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नोटबंदी ने बेसुरी कर दी शादियों की शहनाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:37 AM IST
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शामली में ग्राहकों के बिना सूनी पड़ी साड़ी की दुकानें।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में शादियों के सीजन में रेडीमेड कपड़े, साड़ी सेंटर और ज्वेलर्स के यहां भीड़ रहती थी। सीजन कमाने के लिए कई महीना पूर्व माल स्टाक कर लिया जाता था। माल का स्टाक इस बार भी हुआ। शोरूम भरे पड़े हैं, पर खरीदार नहीं। ऑर्डर देकर बनवाई गई ज्वैलरी भी दुकान की शोभा बढ़ा रही है। व्यापारी परेशान हैं कि शोरूम में जो माल भरा है, उसकी बिक्री कैसे करें। क्योंकि ग्राहकों के पास नई करेंसी है नहीं और पुराने नोट लेने को व्यापारी तैयार नहीं हो रहा।
नवंबर माह से जनवरी के अंत तक शादियों का सीजन माना जाता है। सीजन भुनाने के लिए व्यापारी माल का स्टाक करते हैं, मगर केंद्र सरकार ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद करके सीजन की रौनक ही फीकी कर दी। आलम यह है कि रेडीमेड कपड़ों और साड़ी सेंटरों में ग्राहक बेहद कम पहुंच रहे हैं। इस कारण व्यापारी परेशानी में आ गए हैं। क्योंकि फैक्ट्रियों से मंगाए गए माल का पेमेंट भी करना है, पर माल बिकेगा नहीं तो पेमेंट कैसे होगा।
सराफ आशू गर्ग और संजय मित्तल का कहना है कि लग नहीं रहा शादी का सीजन चल रहा है। ग्राहक पुराने नोट देकर ज्वेलरी खरीदना चाहते हैं, पर पुराने नोट जमा कराने की मुश्किल है। पूर्व में गोल्ड ज्वेलरी पर एक्साइज ड्यूटी लगने के कारण हड़ताल चलने से काफी नुकसान हुआ था, अब नोट बंदी का असर हो रहा है।
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इसी तरह साड़ी सेंटर के संचालक सत्यपाल गुप्ता और मनीषा गुप्ता तथा रेडीमेड कपड़ो के व्यापारी अतुल बंसल, संदीप गर्ग, गौरव और वीरेंद्र का कहना है कि शादी के सीजन को ध्यान में रखते हुए दो महीने पहले ही नए डिजाइन के माल का स्टाक किया था। नोट बंदी के कारण ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं, जिस कारण दुकान पर काम करने वाले नौकरों की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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नवंबर माह से जनवरी के अंत तक शादियों का सीजन माना जाता है। सीजन भुनाने के लिए व्यापारी माल का स्टाक करते हैं, मगर केंद्र सरकार ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद करके सीजन की रौनक ही फीकी कर दी। आलम यह है कि रेडीमेड कपड़ों और साड़ी सेंटरों में ग्राहक बेहद कम पहुंच रहे हैं। इस कारण व्यापारी परेशानी में आ गए हैं। क्योंकि फैक्ट्रियों से मंगाए गए माल का पेमेंट भी करना है, पर माल बिकेगा नहीं तो पेमेंट कैसे होगा।
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सराफ आशू गर्ग और संजय मित्तल का कहना है कि लग नहीं रहा शादी का सीजन चल रहा है। ग्राहक पुराने नोट देकर ज्वेलरी खरीदना चाहते हैं, पर पुराने नोट जमा कराने की मुश्किल है। पूर्व में गोल्ड ज्वेलरी पर एक्साइज ड्यूटी लगने के कारण हड़ताल चलने से काफी नुकसान हुआ था, अब नोट बंदी का असर हो रहा है।
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इसी तरह साड़ी सेंटर के संचालक सत्यपाल गुप्ता और मनीषा गुप्ता तथा रेडीमेड कपड़ो के व्यापारी अतुल बंसल, संदीप गर्ग, गौरव और वीरेंद्र का कहना है कि शादी के सीजन को ध्यान में रखते हुए दो महीने पहले ही नए डिजाइन के माल का स्टाक किया था। नोट बंदी के कारण ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं, जिस कारण दुकान पर काम करने वाले नौकरों की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो गया है।