{"_id":"58d018fc4f1c1be3431a2ee6","slug":"nursing-home-manager-ke-khilaf-warant","type":"story","status":"publish","title_hn":"नर्सिंगहोम प्रबंधक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नर्सिंगहोम प्रबंधक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Mar 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। जिला उपभोक्ता फोरम ने शामली स्थित अग्रवाल नर्सिंगहोम के प्रबंधक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पूर्व में नर्सिंग होम प्रबंधक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम ने पीड़ित व्यक्ति को जुर्माना अदा करने का आदेश दिया था, मगर नर्सिंग होम प्रबंधक ने निर्धारित समय में उसका पालन नहीं किया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शामली निवासी सुनीता देवी ने वाद दायर किया था। उस पर 14 जुलाई 2016 को उपभोक्ता फोरम ने निर्णय सुनाते हुए नर्सिंगहोम प्रबंधक डॉक्टर मंजू गर्ग को सेवा में कमी के चलते एक लाख 12 हजार रुपये आदेश की तिथि से 30 दिन के अंदर जमा कराने का आदेश दिया था। इसके बाद भी नर्सिंगहोम प्रबंधक ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया।
इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पुन: न्यायालय में गुहार लगाई। सोमवार को फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव ने डॉक्टर मंजू गर्ग के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि विपक्षी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि एक लाख 12 हजार रुपये मय ब्याज वसूल करके न्यायालय में जमा कराए जाएं।
विज्ञापन
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शामली निवासी सुनीता देवी ने वाद दायर किया था। उस पर 14 जुलाई 2016 को उपभोक्ता फोरम ने निर्णय सुनाते हुए नर्सिंगहोम प्रबंधक डॉक्टर मंजू गर्ग को सेवा में कमी के चलते एक लाख 12 हजार रुपये आदेश की तिथि से 30 दिन के अंदर जमा कराने का आदेश दिया था। इसके बाद भी नर्सिंगहोम प्रबंधक ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया।
विज्ञापन
इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पुन: न्यायालय में गुहार लगाई। सोमवार को फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव ने डॉक्टर मंजू गर्ग के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि विपक्षी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि एक लाख 12 हजार रुपये मय ब्याज वसूल करके न्यायालय में जमा कराए जाएं।