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जहर से प्यास बुझाने को मजबूर ग्रामीण
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Fri, 06 Nov 2015 01:02 AM IST
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शामली। जीने के बेहद जरूरी पानी ही अगर जहर बन जाए तो! यह नजारा उन गांवों का है जो हिंडन और कृष्णा नदी के किनारे बसे हैं। जिले में बह रहीं इन नदियों का पानी इतना जहरीला हो गया है कि इनके आसपास बसे गांवों में इंसान ही नहीं, जानवरों तक का अस्तित्व खतरे में है।
गांवों में महिलाएं, बच्चे, बूढ़े सभी इस जहरीले पानी के कारण कई रोगों से ग्रस्त हैं। शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में शासन और प्रशासन की लापरवाही के बाद अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बड़ा फैसला लिया है। इससे बीमार पड़े गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है। मगर, यहां कुछ ऐसे और गांव हैं, जहां एनजीटी के फैसले को तत्काल अमल में लाने की जरूरत है। उधर, प्रशासन के सामने गांवों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की चुनौती होगी।
दरअसल, शामली जिले में कृष्णा नदी और हिंडन नदी के आसपास के दर्जनों गांव प्रदूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। विषैला पानी पीने के कारण गांव में बीमारियां फैल रही हैं। पूर्व में इन बीमारियों के कारण कई मौतें भी हो चुकी हैं। ग्रामीण आंदोलन करते हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाता।
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अब एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए शामली जिले के भी कुछ गांवों में विषैला पानी देने के कारण हैंडपंपों को सील लगाने का आदेश दिया है। इसका अनुपालन जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को जल निगम के सहयोग से कराना है।
आंदोलन भी काम नहीं आता
जलालाबाद क्षेत्र में कृष्णा नदी किनारे बसे गांव चंदेना माल में कई साल से हैंडपंप विषैला पानी दे रहे हैं। चार साल पूर्व यहां विषैले पानी के कारण बीमारियां फैलने पर कई लोगों की मौत हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन कर चुनाव का बहिष्कार तक किया। अफसरों और राजनीतिक लोगों से गुहार लगाई। फिर तय हुआ कि कृष्णा नदी में गंगनहर का पानी छुड़वाया जाएगा। एक दो बार गंगनहर का पानी छुड़वाया गया, मगर फिर वही हाल हो गया। चंदेना माल के प्रधान खड़क सिंह का कहना है कि वर्तमान में भी गांवों में कैंसर और अन्य बीमारियां फैल रही हैं।
पेयजल आपूर्ति से बढ़ेगी समस्या
बेशक एनजीटी ने हैंडपंपों को सील लगाने के बाद प्रभावित गांवों में जीपीएस वाली गाड़ियों से स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था बनाना आसान नहीं होगा। प्रभावित गांवों में ही हैंडपंपों की संख्या करीब 1500 है। यदि ये हैंडपंप बंद हो जाते हैं, तो गांवों में पेयजल आपूर्ति की समस्या होगी। पशुओं को पानी पिलाने का भी संकट खड़ा होगा।
प्रभावित गांव
गंदेवड़ा, चंदेना माल, रशीदगढ़, दखौड़ी जमालपुर, दभेडी, रसूलपुर, महरमपुर, किरौडी, जलालाबाद, सिक्का, सिलावर, गोमतीपुर, बनत, हरड़ फतेहपुर, सेंहटा, झाल, काबड़ौत, सुन्ना, सल्फा। इनके अलावा यमुना नहर किनारे के कई गांवों प्रदूषित पानी की समस्या परेशान हैं।
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गांवों में महिलाएं, बच्चे, बूढ़े सभी इस जहरीले पानी के कारण कई रोगों से ग्रस्त हैं। शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में शासन और प्रशासन की लापरवाही के बाद अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बड़ा फैसला लिया है। इससे बीमार पड़े गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है। मगर, यहां कुछ ऐसे और गांव हैं, जहां एनजीटी के फैसले को तत्काल अमल में लाने की जरूरत है। उधर, प्रशासन के सामने गांवों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की चुनौती होगी।
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दरअसल, शामली जिले में कृष्णा नदी और हिंडन नदी के आसपास के दर्जनों गांव प्रदूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। विषैला पानी पीने के कारण गांव में बीमारियां फैल रही हैं। पूर्व में इन बीमारियों के कारण कई मौतें भी हो चुकी हैं। ग्रामीण आंदोलन करते हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाता।
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अब एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए शामली जिले के भी कुछ गांवों में विषैला पानी देने के कारण हैंडपंपों को सील लगाने का आदेश दिया है। इसका अनुपालन जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को जल निगम के सहयोग से कराना है।
आंदोलन भी काम नहीं आता
जलालाबाद क्षेत्र में कृष्णा नदी किनारे बसे गांव चंदेना माल में कई साल से हैंडपंप विषैला पानी दे रहे हैं। चार साल पूर्व यहां विषैले पानी के कारण बीमारियां फैलने पर कई लोगों की मौत हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन कर चुनाव का बहिष्कार तक किया। अफसरों और राजनीतिक लोगों से गुहार लगाई। फिर तय हुआ कि कृष्णा नदी में गंगनहर का पानी छुड़वाया जाएगा। एक दो बार गंगनहर का पानी छुड़वाया गया, मगर फिर वही हाल हो गया। चंदेना माल के प्रधान खड़क सिंह का कहना है कि वर्तमान में भी गांवों में कैंसर और अन्य बीमारियां फैल रही हैं।
पेयजल आपूर्ति से बढ़ेगी समस्या
बेशक एनजीटी ने हैंडपंपों को सील लगाने के बाद प्रभावित गांवों में जीपीएस वाली गाड़ियों से स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था बनाना आसान नहीं होगा। प्रभावित गांवों में ही हैंडपंपों की संख्या करीब 1500 है। यदि ये हैंडपंप बंद हो जाते हैं, तो गांवों में पेयजल आपूर्ति की समस्या होगी। पशुओं को पानी पिलाने का भी संकट खड़ा होगा।
प्रभावित गांव
गंदेवड़ा, चंदेना माल, रशीदगढ़, दखौड़ी जमालपुर, दभेडी, रसूलपुर, महरमपुर, किरौडी, जलालाबाद, सिक्का, सिलावर, गोमतीपुर, बनत, हरड़ फतेहपुर, सेंहटा, झाल, काबड़ौत, सुन्ना, सल्फा। इनके अलावा यमुना नहर किनारे के कई गांवों प्रदूषित पानी की समस्या परेशान हैं।