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गन्ने की फसल में चोटी बेधक रोग का प्रकोप बढ़ा

Mon, 07 Mar 2022 12:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 12:07 AM IST
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Outbreak of peak borer disease increased in sugarcane crop
शामली। जिलों में गन्ने की फसल में टॉप बोरर (चोटी बेधक) रोग का प्रकोप बढ़ गया है। इस रोग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो, गन्ने की बढ़वार रुक जाएगी। जिले के कई गांवों में यह रोग बढ़ता जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार मलिक के मुताबिक समय रहते गन्ने की फसल में इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो गन्ने की बढ़वार रुक जाएगी। गन्ने में रिकवरी कम होने से 20 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत गन्ने की फसल को प्रभावित कर देता है। गन्ने की फसल में 50 प्रतिशत से अधिक टॉप बोरर रोग का प्रकोप बढ़ गया है।
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कैसे करें पहचान
डॉ. विकास कुमार मलिक के मुताबिक चोटी बेधक के प्रौढ़ कीट सफेद रंग के शलभ (मोथ) होते हैं। मादा कीट के पीछे नारंगी रंग की रोएदार संरचना होती है। मादा कीट गन्ने की पत्तियों के निचली सतह पर 200 से 250 अंडे देकर भूरे रंग के पदार्थ से ढक देती है जो एक अंड समूह के रूप में पाए जाते हैं। अंडों से निकलकर सुंड़ियां पत्तियों की मध्य नाड़ी में प्रवेश कर भीतर ही भीतर पौधों की गोफ तक चली जाती है। जुलाई से सितंबर के महीनों में जब गन्ने में पोरियों का निर्माण हो रहा होता है या निर्माण हो जाता है उस समय इस कीट से ग्रसित गोफ सड़ने के साथ-साथ ऊपर की परियों की आंखें फुटाव कर जाती हैं। जिसके कारण एक झुंड सा बन जाता है जिसे बंची टॉप कहते हैं, जिसको आसानी से पहचाना जा सकता है।
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इस तरह फसल को बचाएं किसान
डॉ. विकास मलिक ने बताया कि चोटी बेधक के अंड परजीवी पर ट्राईकोग्रमा जापोनिकम की 50000 संख्या (चार से पांच ट्राइको कार्ड) प्रति हेक्टेयर की दर से जुलाई के प्रथम सप्ताह से अगस्त माह तक 30 दिनों के अंतराल पर खेत में छोड़ने से कीट के अंडे परजीवी समाप्त हो जाते हैं। जिनसे सुंड़ियां नहीं निकलती और फसल की सुरक्षा हो जाती है। इसके अलावा कुछ किसानों ने मई के पहले सप्ताह में फसल में 10 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने की दशा में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल की 150 मिली मात्रा 400 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों की जड़ों में छिड़काव उससे उन्हें अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं।
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