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पीएम आवास योजना में भ्रष्टाचार, रिश्वत न देने पर नहीं मिली पक्की छत

Mon, 04 Oct 2021 12:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 04 Oct 2021 12:54 AM IST
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PM Awas Yojana: No concrete roof was found for not paying bribe
झिंझाना। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना क्षेत्र में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। योजना के तहत अपात्रों के आवास बन गए, जबकि कई पात्र इस योजना से कोसों दूर है। कई परिवार झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। जिनका कहना है कि सर्वे के दौरान किसी न किसी के माध्यम से उनसे रिश्वत मांगी गई, जो वह नहीं दे पाए। इसलिए उन्हें पक्की छत नसीब नहीं हुई। सरकार की योजना का लाभ पात्रों को नहीं मिल पाता। सरकारी तंत्र ढोल बजाकर योजनाओं का प्रचार-प्रसार ही करने में लगे रहते हैं।
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केस-1
ऊन ब्लॉक की ग्राम सभा जटान-खानपुर का मजरा डेरा थानू बावरिया जाति का बाहुल्य गांव है। इस गांव के होशियार सिंह मजदूरी करते है। करीब 15 वर्षों से झोपड़ी में 6 बच्चों के साथ रहते है। होशियार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में उसने कई बार प्रधान व पूर्व प्रधान से आवास दिलाने की मांग की। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनसे रिश्वत की मांग की। रिश्वत न देने पर आज तक भी योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
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केस-2
डेरा थानू का ही प्रेम भी एक अपने परिवार के साथ कई साल से झोपड़ी में रहता है। वह भी राज मिस्त्री का कार्य करने के लिए प्रतिदिन शामली जाता है। बारिश और सर्दियों में परिवार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।
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केस-3
सींगरा ग्राम सभा के मजरे नयाबांस गांव की रामरति बताती है कि उनके पति धनराज की 2 वर्ष पूर्व डेंगू से मौत हो गई थी। उनके तीन बच्चे हैं। झोपड़ी की हालत भी खराब हो जाने के कारण वह बराबर में फिलहाल जेठ के मकान में 6 वर्ष से रह रही है। जिसमें केवल दीवारें हैं छत उनके मकान में भी नहीं है।
केस-4
सींगरा गांव में बृजपाल और बिरजू अपनी मां माया के साथ एक झोपड़ी में रहने को मजबूर है। करीब 6 वर्ष से यहां रह रहे हैं बिरजू बेलदार है। मजदूरी करने वाले महक सिंह पुत्र दधिबल का कच्चा मकान पिछली बरसात में गिर गया था। अब वह अपने चार बच्चों के साथ पड़ोसी का मकान में रह रहा है।

भ्रष्टाचार में फंस चुके हैं कई अधिकारी
प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार के आरोप में जिले के कई अधिकारी फंस चुके हैं। थानाभवन के टंकी रोड निवासी सुशील पांचाल ने भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त के आदेश पर एडीएम और एसडीएम ने मामले की जांच की थी। जिसमें परियोजना अधिकारी, अधिशासी अधिकारी, कार्यदायी संस्था स्पेस कंबाइन कंपनी व हल्का लेखपाल दोषी पाए गए। डीएम जसजीत कौर ने इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए इनके विभाग को पत्र भेजा है। डीएम का कहना है कि योजना के तहत आवेदन करने वालों को पात्रता के आधार पर लाभार्थी बनाया जाएगा।
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