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14 कालेजों में नहीं पहुंची आयरन की गोलियांं
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 17 Sep 2016 12:47 AM IST
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कालेजों में नहीं गई आयरन की गोलियां
- फोटो : demo
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शामली में इंटर कॉलेजों में कक्षा 6 से 12 वी कक्षा के 10 से 19 वर्ष के बच्चों को आयरन गोलियां खिलाई जानी हैं। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा डीआईओएस कार्यालय में आयरन की गोलियां भेजने के बाद कॉलेजों में बच्चों की संख्या के हिसाब से बंटनी हैं। एक गोली भेजने के बाद स्वास्थ्य विभाग सो गया है।
कई बार सूचित करने के बाद भी गोलियां नहीं भेजी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डीआईओएस कार्यालय में भेजी गईं 3 लाख 89 हजार 500 गोलियां एक महीने तक रखी रहीं। स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन जारी होने के बाद गोलियां बांट दी र्गइं। ये गोलियां शामली ब्लॉक के 08 इंटर कॉलेजों में ही बंट गईं। 14 कॉलेजों के बच्चे आयरन की गोलियाें से वंचित चल रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग एक बार गोली भेजने के बाद सो गया है। डीआईओएस की ओर से स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी पांच दिन पहले कर दी गई थी। जिसके बाद अब तक आयरन की गोलियां नहीं भेजी जा रही हैं। वहीं कॉलेज वाले रोज कार्यालय में फोन कर पूछते रहते हैं कि गोली आई हैं कि नहीं।
उन्होंने बताया कि अभी 14 कालेजों के लिए लगभग 8 लाख गोलियों की जरुरत पडे़गी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग 3 लाख 89 हजार 500 गोलियां भेजने के बाद और गोलियां नहीं भेज रहा है। इसके चलते ही छात्र-छात्राओं का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
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कई बार सूचित करने के बाद भी गोलियां नहीं भेजी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डीआईओएस कार्यालय में भेजी गईं 3 लाख 89 हजार 500 गोलियां एक महीने तक रखी रहीं। स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन जारी होने के बाद गोलियां बांट दी र्गइं। ये गोलियां शामली ब्लॉक के 08 इंटर कॉलेजों में ही बंट गईं। 14 कॉलेजों के बच्चे आयरन की गोलियाें से वंचित चल रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग एक बार गोली भेजने के बाद सो गया है। डीआईओएस की ओर से स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी पांच दिन पहले कर दी गई थी। जिसके बाद अब तक आयरन की गोलियां नहीं भेजी जा रही हैं। वहीं कॉलेज वाले रोज कार्यालय में फोन कर पूछते रहते हैं कि गोली आई हैं कि नहीं।
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उन्होंने बताया कि अभी 14 कालेजों के लिए लगभग 8 लाख गोलियों की जरुरत पडे़गी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग 3 लाख 89 हजार 500 गोलियां भेजने के बाद और गोलियां नहीं भेज रहा है। इसके चलते ही छात्र-छात्राओं का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
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