{"_id":"604d018d8ebc3ec4ab1a670e","slug":"reservation-on-reservation-publication-increased-due-to-beating-shamli-news-mrt529819750","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरक्षण प्रकाशन पर रोक से बढ़ी धड़कनें ...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरक्षण प्रकाशन पर रोक से बढ़ी धड़कनें ...
विज्ञापन
शामली/बाबरी। आरक्षण के प्रकाशन पर रोक लगने से दावेदारों की धड़कने बढ़ गईं हैं। उन्हें आरक्षण में बदलाव का डर सता रहा है। शनिवार को आरक्षण पर रोक लगने का मामला ही हर किसी की जुबान पर रहा। लोग आरक्षण में बदलाव होने के साथ ही चुनाव टलने तक की आशंका जताते रहे। चुनाव प्रचार में जी-जान से जुटे दावेदारों का उत्साह भी ठंडा पड़ गया है।
जिले की 230 ग्राम पंचायतों के प्रधानों के साथ ही 19 जिला पंचायत सदस्यों और बीडीसी सदस्यों के चुनाव के लिए आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरक्षण के अंतिम प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। इसका पता लगते ही दावेदारों का उत्साह ठंडा पड़ गया है। आरक्षण को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। गांव-देहात में शनिवार को आरक्षण प्रकाशन पर रोक का मामला ही चर्चाओं में रहा।
बाबरी क्षेत्र का गांव हिरवाड़ा का ग्राम प्रधान पद पहली बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है। इसे लेकर अनुसूचित जाति के लोगों में काफी उत्साह है, लेकिन आरक्षण प्रकाशन पर रोक लगने के बाद समाज के लोगों में मायूसी छा गई है।
विज्ञापन
शनिवार को गांव की चौपाल पर ग्रामीणों में आरक्षण को लेकर ही चर्चा चलती रही। गांव निवासी राजपाल, रगबीर सिंह, ऋषिपाल, धन्नीराम, आनंद, जगपाल सिंह आदि ने बताया कि आरक्षण में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए। दावेदार पप्पन व अमित कुमार कटारिया ने बताया चुनाव के लिए दिन-रात प्रचार में लगे हुए हैं।
आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। बाबरी क्षेत्र के गांव हिरनवाड़ा, गोगवान जलालपुर पिछड़ा वर्ग, भंदोड़ा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुए हैं। इनमें भी लोग आरक्षण को लेकर चर्चाएं करते नजर आए। डीपीआरओ आलोक शर्मा का कहना है कि शासन के आदेश के बाद आरक्षण के अंतिम प्रकाशन पर रोक लगाई गई। आगे जो भी आदेश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
जिले की 230 ग्राम पंचायतों के प्रधानों के साथ ही 19 जिला पंचायत सदस्यों और बीडीसी सदस्यों के चुनाव के लिए आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरक्षण के अंतिम प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। इसका पता लगते ही दावेदारों का उत्साह ठंडा पड़ गया है। आरक्षण को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। गांव-देहात में शनिवार को आरक्षण प्रकाशन पर रोक का मामला ही चर्चाओं में रहा।
विज्ञापन
बाबरी क्षेत्र का गांव हिरवाड़ा का ग्राम प्रधान पद पहली बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है। इसे लेकर अनुसूचित जाति के लोगों में काफी उत्साह है, लेकिन आरक्षण प्रकाशन पर रोक लगने के बाद समाज के लोगों में मायूसी छा गई है।
विज्ञापन
शनिवार को गांव की चौपाल पर ग्रामीणों में आरक्षण को लेकर ही चर्चा चलती रही। गांव निवासी राजपाल, रगबीर सिंह, ऋषिपाल, धन्नीराम, आनंद, जगपाल सिंह आदि ने बताया कि आरक्षण में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए। दावेदार पप्पन व अमित कुमार कटारिया ने बताया चुनाव के लिए दिन-रात प्रचार में लगे हुए हैं।
आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। बाबरी क्षेत्र के गांव हिरनवाड़ा, गोगवान जलालपुर पिछड़ा वर्ग, भंदोड़ा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुए हैं। इनमें भी लोग आरक्षण को लेकर चर्चाएं करते नजर आए। डीपीआरओ आलोक शर्मा का कहना है कि शासन के आदेश के बाद आरक्षण के अंतिम प्रकाशन पर रोक लगाई गई। आगे जो भी आदेश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।