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शामली महायोजना 2031: आपत्तियों की सुनवाई में अफसर निभा रहे औपचारिता

Sun, 19 Jun 2022 01:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 01:18 AM IST
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Officers are performing formalities in hearing of objections
शामली महायोजना 2031:
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- गूगल मैप में पूछे रहे खेत व संपत्तियों की जानकारी
- 21-22 जून को होगी फिर सुनवाई, 24 जून को बुलाई संयुक्त बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित शामली महायोजना-2031 में आई 315 आपत्तियों की सुनवाई के दौरान नियुक्त अधिकारी महज औपचारिकता निभा रहे है। शामली महायोजना में प्रत्येक आपत्तिकर्ता की तीन-तीन पत्रावलियां प्राधिकरण कार्यालय में जमा होने के बावजूद अफसर उनसे गूगल मैप पर खेत, बाग व संपत्ति संबंधी जानकारी ले रहे हैं। दो दिन में 100 शिकायतों पर सुनवाई हुई है।
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित शामली महायोजना 2031 में किसानों, व्यापारियों, शिक्षण संस्थाओं, उद्यमियों की ओर से 315 आपत्तियां प्राप्त हुई थी। प्राधिकरण की ओर से शामली महायोजना 2031 में सुनवाई के लिए छह सदस्यीय टीम गठित करके मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण कार्यालय में 17 से 22 जून तक सुनवाई निर्धारित की गई। 19 जून को रविवार के दिन सुनवाई नहीं होगी। 23 जून को मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से संयुक्त बैठक अफसरों-आपत्ति करने वालों की बुलाई है।
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पिछले दो दिनों से चल रही सुनवाई में पहले दिन शुक्रवार को प्राधिकरण के सचिव महेंद्र प्रसाद मौजूद रहे। सुनवाई के दिन आपत्तिकर्ताओं के हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए है। दूसरे दिन, शनिवार को सुनवाई के दौरान मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. के प्रतिनिधि संयुक्त आयुक्त, डीएम शामली के प्रतिनिधि एडीएम संतोष कुमार सिंह के स्थान पर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट उद्धव त्रिपाठी, शामली नगर पालिका के ईओ सुरेंद्र कुमार मौजूद रहे। ईओ ने बताया कि सुनवाई में मुंडेट कलां और मुंडेट खुर्द के कमलवीर सिंह एडवोकेट 35 आपत्तिकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
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महायोजना में आपत्ति दर्ज करने वाले भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राजवीर सिंह मुंडेट का कहना है कि महायोजना में सुनवाई के लिए सुबह 11 बजे समय निर्धारित किया गया। अफसर निर्धारित समय से एक या डेढ़ घंटे बाद पहुंच रहे है। गूगल मैप पर उनसे संपत्ति संबंधी जानकारी ले रहे हैं। उनका कहना है कि 30 साल और दस साल पहले उनकी कृषि भूमि को आबादी में दर्ज किया जा चुका है। उनकी भूमि में वर्ष 1993 से एक ट्रैक्टर एजेंसी संचालित है। वर्ष 1993 से धर्मकांटा का जिला पंचायत कार्यालय और माप-तौल बाट विभाग को टैक्स देते रहे हैं। उनके मकान आवासीय कालोनी भूमि में रोडवेज का बस अड्डा दर्शाया गया है। उनका कहना कि प्रस्तावित शामली महायोजना 2031 की आपत्तियों की सुनवाई पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।
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