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Election: सोशल मीडिया की रफ्तार से पोस्टर बैनर पर ब्रेक, 90 के दशक में ऐसा था चुनाव प्रचार का तरीका

Tue, 02 Apr 2024 06:32 PM IST
कपिल kapil अंकित सैनी, संवाद न्यूज एसेंजी, शामली
अंकित सैनी, संवाद न्यूज एसेंजी, शामली Published by: कपिल kapil Updated Tue, 02 Apr 2024 06:32 PM IST
सार

Election : वक्त बदला तो चुनाव प्रचार करने का तरीका भी बदल गया। अब चुनाव प्रचार का पूरा जिम्मा सोशल मीडिया के कंधों पर आ गया है। जानिए 90 के दशक में कैसे चुनाव प्रचार हुआ था।

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Now election campaigning is done through social media instead of posters, banners and hoardings
चुनाव प्रचार की सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनाव प्रचार करने में पोस्टर, बैनर व होर्डिंग का अहम योगदान रहा है, लेकिन वक्त बदला और अब प्रचार प्रसार का जिम्मा सोशल मीडिया ने अपने कंधों पर उठा लिया है। इससे पोस्टर-बैनर का कारोबार लगभग ठप हो गया है। 

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90 के दशक में एक दौर ऐसा भी था जब चुनाव आते ही प्रिंटिंग प्रेस के कारोबारियों को खाना खाने तक की फुर्सत नहीं मिलती थी। छोटे दुकानदार भी एक सीजन में आठ से दस लाख रुपये का कारोबार कर लेते थे। वक्त बदला और पोस्टर बैनर की जगह लोगों ने सोशल मीडिया को प्रचार-प्रसार का जरिया बना लिया। सभी राजनैतिक दलों ने अपने फेसबुक पेज, वाट्सएप ग्रुप, इंस्ट्राग्राम, एक्स आदि अकाउंट बना रखे हैं और इसी पर अपना चुनाव प्रचार अपडेट करते रहते हैं।

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पैसे की होती है बचत
एक विशेष बात ये है कि पहले प्रत्याशी प्रचार प्रसार की सामग्री तैयार करवाने में लाखों रुपये खर्च करते थे, जिस पैसे का ब्यौरा उन्हें चुनाव आयोग को भी देना होता था। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये वह उससे अधिक प्रचार मुफ्त में ही कर लेते हैं। इससे काफी पैसे की भी बचत हो जाती है। 

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सोशल मीडिया से कारोबार प्रभावित हुआ है। चुनाव के दौरान अधिकांश दुकानदार खाली बैठे हुए हैं। फिलहाल मेरे पास एक भी पार्टी या नेता का काम नहीं है। - सीटू सैनी, प्रिंटिंग प्रेस कारोबारी

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