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जिले में तेजी से हो रहा विकास, सड़कों-हाईवे का बिछ रहा जाल

Sun, 12 Dec 2021 12:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 12:45 AM IST
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Rapid development in the district, a network of roads and highways is being laid
निर्माणाधीन दिल्ली-सहारनपुर हाईवे - फोटो : SHAMLI
जिले में तेजी से हो रहा विकास, सड़क - हाईवे का बिछ रहा जाल
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शामली। पिछले 35 वर्ष में शामली शहर की सूरत पूरी तरह से बदल गई। इन वर्षों में शहर ने तरक्की की नई इबारत लिखी। 28 सितंबर 2011 में शामली को जिले का दर्जा मिला तो इसकी विकास की रफ्तार तेज हुई। शहर की सीमा बढ़ी, कई सरकारी दफ्तर खुले और आज शामली तरक्की के रास्ते पर तेजी से दौड़ रहा है। जिले में सड़कों और हाईवे का जाल बिछ रहा है। यहां के विकास के मुद्दों को अमर उजाला ने बढ़चढ़ कर उठाया। मेरठ-करनाल फोर लेन बनने से तो यहां से करनाल का रास्ता ही एक घंटे से भी कम का रह गया है। पहले टूटी सड़क पर जाने से दो घंटे लगते थे। अमर उजाला भी इस मुद्दे पर लोगों की आवाज बना और समस्या को प्रमुखता से उठाया था यही वजह रही कि सरकार ने इसकी सुध ली। अब इसके चौड़ीकरण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसके अलावा पानीपत-खटीमा हाईवे का निर्माण भी चल रहा है। शहर के चारों ओर बाईपास का निर्माण किया जा रहा है। जो रिंग रोड की तरह शहर की जाम की समस्या को समाप्त करेंगे। दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर और अंबाला शामली एक्सप्रेसवे की निर्माण प्रक्रिया भी चल रही है।
जिला बनने के बाद बदल गई शहर की सूरत
शामली शहर करीब 35 साल पहले केवल अंजता चौक, विजय चौक और रेलवे फाटक तक सिमटा हुआ था, लेकिन धीरे- धीरे शहर का विस्तार किया गया और दायरा बढ़ा। मुजफ्फरनगर जिले का ही हिस्सा होने के कारण शामली 90 से 2000 के दशक में काफी उपेक्षित रहा। सड़कों और हाईवे ही हालत भी बेहद खराब थी। लेकिन 2011 में जिला बनने के बाद शहर बदलना शुरू हो गया। अब शहर की सड़कों पर हाईमास्क एलईडी की रोशनी है। शहर का धीमानपुरा क्षेत्र जो सबसे पुराना मोहल्ला है, यह अब लगभग दो किलोमीटर के दायरे में फैल गया है।
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बिजली संकट से मिली निजात
35 साल पहले शहर को भी 12 घंटे बिजली मिलती थी और गांव को दो दिन में छह से आठ घंटे। वजह एक एक फीडर से कई गांव जुडे़ थे। बिजली के लिए धरने प्रदर्शन करने पड़ते थे। 35 साल में जिले में 132, 33 केवीए के 30 से ज्यादा बिजलीघर बने। बिजलीघरों पर धरने-प्रदर्शन आम बात थी। अब गांव में 20 घंटे और शहरों में तो 24 घंटे बिजली मिल रही है। चौसाना के खोड़समा में 400 केवीए के बिजलीघर से समस्या काफी हद तक दूर कर दी। बंतीखेड़ा में करीब 800 करोड़ की लागत से बिजलीघर तैयार हो रहा है।
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शहर काफी पिछड़ी हालत में था
क्या कहते हैँ लोग
पहले यातायात के संसाधन काफी सीमित थे। हरिद्वार, देहरादून जाने को सीधी बस नहीं थी। मेरठ के लिए भी दिन में तीन चार बस मिलती थी। घोड़ा तांगा खूब चलते थे, लेकिन तांगे में सवारी पूरी होने पर ही चलते थे। मगर अब कई बसें इन रूट पर हैं। - त्रिलोकचंद निर्वाल, बुजुर्ग

पहले व्यापारियों के फूड लाइसेंस या अन्य छोटे से काम को भी मुजफ्फरनगर जाना पड़ता था। पूरा दिन लगता था लेकिन अब जिला बनने के बाद बहुत सहूलियत हो गई है। यहां के व्यापारियों ने बागपत के जिला बनते ही शामली के भी जिला बनाने की मांग उठा थी। अमर उजाला भी उनकी आवाज बना और जनता की बातें उठाई। इसी का नतीजा आज सामने है। - घनश्यास गर्ग, व्यापारी नेता
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