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शाम होते ही बसों के लिए तरस जाते हैं यात्री
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शाम होते ही बसों के लिए तरस जाते हैं यात्री
शामली। जिले की यातायात व्यवस्था बेहद लचर है। कई महत्वपूर्ण रूटों पर शाम पांच बजे के बाद रोडवेज की बसें नहीं मिल पाती। यात्रियों को या तो प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है या अपने निजी वाहनों से ही गंतव्य तक जाना पड़ता है। बसों के संकट के कारण शाम के बाद लोग यात्रा पर निकलते ही नहीं हैं।
शामली से मेरठ, दिल्ली, पानीपत, सहारनपुर, करनाल और मुजफ्फरनगर के प्रमुख रूट हैं। इनमें दिल्ली रूट पर तो रात नौ बजे तक भी बस मिल जाती है, लेकिन मेरठ, मुजफ्फरनगर, पानीपत और सहारनपुर जैैसे महत्वपूर्ण रूट पर शाम पांच बजे के बाद रोडवेज की बसें नहीं मिलती हैं। यात्री पांच बजे के बाद इधर-उधर परेशान घूमते रहते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। रविवार शाम भी पांच बजे के बाद कई यात्री सहारनपुर के लिए बस का इंतजार करते नजर आए, लेकिन रात 8.30 बजे तक भी बस नहीं मिल पाई। उधर, रोडवेज के एआरएम मनोज वाजपेयी का कहना है कि मेरठ रूट पर साढ़े छह बजे, मुजफ्फरनगर के लिए सात बजे, पानीपत के लिए साढ़े पांच बजे, सहारनपुर और दिल्ली के लिए नौ बजे तक बस जाती है। शामली में अनुबंधित बसों का डिपो है। बसों की संख्या कम होने के कारण दिक्कत रहती है।
निजी बसों को पहुंचता है फायदा
शामली। शाम पांच बजे के बाद कई रूटों पर रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने का सीधा फायदा निजी बसों को होता है। मुजफ्फरनगर और कैराना के लिए साढ़े सात बजे, गढ़ीपुख्ता के लिए साढ़े सात बजे तक भी निजी बसें चलती हैं। शाम को यात्री घर पहुंचने के लिए इन बसों का ही सहारा लेते हैं।
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पांच बजे के बाद ई-रिक्शा का सहारा
गढ़ीपुख्ता। कस्बे से शामली या मुजफ्फरनगर जाने के लिए रोडवेज बस की सुविधा नहीं है। यात्रियों को प्राइवेट बसों का ही सहारा है। ये भी दिनभर में चार-पांच गाड़ियां ही चलती हैं। दुल्लाखेडी भाट्टू से गढ़ीपुख्ता, मालैंडी को होकर जाती हैं। वहीं, भैंसवाल से होकर शामली जाती हैं। केवल एक बस गढ़ीपुख्ता से मुजफ्फरनगर जाती है। शाम पांच बजे के बाद शामली जाने के लिए केवल ई-रिक्शा या वैन का ही सहारा रहता है।
शाम 6.45 बजे के बाद नहीं बस की सुविधा
कैराना। कैराना से शामली व कांधला जाने के लिए शाम पौने सात बजे के बाद बस की सुविधा नहीं है, जबकि झिंझाना मार्ग पर तो अंतिम बस पौने पांच बजे ही है। इसके अलावा टांडा, सनौली व खादर क्षेत्र में जाने वाले टैंपो भी शाम चार बजे के बाद ही बंद हो जाते हैं। कांधला मार्ग पर ऊंचागांव, आल्दी, जिडाना, गढ़ीदौलत, किशोरपुर आदि गांव पड़ते हैं। शामली मार्ग पर मन्ना माजरा, जगनपुर, कंडेला, हिंग्गोखेडी, शेखुपुरा, बामनौली आदि गांव पड़ते हैं। इन गांवों को जाने के लिए लोग ई-रिक्शा से जाते हैं। झिंझाना मार्ग पर शाम पौने पांच बजे के बाद भूरा, जंधेडी, बराला, गोगवान, पावटी कला गांवों को जाने के लिए लोगों को ट्रकों का ही सहारा है। टांडा मार्ग पर झाडखेडी, तीतरवाडा, सहपत, डुंडुखेडा, इस्सोपुर टील आदि पड़ते हैं। इस पर शाम चार बजे के बाद कोई सवारी नहीं है। खादर मार्ग पर मलकपुर, गंदराऊ, खुरगान, अकबरपुर सुनहेटी, दभेड़ी खुर्द, मंडावर आदि मार्ग पर ई-रिक्शा, जुगाड़ आदि चलते हैं, लेकिन इनका कोई भी समय नहीं है।
छह बजे के बाद नहीं मिल पाती बस
थानाभवन। थानाभवन से ऊन, झिंझाना मार्ग के लिए शाम छह बजे के बाद कोई वाहन नहीं मिलता। वैसे दिन में भी लोग इस मार्ग पर डग्गामार वाहनों के ही भरोसे हैं। शाम के बाद यहां भी लोगों को अपने घर जाने के लिए साधन नहीं मिलता, जबकि शाम सात बजे के बाद चरथावल व मुजफ्फरनगर जाने वाले यात्रियों को बस नहीं मिल पाती।
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शामली। जिले की यातायात व्यवस्था बेहद लचर है। कई महत्वपूर्ण रूटों पर शाम पांच बजे के बाद रोडवेज की बसें नहीं मिल पाती। यात्रियों को या तो प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है या अपने निजी वाहनों से ही गंतव्य तक जाना पड़ता है। बसों के संकट के कारण शाम के बाद लोग यात्रा पर निकलते ही नहीं हैं।
शामली से मेरठ, दिल्ली, पानीपत, सहारनपुर, करनाल और मुजफ्फरनगर के प्रमुख रूट हैं। इनमें दिल्ली रूट पर तो रात नौ बजे तक भी बस मिल जाती है, लेकिन मेरठ, मुजफ्फरनगर, पानीपत और सहारनपुर जैैसे महत्वपूर्ण रूट पर शाम पांच बजे के बाद रोडवेज की बसें नहीं मिलती हैं। यात्री पांच बजे के बाद इधर-उधर परेशान घूमते रहते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। रविवार शाम भी पांच बजे के बाद कई यात्री सहारनपुर के लिए बस का इंतजार करते नजर आए, लेकिन रात 8.30 बजे तक भी बस नहीं मिल पाई। उधर, रोडवेज के एआरएम मनोज वाजपेयी का कहना है कि मेरठ रूट पर साढ़े छह बजे, मुजफ्फरनगर के लिए सात बजे, पानीपत के लिए साढ़े पांच बजे, सहारनपुर और दिल्ली के लिए नौ बजे तक बस जाती है। शामली में अनुबंधित बसों का डिपो है। बसों की संख्या कम होने के कारण दिक्कत रहती है।
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निजी बसों को पहुंचता है फायदा
शामली। शाम पांच बजे के बाद कई रूटों पर रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने का सीधा फायदा निजी बसों को होता है। मुजफ्फरनगर और कैराना के लिए साढ़े सात बजे, गढ़ीपुख्ता के लिए साढ़े सात बजे तक भी निजी बसें चलती हैं। शाम को यात्री घर पहुंचने के लिए इन बसों का ही सहारा लेते हैं।
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पांच बजे के बाद ई-रिक्शा का सहारा
गढ़ीपुख्ता। कस्बे से शामली या मुजफ्फरनगर जाने के लिए रोडवेज बस की सुविधा नहीं है। यात्रियों को प्राइवेट बसों का ही सहारा है। ये भी दिनभर में चार-पांच गाड़ियां ही चलती हैं। दुल्लाखेडी भाट्टू से गढ़ीपुख्ता, मालैंडी को होकर जाती हैं। वहीं, भैंसवाल से होकर शामली जाती हैं। केवल एक बस गढ़ीपुख्ता से मुजफ्फरनगर जाती है। शाम पांच बजे के बाद शामली जाने के लिए केवल ई-रिक्शा या वैन का ही सहारा रहता है।
शाम 6.45 बजे के बाद नहीं बस की सुविधा
कैराना। कैराना से शामली व कांधला जाने के लिए शाम पौने सात बजे के बाद बस की सुविधा नहीं है, जबकि झिंझाना मार्ग पर तो अंतिम बस पौने पांच बजे ही है। इसके अलावा टांडा, सनौली व खादर क्षेत्र में जाने वाले टैंपो भी शाम चार बजे के बाद ही बंद हो जाते हैं। कांधला मार्ग पर ऊंचागांव, आल्दी, जिडाना, गढ़ीदौलत, किशोरपुर आदि गांव पड़ते हैं। शामली मार्ग पर मन्ना माजरा, जगनपुर, कंडेला, हिंग्गोखेडी, शेखुपुरा, बामनौली आदि गांव पड़ते हैं। इन गांवों को जाने के लिए लोग ई-रिक्शा से जाते हैं। झिंझाना मार्ग पर शाम पौने पांच बजे के बाद भूरा, जंधेडी, बराला, गोगवान, पावटी कला गांवों को जाने के लिए लोगों को ट्रकों का ही सहारा है। टांडा मार्ग पर झाडखेडी, तीतरवाडा, सहपत, डुंडुखेडा, इस्सोपुर टील आदि पड़ते हैं। इस पर शाम चार बजे के बाद कोई सवारी नहीं है। खादर मार्ग पर मलकपुर, गंदराऊ, खुरगान, अकबरपुर सुनहेटी, दभेड़ी खुर्द, मंडावर आदि मार्ग पर ई-रिक्शा, जुगाड़ आदि चलते हैं, लेकिन इनका कोई भी समय नहीं है।
छह बजे के बाद नहीं मिल पाती बस
थानाभवन। थानाभवन से ऊन, झिंझाना मार्ग के लिए शाम छह बजे के बाद कोई वाहन नहीं मिलता। वैसे दिन में भी लोग इस मार्ग पर डग्गामार वाहनों के ही भरोसे हैं। शाम के बाद यहां भी लोगों को अपने घर जाने के लिए साधन नहीं मिलता, जबकि शाम सात बजे के बाद चरथावल व मुजफ्फरनगर जाने वाले यात्रियों को बस नहीं मिल पाती।