चर्चित मर्डर केस: फांसी की सजा और जेल की पहली रात... कातिल के चेहरे पर न दिखा गम; बेफिक्र खाया खाना और फिर...?
Ajay Pathak Murder Case : प्रसिद्ध भजन गायक अजय पाठक हत्याकांड के दोषी को फांसी की सजा हुई। सजा मिलने के बाद जेल पहुंचा कातिल हिमांशु बेफिक्र दिखा और उसके चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी। उसने रोजाना की तरह आराम से खाना खाया। पढ़िए आखिर सजा मिलने के बाद जेल में उसकी पहली रात कैसे गुजरी।
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प्रसिद्ध भजन गायक अजय पाठक के परिवार के हत्यारे हिमांशु सैनी को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोषी ठहराते हुए एक दिन पहले मृत्यु दंड की सजा सुनाई थी। सजा के बाद मुजफ्फरनगर जेल पहुंचे हत्यारे के चेहरे पर न तो कोई शिकन है और उसे न कोई गम है। जेल में अन्य दिनों की तरह ही उसने रात में खाना खाया।
30 दिसंबर 2019 की रात शामली शहर की पंजाबी कॉलोनी निवासी प्रसिद्ध भजन गायक अजय पाठक, उनकी पत्नी स्नेहलता, बेटी वसुंधरा व 10 वर्षीय बेटे भागवत की तलवार, खंजर से काटकर हत्या कर दी गई थी।
इस जघन्य हत्याकांड के अगले दिन भजन गायक अजय पाठक के शिष्य रहे हिमांशु सैनी निवासी गांव झाड़खेड़ी थाना कैराना को पानीपत टोल प्लाजा के पास से अजय पाठक की जली हुई गाड़ी व बेटे भागवत के अधजले शव के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।
पुलिस ने हत्यारे की निशानदेही पर अजय पाठक के घर से लूटे गए लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर व नगदी दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र के संतनगर में एक फ्लैट से बरामद किए थे। हत्याकांड के करीब साढ़े चार साल बाद बुधवार को जनपद एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार ने हत्यारे हिमांशु सैनी को दोषी ठहराते हुए उसे मृत्यु दंड की सजा सुनाई थी।
सजा के बाद हत्यारे को मुजफ्फरनगर जेल ले जाया गया। जेल सूत्रों के अनुसार फांसी की सजा मिलने के बाद भी हत्यारे को कोई गम नजर नहीं आया। हर दिन की तरह ही उसने रात के समय खाना खाया और पानी पीया। उधर, डेथ वारंट भी जेल भेज दिया गया है। मुजफ्फरनगर जेल के अधीक्षक ने बताया कि अन्य दिनों की तरह ही हिमांशु ने खाने का सेवन किया।
छोटा भाई कर रहा मजदूरी, अपील करने के लिए रुपये नहीं
हत्यारे हिमांशु सैनी के पिता मुकेश सैनी की करीब 11 साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। घर में हिमांशु सैनी की मां जगवती, करीब पांच वर्षीय एक बेटा आयुष और पत्नी वर्षा है। वहीं हिमांशु सैनी के छोटे भाई शैंकी ने बताया कि हत्याकांड के समय वह दिल्ली में ग्रेजुऐशन की पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और अब परिवार का पेट पालने के लिए मेहनत मजदूरी कर रहा है।
उसने बताया कि हिमांशु सैनी के गंगोह निवासी ससुर सेहंदर ने पैरवी के लिए मुजफ्फरनगर में एक अधिवक्ता को किया था। हिमांशु सैनी की फांसी की सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की बात पर शैंकी ने कहा कि वे सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में कोई अपील नहींं करेंगे। उनके पास वकील करने के लिए पैसा नहीं है।
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जल्द दी जाए फांसी
अजय पाठक के भाई डॉ. हरिओम पाठक और दिनेश पाठक का कहना है कि जल्द से जल्द हत्यारे हिमांशु को फांसी दी जानी चाहिए। कहा कि न्यायालय ने परिवार को इंसाफ दिलाया है। मगर असली इंसाफ फांसी लगने के बाद ही मिलेगा।
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