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80 किमी दूर से आती हैं मिड-डे मील की रोटियां

Thu, 05 Dec 2019 12:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 12:54 AM IST
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Mid-day meal loaves come from 80 km away
शामली क्षेत्र के गांव करमू खेडी से ई रिक्शा में स्कूलो में बटने के लिये जाता मिड डे मील का खाना - फोटो : SHAMLI
80 किमी दूर से आती हैं मिड-डे मील की रोटियां
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शामली। मुजफ्फरनगर में मिड-डे-मील में मरा हुआ चूहा निकलने की घटना से मिड-डे-मील की गुणवत्ता पर फिर से सवाल उठे हैं। शामली में भी चार एनजीओ शहरी क्षेत्र के प्राइमरी और इंटर कालेजों में खाना सप्लाई करते हैं। अमर उजाला ने बुधवार को शामली क्षेत्र में खाना सप्लाई करने वाले एक एनजीओ की रसोई की पड़ताल की। पता चला कि नगरीय और ब्लाक क्षेत्र के 27 विद्यालयों में वितरित की जा रही रोटियां मेरठ जनपद के दौराला से मंगाई जा रही हैं। करीब 80 किलोमीटर दूर से लाई जा रही रोटियों की गुणवत्ता पर सवाल है।
उज्ज्वला सवेरा समिति (एनजीओ) द्वारा शामली नगर और ब्लाक के 15 प्राथमिक विद्यालय, तीन उच्च प्राथमिक विद्यालयों और 9 इंटर कालेजों में कक्षा आठवीं तक के करीब 4000 बच्चों को मिड-डे मील वितरित किया जाता है। मिड-डे मील के मेन्यू के अनुसार सप्ताह में सोमवार और बृहस्पतिवार को सब्जी, दाल के साथ रोटी दी जाती है, लेकिन शामली में एनजीओ के पास रोटी बनाने की व्यवस्था नहीं है। यहां पर सब्जी, दाल, चावल, ताहरी आदि ही तैयार किया जाता है। रोटियां दौराला (मेरठ) में तैयार कराई जाती है। वहां से गाड़ी द्वारा करीब 8000 रोटियां शामली लाई जाती हैं। इसके बाद विद्यालयों में वितरण होता है। 80 किलोमीटर दूर से रोटियां लाने और शामली में वितरण होने से साफ है कि कई घंटे बाद बच्चों को रोटियां मिलती है। बच्चे ठंडी रोटी खाने को मजबूर है। रोटी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। इस स्थिति में रोटी की गुणवत्ता में भी कमी आ सकती है। इस तरह देखा जाए तो बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हो। एनजीओ की तरफ से खाने का वितरण करने वाले प्रदीप कुमार ने बताया कि सुबह सात से आठ बजे के बीच दौराला से रोटियां शामली पहुंच जाती है। इसके बाद उनका विद्यालयों में वितरण किया जाता है।
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कोट -
मिड-डे मील में दी जाने वाली रोटियां पहले शामली में ही बनवाई जाती थीं, जुलाई माह में रोटी बनाने की मशीन खराब हो गई थी। मरम्मत के बाद भी मशीन ठीक से काम नहीं कर पाई। इस कारण दौराला से रोटी तैयार कराई जा रही हैं। नई मशीन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही शामली में नई मशीन लगाकर रोटी तैयार कराई जाएंगी। - वीरेंद्र सिंह, एनजीओ सदस्य।
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कोट -
एनजीओ द्वारा पहले शामली में ही रोटी बनाई जाती थी। पिछले कुछ समय से उनकी मशीन खराब होने पर वे दौराला से रोटी तैयार कराकर विद्यालयों में वितरण कर रहे है। एनजीओ संचालक को नई मशीन लगाकर यहीं पर रोटी बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। - जितेंद्र कुमार, जिला समन्वयक, मिड-डे मील

कोट
रोटी दौराला से आती हैं इसकी जानकारी की जाएगी। इसके बाद ही वह कुछ कह सकेंगी। वैसे मिड डे मील वितरण में कहीं से कोई शिकायत नहीं मिली है। गुणवत्ता को लेकर समय समय पर जांच भी की जाती है। - गीता वर्मा ,बेसिक शिक्षा अधिकारी
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