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शासन की सख्ती पर अफसरों ने कमालपुर में डेरा डाला
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:41 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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चौसाना। गांव कमालपुर में पांच लोगों की मौत के मामले को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों में हड़कंप मचा रहा। दिन भर गांव में अफसरों का आना जाना लगा रहा। बुधवार सुबह जब धर्मपाल और राजकुमार की मौत हुई, तो उसके बाद झिंझाना थानाध्यक्ष से लेकर सीओ, सहायक पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक के अलावा तहसीलदार, एसडीएम, अपर जिलाधिकारी, जिलाधिकारी और फिर बाद में मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी तथा डीआईजी शरद सचान भी गांव कमालपुर में पहुंच गए। उच्चाधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम से उन लोगों के बारे में जानकारी ली, जो हालत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए।
इसके बाद कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी व डीआईजी शरद सचान ने जोगा सिंह के घर पहुंचकर उसकी बहन से काफी देर बातचीत की। मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिलहाल बीमार लोगों को उचित उपचार दिलाया जा रहा है। हर पहलू पर जांच कराई जा रही है। जिलाधिकारी इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। वहीं, डीआईजी शरद सचान ने कहा कि मामले की जांच सहायक एसपी से कराई जा रही है।
शराब के अवैध धंधे में लिप्त था जोगा सिंह : शराब पीने के कारण गांव कमालपुर निवासी जोगा सिंह की मौत भी हुई। जोगा सिंह के बारे में मालूम चला है कि वह अवैध रूप से शराब बेचने के धंधे में काफी समय से लिप्त था। दिसंबर 2017 में ही पुलिस ने गांव में दबिश दी थी, तो जोगा सिंह ने अन्य लोगों के साथ पुलिस टीम पर हमला तक कर दिया था। अवैध रूप से शराब बेचने के मामलों में जोगा सिंह सक्रिय रहा था।
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भाकियू नेता ने भी की कार्रवाई की मांग
चौसाना। गांव कमालपुर में बुधवार को दो और लोगों की मौत होने के बाद भाकियू के युवा जिलाध्यक्ष विनोद निर्वाल सहित अन्य लोग भी गांव में पहुंच गए थे। इस दौरान विनोद निर्वाल तथा अन्य लोगों ने मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी तथा पुलिस अधिकारियों से कहा कि अवैध रूप से शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए।
आबकारी अधिकारी से रिपोर्ट तलब
शामली। कमालपुर गांव में शराब पीने से पांच लोगों की मौत के मामले में बुधवार को संयुक्त आबकारी आयुक्त मेरठ और उप आबकारी आयुक्त सहारनपुर ने शामली पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच करते हुए रिपोर्ट जिला आबकारी अधिकारी से तलब की। मेरठ से शामली पहुंचे संयुक्त आबकारी आयुक्त राजेश मणि त्रिपाठी ने जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर से बात की।
उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि शराब जहरीली होती तो उसका सबसे बड़ा असर आंखों की रोशनी पर पड़ता, जिनकी मौत हुई है उनमें से ज्यादातर बीमार रहते थे। आबकारी अधिकारियों का दावा है कि संजय टीबी का मरीज, जोगा सिंह हृदयरोगी है। ढराजकुमार की टीएलसी और डीएलसी बढ़ने की बात सामने आई है। टीम के अधिकारियों का दावा है कि यह जहरीली शराब नहीं, बल्कि फूड प्वाइजनिंग का मामला है। उधर, संयुक्त आबकारी आयुक्त मेरठ राजेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उधर, जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह ने बुुधवार को टीम के साथ गांव कमालपुर पहुंचकर मरने वालों के परिजनों से बात की। इसके बाद करनाल स्थित अस्पताल में पहुंचकर उन लोगों से बात की गई है, जो शराब पीने के बाद हालत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं।
आबकारी विभाग की निष्क्रियता भी हुई उजागर
शामली। कमालपुर गांव में शराब पीने की वजह से पांच लोगों की मौत होने के मामले में आबकारी विभाग की निष्क्रियता भी सामने आई है। क्योंकि झिंझाना क्षेत्र में अवैध रूप से शराब बिक्री कोई नई बात नहीं है। काफी समय से यह धंधा चलता आ रहा है, लेकिन आबकारी विभाग की तरफ से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कमालपुर जैसा मामला सामने आ गया।
दरअसल, आबकारी विभाग की यही जिम्मेदारी है कि वह अवैध रूप से शराब बेचने और अवैध रूप से शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। इसके लिए विभाग को आला अफसर भी समय समय पर निर्देश देतेे हैं, ताकि अवैध रूप से शराब की बिक्री को बंद किया जा सके। आलम यह है कि शामली जिले में अवैध रूप से शराब की बिक्री कभी बंद नहीं हो सकी। पिछले सप्ताह ही थानाभवन क्षेत्र के गांव चंदेनामाल में घेर से शराब का जखीरा, केमिकल सहित खाली बोतलें, पव्वे और सील लगाने का सामान तक बरामद हुआ था।
उस मामले में भी आबकारी ने सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था। जबकि वहां यह धंधा बड़े पैमाने पर किया जा रहा था, जिसमें सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा इसे अंजाम देना संभव नहीं था, लेकिन आबकारी विभाग ने उस गिरोह की जड़ें खंगालने का प्रयास नहीं किया।
गौरतलब है कि झिंझाना, चौसाना और ऊन क्षेत्र में खासकर यमुना खादर में अवैध रूप से शराब बनाने का धंधा चलता है। कमालपुर गांव में जिस शराब के पीने से पांच लोगों की मौत हुई, वह किसी ठेके से खरीदकर नहीं लाई गई। इससे स्पष्ट है कि अवैध रूप से बनाई गई शराब पीने की वजह से ही पांच लोगों की जान चली गई।
ताज्जुब यह है कि अभी तक इस मामले में आबकारी विभाग के किसी कर्मी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। उधर, जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि आबकारी विभाग के कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आबकारी के उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। वहीं, इस मामले में जो लोग दोषी होंगे, उनके िखलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
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इसके बाद कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी व डीआईजी शरद सचान ने जोगा सिंह के घर पहुंचकर उसकी बहन से काफी देर बातचीत की। मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिलहाल बीमार लोगों को उचित उपचार दिलाया जा रहा है। हर पहलू पर जांच कराई जा रही है। जिलाधिकारी इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। वहीं, डीआईजी शरद सचान ने कहा कि मामले की जांच सहायक एसपी से कराई जा रही है।
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शराब के अवैध धंधे में लिप्त था जोगा सिंह : शराब पीने के कारण गांव कमालपुर निवासी जोगा सिंह की मौत भी हुई। जोगा सिंह के बारे में मालूम चला है कि वह अवैध रूप से शराब बेचने के धंधे में काफी समय से लिप्त था। दिसंबर 2017 में ही पुलिस ने गांव में दबिश दी थी, तो जोगा सिंह ने अन्य लोगों के साथ पुलिस टीम पर हमला तक कर दिया था। अवैध रूप से शराब बेचने के मामलों में जोगा सिंह सक्रिय रहा था।
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भाकियू नेता ने भी की कार्रवाई की मांग
चौसाना। गांव कमालपुर में बुधवार को दो और लोगों की मौत होने के बाद भाकियू के युवा जिलाध्यक्ष विनोद निर्वाल सहित अन्य लोग भी गांव में पहुंच गए थे। इस दौरान विनोद निर्वाल तथा अन्य लोगों ने मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी तथा पुलिस अधिकारियों से कहा कि अवैध रूप से शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए।
आबकारी अधिकारी से रिपोर्ट तलब
शामली। कमालपुर गांव में शराब पीने से पांच लोगों की मौत के मामले में बुधवार को संयुक्त आबकारी आयुक्त मेरठ और उप आबकारी आयुक्त सहारनपुर ने शामली पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच करते हुए रिपोर्ट जिला आबकारी अधिकारी से तलब की। मेरठ से शामली पहुंचे संयुक्त आबकारी आयुक्त राजेश मणि त्रिपाठी ने जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर से बात की।
उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि शराब जहरीली होती तो उसका सबसे बड़ा असर आंखों की रोशनी पर पड़ता, जिनकी मौत हुई है उनमें से ज्यादातर बीमार रहते थे। आबकारी अधिकारियों का दावा है कि संजय टीबी का मरीज, जोगा सिंह हृदयरोगी है। ढराजकुमार की टीएलसी और डीएलसी बढ़ने की बात सामने आई है। टीम के अधिकारियों का दावा है कि यह जहरीली शराब नहीं, बल्कि फूड प्वाइजनिंग का मामला है। उधर, संयुक्त आबकारी आयुक्त मेरठ राजेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उधर, जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह ने बुुधवार को टीम के साथ गांव कमालपुर पहुंचकर मरने वालों के परिजनों से बात की। इसके बाद करनाल स्थित अस्पताल में पहुंचकर उन लोगों से बात की गई है, जो शराब पीने के बाद हालत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं।
आबकारी विभाग की निष्क्रियता भी हुई उजागर
शामली। कमालपुर गांव में शराब पीने की वजह से पांच लोगों की मौत होने के मामले में आबकारी विभाग की निष्क्रियता भी सामने आई है। क्योंकि झिंझाना क्षेत्र में अवैध रूप से शराब बिक्री कोई नई बात नहीं है। काफी समय से यह धंधा चलता आ रहा है, लेकिन आबकारी विभाग की तरफ से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कमालपुर जैसा मामला सामने आ गया।
दरअसल, आबकारी विभाग की यही जिम्मेदारी है कि वह अवैध रूप से शराब बेचने और अवैध रूप से शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। इसके लिए विभाग को आला अफसर भी समय समय पर निर्देश देतेे हैं, ताकि अवैध रूप से शराब की बिक्री को बंद किया जा सके। आलम यह है कि शामली जिले में अवैध रूप से शराब की बिक्री कभी बंद नहीं हो सकी। पिछले सप्ताह ही थानाभवन क्षेत्र के गांव चंदेनामाल में घेर से शराब का जखीरा, केमिकल सहित खाली बोतलें, पव्वे और सील लगाने का सामान तक बरामद हुआ था।
उस मामले में भी आबकारी ने सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था। जबकि वहां यह धंधा बड़े पैमाने पर किया जा रहा था, जिसमें सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा इसे अंजाम देना संभव नहीं था, लेकिन आबकारी विभाग ने उस गिरोह की जड़ें खंगालने का प्रयास नहीं किया।
गौरतलब है कि झिंझाना, चौसाना और ऊन क्षेत्र में खासकर यमुना खादर में अवैध रूप से शराब बनाने का धंधा चलता है। कमालपुर गांव में जिस शराब के पीने से पांच लोगों की मौत हुई, वह किसी ठेके से खरीदकर नहीं लाई गई। इससे स्पष्ट है कि अवैध रूप से बनाई गई शराब पीने की वजह से ही पांच लोगों की जान चली गई।
ताज्जुब यह है कि अभी तक इस मामले में आबकारी विभाग के किसी कर्मी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। उधर, जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि आबकारी विभाग के कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आबकारी के उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। वहीं, इस मामले में जो लोग दोषी होंगे, उनके िखलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।