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एक जनवरी पर वर्ष नया, नहीं दीखता हर्ष नया

Thu, 31 Dec 2020 12:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Dec 2020 12:17 AM IST
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... New year on January 1, no new happiness seen
...एक जनवरी पर वर्ष नया, नहीं दीखता हर्ष नया
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शामली। साहित्यकार डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती के जन्मशताब्दी वर्ष तथा नववर्ष पर आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाएं सुर्नाइं।
कवि सम्मेलन की शुरुआत सहारनपुर की कवयित्री दीपा जैन ने सरस्वती वंदना से की। डॉ. जयसिंह ने सुनाया कि देश की खातिर जिएं और देश की खातिर मरें, देश पर बलिदान हो तो जगमगाए जिंदगी को खूब पसंद किया गया। ध्रुवेंद्र भदौरिया की कविता बूंद-बूंद ख़ून की, काम आए राम के ही, गिद्ध जैसे सिद्ध का शरीर होना चाहता हूं। हरगोबिंद झांब कमल की कविता एक जनवरी पर वर्ष नया, नहीं दीखता हर्ष नया। ये आधी रात को सरूर चढ़ा, क्या निकलेग ाउत्कर्ष नया कविता ने खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद हरगोबिंद झांब कमल ने चैत्र प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले नववर्ष के वैज्ञानिक महत्व पर अपनी कविताओं के माध्यम से प्रकाश डाला। संचालक भारतभूषण वर्मा ने अपनी ग़जलों से वाहवाही लूटी। उन्होंने सुनाया कि यही लगा कि हमें आपने पुकारा है, मुग़ालते में क्यूं इंतजार करते हैं। उदास दिल ने सुकून मांगा था, मिले सुकून मुझे दम हजार भरते हैं।
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