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7910 हेक्टेयर में लहराएगी पूसा बासमती धान की फसल

Tue, 07 Jul 2020 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2020 11:51 PM IST
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Pusa Basmati paddy crop to be sown in 7910 hectare
शामली। इस बार जिले में सात हजार 910 हेक्टेयर में पूसा बासमती धान की फसल लहराएगी।
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धान की रोपाई युद्ध स्तर पर किसानों द्वारा की जा रही है। जून के माह में धान की रोपाई के लिए पौध तैयार की जाती है। धान की नर्सरी किसानों द्वारा तैयार करने के बाद जुलाई माह शुरू होते ही किसानों द्वारा धान की रोपाई शुरू होती है। जिला कृषि अधिकारी डॉक्टर हरीसिंह सिंह ने बताया कि जिला मुख्यालय को शासन से 182 क्विंटल 16 किलो धान का बीज किसानों को वितरित करने के उद्देश्य से उपलब्ध किया गया था। जिसमें किसानों को धान उपलब्ध बीज वितरित किया जा चुका है। पूसा बासमती 1509, पूसा सुगंधा, 1121,पीबी टूडल आदि का किसान रोपाई कर रहा है। जिले में 30 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है। उधर, कृषि विज्ञान केंद्र शामली के वैज्ञानिक शीशपाल सिंह का कहना है कि धान रोपाई के समय जल प्रबंधन में केवल 3-5 सेमी भी जल पर्याप्त है। खेत में रोपाई के बाद दरार बनने से पहले हल्की सिंचाई करनी चाहिए, बाद में जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ा कर 3-5 सेमी मीटर से भी तक कर देना चाहिए। यह 3-5 सेमी जलस्तर पहले 30 दिन तक बनाए रखें। इससे खरपतवार नियंत्रण में सहायता मिलेगी। इसके पश्चात दाने भरने तक केवल खेत गीला रखने से भी पूरी पैदावार मिलेगी। खेत में दरार न पड़ने दें किंतु बाद निकलने एवं दाने में दूध बनने की दशा में पानी खेत में भरा रखने से लाभ होता है।

खरपतवार पर कैसे करें नियंत्रण
उन्होंने बताया कि मानव श्रम उपलब्ध होने पर धान की दो बार क्रमश: 20 व 40 दिन पर निराई कर देनी चाहिए। रसायनिक नियंत्रण हेतु रोपाई के 3-4 दिन के अंदर ब्यूटाक्लोर 50 ईसी 3-4 लीटर 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें या 5 प्रतिशत ब्यूटाक्लोर ग्रेन्यूल की 30-40 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें। उक्त रसायन के उपलब्ध नहीं होने पर प्रीटिलाक्लोर 50 ईसी 1.5 लीटर या एनिलोफास 30 ई सी का 1.65 लीटर मात्रा रोपाई के 3-4 दिन के अंदर प्रयोग करें। ध्यान रहे कि खेत में दानेदार रसायनों के प्रयोग के समय 4-5 सेंमी पानी अवश्य भरा रहे।
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