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मौसम में बदलाव से बुखार का प्रकोप बढ़ा

Tue, 08 Oct 2019 06:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Oct 2019 06:30 PM IST
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Outbreak of fever increased due to change in weather
शामली के प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती बीमार बच्चे। - फोटो : SHAMLI
शामली। मौसम में ठंड बनने से नजला, जुकाम, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की भीड़ लगी हुई है। बदलता मौसम बच्चों पर ज्यादा असर डाल रहा है। इस समय सबसे ज्यादा वायरल बुखार का प्रकोप चल रहा है। इसके अलावा टाइफाइड और मलेरिया के केस भी सामने आ रहे है।
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त्योहार शुरू होने के साथ ही मौसम में भी बदलाव आना शुरू हो गया है। एक सप्ताह पहले तक अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। मंगलवार को दिन का अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहा। एक सप्ताह में रात के तापमान में करीब पांच डिग्री की और दिन के तापमान तीन डिग्री की गिरावट आई है। इसका असर लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। खासतौर से बच्चों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाता है। इस कारण वायरल बीमारियां अपना असर दिखाने लगती है। इसके चलते नजला, जुकाम, खांसी के साथ वायरल बुखार का प्रकोप ज्यादा है। टाइफाइड और मलेरिया बुखार के केस भी आ रहे है। गंभीर बीमार बच्चों को अस्पतालों में भर्ती करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनपद में सितंबर माह में मलेरिया बुखार के 17 केस सामने आए थे।
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ब्रोंकोलाइटिस का शिकार हो रहे नौनिहाल
मौसम में ठंड बढ़ने से वायरल के साथ नौनिहाल ब्रोंकोलाइटिस का शिकार हो रहे है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. वेदभानू मलिक ने बताया कि ब्रोंकोलाइटिस से पीड़ित बच्चे आने शुरू हो गए है। यह बीमारी पांच साल तक के बच्चों पर ज्यादा असर करती है। खासतौर से दो साल तक के बच्चे ज्यादा प्रभावित होते है। इसके लक्षण निमोनिया की तरह होते है। इसमें पसली चलना, सर्दी, खांसी, छाती में घरघराहट, नाक बंद होना, चिड़चिड़ापन, ठीक से सो न पाना, दूूूध का ठीक से न पी पाना, सांस ठीक से न ले पाना और हल्का बुखार इसके लक्षण है। यह बुखार का ही दूसरा रूप है। जबकि निमोनिया में तेज बुखार होता है।
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प्लेटलेट्स कम होना डेंगू नहीं होता
आईएमए के सचिव डा. शिखर गुप्ता ने बताया कि तेज बुखार होने पर प्लेटलेट्स कम हो जाती है। प्लेटलेट्स कम होने पर घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि प्लेटलेट्स कम होने पर जरूरी नहीं होता कि उसे डेंगू है। उनका कहना है कि दिल्ली, देहरादून, मेरठ आदि में डेंगू के केस मिल रहे है। ऐसे में जिन लोगों का बड़े शहरों में आना जाना होता है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वायरल बुखार, नजला, जुकाम और खांसी के मरीज ज्यादा आ रहे है।
अस्पताल में बुखार से पीड़ित भर्ती बच्चे
हमजला (8 माह) झिंझाना, युग (ढाई माह) माजरा, प्रिंस (चार माह) हडौली, प्रियांशु (6) शामली, उमेरा (2 माह) कैराना, हमजा(6) जलालाबाद, भारया (6) कांधला और तनिष्क (एक माह) थानाभवन।

बचाव
बच्चों को सुबह-शाम ठंडे मौसम में बाहर न निकाले।
ठंडे पानी और ठंडी चीजे खाने से बचे।
शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढकने वाले कपड़े पहने।
बासी भोजन न खाए, ताजे बने भोजन का सेवन करें।
ताजे फलों का सेवन करें, हरी सब्जियां खाएं।
बाहर का खाना खाने से परहेज करें।
सब्जियों को पकाने से पहले नमक के गर्म पानी से धोएं।
साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
मच्छरों से बचाव के तरीके अपनाएं
बीमार होने पर चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
जनपद में बुखार पूरी तरह से नियंत्रण में है। मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार, नजला, जुकाम और खांसी होने की संभावना रहती है। इनसे बचाव के लिए सावधानी बरते और बीमार होने पर लापरवाही न बरते और चिकित्सक से उपचार कराएं। सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। - डा. संजय भटनागर, सीएमओ।
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