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Shamli News: मां ने शाकंभरी के रूप में प्रकट होकर किया था अकाल खत्म
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शांकभरी। जनपद मुख्यालय से 45 किमी दूर शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी मंदिर करोड़ों श्रद्धालओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इस स्थान पर मां दुर्गा ने अकाल पड़ने पर देवताओं द्वारा की गई तपस्या के बाद मां शाकंभरी के रूप में प्रकट हुई थी।
सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण, दुर्गा सप्तशती, पदम पुराण, कनक धारा स्रोत आदि में मिलता है। सिद्धपीठ के बारे में मान्यता है यहां 100 साल तक वर्षा नहीं हुई, जिस कारण तीनों लोक में अकाल पड़ गया। देवताओं ने शिवालिक पर्वत की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की। करुणामयी मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हुईं।
देवताओं ने उनसे तीनों लोक का अकाल मिटाने की प्रार्थना की। इस पर मां जगदंबा ने अपने शतनेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्रु वृष्टि की। इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से पहाड़ियों पर शाक एवं फल उत्पन्न किए जिसके बाद वह माता शाकंभरी कहलाईं।
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n डीएम और एसएसपी ने परखी मेले की तैयारियां : डीएम मनीष बंसल एवं एसएसपी आशीष तिवारी ने सिद्धपीठ पहुंच मेले की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को टोलियों में मां के दर्शन को भेजा जाए।
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सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण, दुर्गा सप्तशती, पदम पुराण, कनक धारा स्रोत आदि में मिलता है। सिद्धपीठ के बारे में मान्यता है यहां 100 साल तक वर्षा नहीं हुई, जिस कारण तीनों लोक में अकाल पड़ गया। देवताओं ने शिवालिक पर्वत की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की। करुणामयी मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हुईं।
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देवताओं ने उनसे तीनों लोक का अकाल मिटाने की प्रार्थना की। इस पर मां जगदंबा ने अपने शतनेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्रु वृष्टि की। इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से पहाड़ियों पर शाक एवं फल उत्पन्न किए जिसके बाद वह माता शाकंभरी कहलाईं।
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n डीएम और एसएसपी ने परखी मेले की तैयारियां : डीएम मनीष बंसल एवं एसएसपी आशीष तिवारी ने सिद्धपीठ पहुंच मेले की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को टोलियों में मां के दर्शन को भेजा जाए।