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गन्ने की फसल में कीट और रोग से कम हुआ उत्पादन
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शामली। पिछले दो सालों से बढ़ती बीमारियों के चलते गन्ने का उत्पादन कम हो रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल जिले की चीनी मिलों को 24.38 लाख क्विंटल कम गन्ना मिला है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल करीब आठ प्रतिशत गन्ना चीनी मिलों को कम मिला है।
इस साल नए पेराई सत्र में जिले की थानाभवन चीनी मिल को 1.27 करोड़ क्विंटल गन्ना मिला है। पिछले साल मिल ने 1.36 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। इस साल थानाभवन चीनी मिल को 9.73 लाख क्विंटल गन्ना कम मिला है। ऊन चीनी मिल को पिछले साल 1.05 करोड़ क्विंटल गन्ना मिला था। इस साल 97.49 लाख क्विंटल मिला है। जो पिछले साल से 7.63 लाख क्विंटल कम है। अपर दो आब शुगर मिल का फिलहाल पेराई सत्र चल रहा है। इस मिल ने पिछले पेराई सत्र में 1.13 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। वर्तमान पेराई सत्र खत्म होने में सिर्फ तीन दिन बाकी है।
आगामी 15 मई को शामली चीनी मिल बंद हो जाएगी। बृहस्पतिवार तक मिल को 1.05 करोड़ क्विंटल गन्ना मिल पाया है। अगले तीन दिन में ज्यादा से ज्यादा एक लाख क्विंटल मिलने की उम्मीद है। मिल को पिछले वर्ष की तुलना में 7.02 लाख क्विंटल कम गन्ना मिल पाया है। ऊन मिल पांच दिन पूर्व और थानाभवन चीनी मिल 15 दिन पूर्व बंद हो चुकी है। डीसीओ विजय बहादुर सिह के मुताबिक गन्ने की फसल रोगग्रस्त हो गई है। इस साल पेड़ी से लेकर पौधे तक गन्ने की फसल रोग ग्रस्त है। बीमारियों से नहीं बचाया गया तो अगले साल गन्ने का उत्पादन और रिकवरी कम हो जाएगी।
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कीड़ों और रोगों से गन्ने की फसल आठ से दस प्रतिशत प्रभावित
कृषि विज्ञान केंद्र जलालपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक का कहना है कि चीनी मिलों को कम गन्ना मिलने का कारण फसल में कीड़े और बीमारियों का आना है। जिससे आठ से दस प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है। पिछले साल गन्ने की फसल में बीमारी जुलाई-अगस्त में आई थी। इस साल मार्च और अप्रैल में ही आ गई है। गन्ने की फसल को बचाने के लिए गन्ना विभाग और मंडल के 17 चीनी मिलों के गन्ना प्रबंधकों की बैठक बुलाकर सावधान किया था। यदि इस बार किसान और चीनी मिलों ने गन्ने की फसल को बचाने का काम नहीं किया तो गन्ने का उत्पादन बीस से लेकर पच्चीस प्रतिशत कम हो सकता है। रिकवरी भी प्रभावित हो सकती है।
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इस साल नए पेराई सत्र में जिले की थानाभवन चीनी मिल को 1.27 करोड़ क्विंटल गन्ना मिला है। पिछले साल मिल ने 1.36 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। इस साल थानाभवन चीनी मिल को 9.73 लाख क्विंटल गन्ना कम मिला है। ऊन चीनी मिल को पिछले साल 1.05 करोड़ क्विंटल गन्ना मिला था। इस साल 97.49 लाख क्विंटल मिला है। जो पिछले साल से 7.63 लाख क्विंटल कम है। अपर दो आब शुगर मिल का फिलहाल पेराई सत्र चल रहा है। इस मिल ने पिछले पेराई सत्र में 1.13 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। वर्तमान पेराई सत्र खत्म होने में सिर्फ तीन दिन बाकी है।
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आगामी 15 मई को शामली चीनी मिल बंद हो जाएगी। बृहस्पतिवार तक मिल को 1.05 करोड़ क्विंटल गन्ना मिल पाया है। अगले तीन दिन में ज्यादा से ज्यादा एक लाख क्विंटल मिलने की उम्मीद है। मिल को पिछले वर्ष की तुलना में 7.02 लाख क्विंटल कम गन्ना मिल पाया है। ऊन मिल पांच दिन पूर्व और थानाभवन चीनी मिल 15 दिन पूर्व बंद हो चुकी है। डीसीओ विजय बहादुर सिह के मुताबिक गन्ने की फसल रोगग्रस्त हो गई है। इस साल पेड़ी से लेकर पौधे तक गन्ने की फसल रोग ग्रस्त है। बीमारियों से नहीं बचाया गया तो अगले साल गन्ने का उत्पादन और रिकवरी कम हो जाएगी।
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कीड़ों और रोगों से गन्ने की फसल आठ से दस प्रतिशत प्रभावित
कृषि विज्ञान केंद्र जलालपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक का कहना है कि चीनी मिलों को कम गन्ना मिलने का कारण फसल में कीड़े और बीमारियों का आना है। जिससे आठ से दस प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है। पिछले साल गन्ने की फसल में बीमारी जुलाई-अगस्त में आई थी। इस साल मार्च और अप्रैल में ही आ गई है। गन्ने की फसल को बचाने के लिए गन्ना विभाग और मंडल के 17 चीनी मिलों के गन्ना प्रबंधकों की बैठक बुलाकर सावधान किया था। यदि इस बार किसान और चीनी मिलों ने गन्ने की फसल को बचाने का काम नहीं किया तो गन्ने का उत्पादन बीस से लेकर पच्चीस प्रतिशत कम हो सकता है। रिकवरी भी प्रभावित हो सकती है।