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दो बच्चों की परवरिश की चिंता में डूबी है मंजू
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बाबरी। पति की मौत के बाद गांव बुटराड़ा की मंजू को अपने दो बच्चों की परवरिश की चिंता सता रही है। पति कृष्णपाल ही एक मात्र कमाने वाले थे। अब आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है।
बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बुटराड़ा निवासी कृष्णपाल की बुखार आने के बाद 20 मई को मौत हो गई थी। मंजू बताती हैं कि उसका बड़ा बेटा वंश 11 साल का है तथा कक्षा छह में पढ़ता है। छोटी बेटी वंशिका नौ साल की है और कक्षा चार में पढ़ रही है। मंजू ने बताया कि पति कृष्णपाल दिल्ली के नरेला में एक प्राइवेट फैक्टरी में काम करते थे। 25 अप्रैल को वह गांव आए थे। इस दिन शामली अस्पताल में मंजू का ऑपरेशन कराया।
चार मई को कृष्णपाल की तबीयत खराब होने पर शामली अस्पताल में भर्ती कराया गया। 19 मई को हालात ज्यादा बिगड़ने पर सहारनपुर के पिलखनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 20 मई को चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया था। 28 मई को कृष्णपाल की रस्म तेरहवीं थी। दो बच्चों की जिम्मेदारी है तथा आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा है। उसे अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उधर, ग्राम प्रधान अनुज चौधरी का कहना है कि मंजू की हर संभव मदद का प्रयास किया जाएगा।
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बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बुटराड़ा निवासी कृष्णपाल की बुखार आने के बाद 20 मई को मौत हो गई थी। मंजू बताती हैं कि उसका बड़ा बेटा वंश 11 साल का है तथा कक्षा छह में पढ़ता है। छोटी बेटी वंशिका नौ साल की है और कक्षा चार में पढ़ रही है। मंजू ने बताया कि पति कृष्णपाल दिल्ली के नरेला में एक प्राइवेट फैक्टरी में काम करते थे। 25 अप्रैल को वह गांव आए थे। इस दिन शामली अस्पताल में मंजू का ऑपरेशन कराया।
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चार मई को कृष्णपाल की तबीयत खराब होने पर शामली अस्पताल में भर्ती कराया गया। 19 मई को हालात ज्यादा बिगड़ने पर सहारनपुर के पिलखनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 20 मई को चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया था। 28 मई को कृष्णपाल की रस्म तेरहवीं थी। दो बच्चों की जिम्मेदारी है तथा आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा है। उसे अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उधर, ग्राम प्रधान अनुज चौधरी का कहना है कि मंजू की हर संभव मदद का प्रयास किया जाएगा।
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