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जिले में कुपोषित बच्चों के लिए नहीं बना पोषण पुनर्वास केंद्र

Wed, 01 Sep 2021 11:50 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 11:50 PM IST
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Nutrition rehabilitation center awaiting approval
शामली। जिले में कुपोषण को दूर करने के लिए राष्ट्रीय पोषण माह शुरू किया गया है। इसके तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, लेकिन समस्या ये है कि जिला बनने के 10 साल बाद भी बच्चों के सुपोषण के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) नहीं बन सका है। जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भेजा गया प्रस्ताव शासन में अटका हुआ है। अभी तक पुनर्वास केंद्र बनाने की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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जिले में हर साल कुपोषण को दूर करने के लिए सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जाता है। इसमें कुपोषण को दूर करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, इसके बाद भी हर साल कुपोषित बच्चे मिल रहे हैं। जिले में पांच साल तक के 1614 बच्चे कुपोषित और 551 बच्चे अति कुपोषित चिह्नित किए गए हैं।
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अति कुपोषित बच्चों के सुपोषण के लिए पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है, लेकिन समस्या ये है कि जिला बनने के दस साल बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं बन सका है। इसके लिए अभी भी मूल जनपद मुजफ्फरनगर के ही भरोसे रहना पड़ता है। अति कुपोषित बच्चों को बहुत जरूरी होने पर ही मुजफ्फरनगर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है। जिले में पिछले साल 2020 में गांव मुंडेट के निकट पूर्वी यमुना नहर पटरी पर जिला संयुक्त चिकित्सालय का भवन बनकर तैयार हो गया था। इसमें तब से कोविड अस्पताल चल रहा है।
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अगस्त महीने के पहले सप्ताह में बर्न यूनिट के भवन में ओपीडी चालू की गई है। जिला अस्पताल के लिए शासन स्तर से अभी विशेषज्ञ चिकित्सकों की अभी तैनाती नहीं हुई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पोषण पुनर्वास केंद्र के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुुका है। शासन से अभी स्वीकृति नहीं मिली है। शासन से स्वीकृति मिलते ही पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया जाएगा। अभी जिन बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र की जरूरत होती है, उन्हें मुजफ्फरनगर भेजा जाता है।
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