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राष्ट्रीय अंग दान दिवस पर विशेष: मां ने बेटी को दी दूसरी जिंदगी, समधी को किडनी देकर पेश की मिसाल

Sat, 27 Nov 2021 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 12:30 AM IST
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Mother gave second life to daughter, set an example by giving kidney to Samadhi
राष्ट्रीय अंग दान दिवस पर विशेष:
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शामली। अंग दान को श्रेष्ठ दान कहा गया है। मरणोपरांत देहदान करने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं। लेकिन जीवित रहते हुए अपने शरीर का कोई अंग दान करने वाले बहुत कम ही मिलते हैं। कई बार तो मुश्किल घड़ी में अपने भी अंगदान करने के लिए आगे नहीं आते हैं। हालांकि ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जिन्होंने जीते-जी अंग दान करके किसी की जान बचाई है। साथ ही दूसरों के लिए प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय अंग दान दिवस पर ऐसे ही लोगों की कहानी प्रस्तुत है।
केस-1
सुषमा देवी ने पुत्री को दी किडनी
गांव खेड़ी खुशनाम निवासी सुषमा देवी की पुत्री मनीषा की शादी कुछ वर्ष पूर्व अंबहेटा गांव में हुई थी। शादी के बाद मनीषा को किडनी संबंधी समस्या हुई। चिकित्सकों को दिखाने पर पता चला कि किडनी पूरी तरह डैमेज हो चुकी थी। समय रहते यदि किडनी ट्रांसप्लांट नहीं की गई तो जान जा सकती है। जिस पर परिवार के लोग सकते में आ गए। ऐसे समय में सुषमा देवी अपनी पुत्री को किडनी देने के लिए आगे आई। फरवरी 2021 में मोहाली के मैक्स हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट हुआ। जो सफल रहा।
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केस-2
राजपाल सिंह ने पुत्रवधु के पिता को दी किडनी
भैंसवाल निवासी राजपाल सिंह ने अंग दान की जैसी मिशाल पेश की, ऐसी कम ही देखने को मिलती हैं। खून के रिश्ते में अंग दान करने के कई उदाहरण हैं। लेकिन राजपाल सिंह ने अपनी पुत्रवधु के पिता बागपत के बासौली गांव निवासी सतपाल सिंह तोमर को कई वर्ष पूर्व किडनी दान की थी। जिसके बाद सतपाल सिंह तोमर कई वर्ष की जिंदगी बढ़ गई। हालांकि अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। राजपाल सिंह का कहना है कि किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता। लोगों को अंग दान के लिए आगे आना चाहिए।
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केस-3
बहन को दिया लीवर, लेकिन नहीं बच पाई जान
लांक निवासी संदीप की बहन कोमल की शादी बागपत के लॉयन मलकपुर गांव में हुई थी। शादी के बाद कोमल के लीवर में इंफैक्शन फैलने की बात चिकित्सकों की जांच में पता चली। ऐसे मुश्किल समय में संदीप ने अगस्त-2020 को अपनी बहन को लीवर दान किया। हालांकि दुर्भाग्य से यह प्रत्यारोपण सफल नहीं हो पाया और कोमल को बचाया नहीं जा सका। जिसका संदीप के साथ अन्य परिजनों को बेहद दुख है।
केस-4
जयवती को बेटे ने दी किडनी
गोगवान जलालपुर निवासी कुलदीप को कई वर्ष पूर्व तबियत खराब हुई तो उन्होंने चिकित्सकों से जांच कराई। जिसमें पता चला कि उनकी किडनी खराब हो चुकी हैं। उन्हें जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है। जिस पर उनकी मां जयवती आगे आई। बेटे को किडनी देकर उन्होंने नई जिंदगी दी।

केस-5
जयवीर सिंह ने मरणोपरांत की देहदान
कुड़ाना निवासी चौधरी जयवीर सिंह वर्षों से समाज सेवा से जुड़े कार्यों से जुड़े हैं। उनका कहना है कि शुरू से ही उनकी इच्छा समाज व राष्ट्र की सेवा करने की रही है। इसके लिए वे अनेक सामाजिक कार्यो में हिस्सा लेते रहे। इसी बीच उनके मन में ख्याल आया कि मरने के बाद भी उनका शरीर कुछ काम आना चाहिए। इसके लिए उन्होंने दिल्ली एम्स में संपर्क किया। एम्स की ओआरबीओ इंचार्ज एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डा. आरती विज की ओर से उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनका नाम देह दान की सूची में शामिल किया गया।
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