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15 गांवों में गन्ने की फसल में सल्फर की भारी कमी

Sat, 27 Jun 2020 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2020 12:06 AM IST
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Reduction of sulfur in sugarcane crop in 15 villages
शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नकदी फसल गन्ने में सल्फर की भारी कमी पाई जाती है। किसान यूरिया (नत्रजन) का अधिक प्रयोग करते हैं, जिस कारण से पौधे में सल्फर की कमी और अधिक हो जाती है। अधिक नाइट्रोजन युक्त फसलों में सल्फर की कमी के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक के मुताबिक गन्ने की एक वर्ष की फसल होने के कारण इसे अन्य फसलों की तुलना में अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। शामली जिले में लगातार गन्ने की फसल ली जा रही है, जिसे हम मोनोकल्चर कहते हैं। इसमें एक ही फसल को बार-बार उगाया जाता है। फसल चक्र का प्रयोग न करने के कारण जमीन में पोषक तत्वों की कमी बढ़ती चली जाती है। प्रत्येक फसल अथवा वैरायटी का जमीन से पोषक तत्व को लेने का तरीका अलग होता है। गन्ने की फसल भी उनमें से ही एक है। यह जमीन सूक्ष्म पोषक तत्वों को अधिक लेती है। इसी कारण जिले के जनपद विभिन्न गांव टिटौली, लपराना, बिड़ौली, गोहरनी, मुंडेट, करोडी, काबड़ौत, बरला, हसनपुर, खेड़ी, बनत, जलालपुर, चौसाना, ऊन, पिंडोरा आदि में गन्ने की फसल में सल्फर की कमी पाई गई है, जो एक प्रकार से असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग की श्रेणी में भी आता है।
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यूरिया का करते हैं अधिक प्रयोग
किसान यूरिया (नत्रजन) का अधिक प्रयोग करते हैं, जिस कारण से पौधे में सल्फर की कमी अधिक हो जाती है। अधिक नाइट्रोजन युक्त फसलों में सल्फर की कमी के लक्षण उत्पन्न हो जाते है। जिले में सल्फर का प्रयोग भी किसान कम करते हैं। सल्फर पौधों में सल्फेट के रूप में अवशोषित होता है। यह प्रोटीन, अमीनो एसिड तथा विटामिंस का मुख्य अवयव है तथा पौधों की जड़ों की बढ़वार के लिए मुख्य रूप से सहायक होता है। गन्ने की फसल दो वर्ष तक ली जाती है, इसलिए जड़ों का विकास अच्छा होना बेहद आवश्यक है, जिसके लिए सल्फर नितांत आवश्यक है। सल्फर के अभाव में पौधे पीले, हल्के पतले, आकार के छोटे हो जाते हैं तथा पौधे का तना पतला और सख्त हो जाता है। नई पत्तियां हल्के हरे रंग की पड़ जाती हैं, बाद में पुरानी पत्तियां भी हल्के हरे और बैंगनी रंग की दिखाई देने लगती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं हो पाती।
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