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अधिकांश को नाकाफी लगा गन्ने का दाम
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:03 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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शामली। प्रदेश सरकार ने मौजूदा गन्ना पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) घोषित कर दिया है। किसानों ने घोषित मूल्य को नाकाफी बताया है, तो सपा नेता इसे किसानों के फायदेमंद बता रहे हैं, तो किसान नेता, भाजपाइयों ने इसे नाकाफी बताया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अगैती प्रजाति के गन्ने का दाम 305 रुपये प्रति क्विंटल और पछैती प्रजाति के गन्ने का रेट 315 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। उप्र योजना आयोग के सदस्य डॉ. सुधीर पंवार का कहना है कि प्रदेश सरकार ने किसानों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए गन्ना मूल्य में 25 रुपये की बढ़ोत्तरी की है। इससे प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों को फायदा होगा।
उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष के पति प्रसन्न चौधरी का कहना है कि सपा ने बीते चार साल के दौरान एक बार भी गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया। इस बार सिर्फ 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर किसानों से धोखा किया है। बढ़ा हुआ गन्ना मूल्य ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है।
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भाकियू (अम्बावत गुट) के राष्ट्रीय महासचिव अनिल मलिक का कहना है कि चीनी, उर्वरकों और जरूरी सामान के दाम जिस तरह बढ़े हैं, उसके मुकाबले 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी बहुत कम है। गन्ना मूल्य कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने अगैती प्रजाति के गन्ने का दाम 305 रुपये प्रति क्विंटल और पछैती प्रजाति के गन्ने का रेट 315 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। उप्र योजना आयोग के सदस्य डॉ. सुधीर पंवार का कहना है कि प्रदेश सरकार ने किसानों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए गन्ना मूल्य में 25 रुपये की बढ़ोत्तरी की है। इससे प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों को फायदा होगा।
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उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष के पति प्रसन्न चौधरी का कहना है कि सपा ने बीते चार साल के दौरान एक बार भी गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया। इस बार सिर्फ 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर किसानों से धोखा किया है। बढ़ा हुआ गन्ना मूल्य ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है।
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भाकियू (अम्बावत गुट) के राष्ट्रीय महासचिव अनिल मलिक का कहना है कि चीनी, उर्वरकों और जरूरी सामान के दाम जिस तरह बढ़े हैं, उसके मुकाबले 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी बहुत कम है। गन्ना मूल्य कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था।