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कोरोना से प्रभावित हुई नवोदय की प्रवेश परीक्षा
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शामली। जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पर कोरोना का असर पड़ा है। कोरोना संक्रमण की वजह से परीक्षा करीब पांच महीने देरी से हुई है। इसके चलते कुल पंजीकृत 3627 छात्रों में एक तिहाई से भी कम 1197 छात्र परीक्षा में सम्मलित हो सके।
जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छह के लिए प्रवेश परीक्षा बुधवार को जिले में 13 केंद्रों पर हुई। कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए परीक्षा संपन्न कराई गई। इस परीक्षा में कुल 3627 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, लेकिन परीक्षा में मात्र 1197 ने परीक्षा दी, जो एक तिहाई से भी कम है। परीक्षा में 2430 छात्र अनुपस्थित रहे। बड़ी संख्या में छात्रों के अनुपस्थित रहने से सभी हैरान रह गए।
जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य करन सिंह ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रवेश परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित रहे हैं। पूर्व के सालों में कुल पंजीकृत छात्रों में 10 से 15 प्रतिशत छात्र प्रवेश परीक्षा में अनुपस्थित होते रहे हैं। प्रवेेश परीक्षा में छात्रों की संख्या कम होने की वजह कोरोना संक्रमण को माना जा रहा है। कोरोना की वजह से प्रवेश परीक्षा करीब पांच माह देरी से हुई है। पहले यह परीक्षा जनवरी या फरवरी माह में होती थी। परीक्षा देर से होने के कारण हो सकता है कि अभिभावकों ने बच्चों को कक्षा छह में प्रवेश दूसरे स्कूल-कालेजों में पहले ही करा दिया हो।
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जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छह के लिए प्रवेश परीक्षा बुधवार को जिले में 13 केंद्रों पर हुई। कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए परीक्षा संपन्न कराई गई। इस परीक्षा में कुल 3627 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, लेकिन परीक्षा में मात्र 1197 ने परीक्षा दी, जो एक तिहाई से भी कम है। परीक्षा में 2430 छात्र अनुपस्थित रहे। बड़ी संख्या में छात्रों के अनुपस्थित रहने से सभी हैरान रह गए।
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जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य करन सिंह ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रवेश परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित रहे हैं। पूर्व के सालों में कुल पंजीकृत छात्रों में 10 से 15 प्रतिशत छात्र प्रवेश परीक्षा में अनुपस्थित होते रहे हैं। प्रवेेश परीक्षा में छात्रों की संख्या कम होने की वजह कोरोना संक्रमण को माना जा रहा है। कोरोना की वजह से प्रवेश परीक्षा करीब पांच माह देरी से हुई है। पहले यह परीक्षा जनवरी या फरवरी माह में होती थी। परीक्षा देर से होने के कारण हो सकता है कि अभिभावकों ने बच्चों को कक्षा छह में प्रवेश दूसरे स्कूल-कालेजों में पहले ही करा दिया हो।
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