनपद के कई स्थानों पर अवैध रूप से आतिशबाजी बनाने का काम शुरू हो जाता है। यहां से आतिशबाजी एवं पटाखे दूसरे जनपदों में भी सप्लाई किए जाते हैं। अवैध रूप से चलने वाली पटाखा फैक्टरियों के कारीगरों के लिए सुरक्षा के मापदंडों को भी ताक पर रख दिया जाता है। जिससे कई बार बड़े हादसे हो जाते हैं। कुछ दिन तो हादसे को लेकर हो-हल्ला मचता है। बाद में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है।
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शामली की ही बात की जाए तो यहां कई बार पटाखों की अवैध फैक्टरियों और गोदामों में इससे पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं। जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय पुलिस के साथ ही खुफिया विभाग, फायर ब्रिगेड, श्रम विभाग आदि महकमे ऐसी फैक्टरियों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते। जबकि कहीं न कहीं इन विभागों के अफसरों पर भी ऐसे हादसों की पूरी जिम्मेदारी बनती है। लेकिन हर बार लापरवाह अफसरों को अभयदान दे दिया जाता है। फैक्टरी संचालित करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है। यदि संबंधित महकमे के अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई हो तो ऐसे हादसों पर अंकुश लग सकता है।
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डीएम जसजीत कौर का कहना है कि कैराना में हुए हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।