{"_id":"61ba3d5d8c81d44e56203cee","slug":"lost-finger-lines-shamli-news-mrt569232536","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिट गई अंगुलियों की लकीरें, राशन पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिट गई अंगुलियों की लकीरें, राशन पर संकट
विज्ञापन
थानाभवन में फिंगर प्रिंट मैच नहीं होने पर राशन कार्ड दिखाती बबली देवी
- फोटो : SHAMLI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राशन पर संकट : मिट गईं उंगलियों की लकीरें
शामली, थानाभवन। बुढ़ापे में हाथों की लकीरें भी धुंधली हो गईं। उंगलियों की लकीरें तो मिट ही गईं। राशन लेने पहुंचे तो ई-पॉश मशीन ने नकार दिया। उंगलियों की लकीरें मैच नहीं हुईं तो गरीब बुढ़ापे को राशन से ही वंचित होना पड़ गया। राशन की दुकानों से खाली हाथ लौटना पड़ा। उंगलियों की लकीरों को फिर से मैच कराने के लिए अब बुजुर्ग आधार केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं।
गरीब बुजुर्गों को सरकार की ओर से दिए जा रहे निशुल्क राशन का ही सहारा है। योजना के तहत एपीएल कार्डधारक परिवारों को जहां गेहूं-चावल मुफ्त दिए जा रहे हैं। वहीं, अंत्योदय कार्ड धारकों को गेहूं चावल के साथ इस बार रिफाइंड, नमक व चना दिया जा रहा है। लेकिन बुढ़ापे में काम करने के कारण कई बुजुर्ग महिलाओं की हाथ की रेखाएं मिट गई हैं। ई-पॉश मशीन में फिंगर प्रिंट मैच न होने पर डीलर उन्हें आधार केंद्र पर दोबारा अपडेट कराने की बात कहकर लौटा रहे हैं। जब यह महिलाएं आधार केंद्रों पर पहुंचती हैं, तो पहले तो दो से तीन दिन में उन्हें टोकन मिलता है। इसके बाद जब केंद्र संचालक उनके फिंगर प्रिंट अपडेट करने का प्रयास कर रहे हैं तो वहां भी यही समस्या सामने आ रही है। उंगलियों पर लकीरें ही नहीं मिल पा रहीं।
आधार कार्ड केंद्र पहुंची इस्माईलपुर निवासी महिला बबली ने बताया कि वह कई दिनों से आधार केंद्र व राशन डीलर के यहां चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ये समस्या सिर्फ बबली देवी की नहीं बल्कि ऐसी सैकड़ों महिलाओं की है। जिन्हें अब तक अपने हिस्से के राशन का इंतजार है।
विज्ञापन
सिर्फ एक फीसदी को राशन
विभाग की मानें तो किसी उपभोक्ता के फिंगर प्रिंट नहीं मिल रहे हैं तो उसे कार्ड देखकर राशन दिया जाए। लेकिन डीलरों का कहना है कि ये नियम सिर्फ एक फीसदी उपभोक्ताओं के लिए है।
विज्ञापन
शामली, थानाभवन। बुढ़ापे में हाथों की लकीरें भी धुंधली हो गईं। उंगलियों की लकीरें तो मिट ही गईं। राशन लेने पहुंचे तो ई-पॉश मशीन ने नकार दिया। उंगलियों की लकीरें मैच नहीं हुईं तो गरीब बुढ़ापे को राशन से ही वंचित होना पड़ गया। राशन की दुकानों से खाली हाथ लौटना पड़ा। उंगलियों की लकीरों को फिर से मैच कराने के लिए अब बुजुर्ग आधार केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं।
गरीब बुजुर्गों को सरकार की ओर से दिए जा रहे निशुल्क राशन का ही सहारा है। योजना के तहत एपीएल कार्डधारक परिवारों को जहां गेहूं-चावल मुफ्त दिए जा रहे हैं। वहीं, अंत्योदय कार्ड धारकों को गेहूं चावल के साथ इस बार रिफाइंड, नमक व चना दिया जा रहा है। लेकिन बुढ़ापे में काम करने के कारण कई बुजुर्ग महिलाओं की हाथ की रेखाएं मिट गई हैं। ई-पॉश मशीन में फिंगर प्रिंट मैच न होने पर डीलर उन्हें आधार केंद्र पर दोबारा अपडेट कराने की बात कहकर लौटा रहे हैं। जब यह महिलाएं आधार केंद्रों पर पहुंचती हैं, तो पहले तो दो से तीन दिन में उन्हें टोकन मिलता है। इसके बाद जब केंद्र संचालक उनके फिंगर प्रिंट अपडेट करने का प्रयास कर रहे हैं तो वहां भी यही समस्या सामने आ रही है। उंगलियों पर लकीरें ही नहीं मिल पा रहीं।
विज्ञापन
आधार कार्ड केंद्र पहुंची इस्माईलपुर निवासी महिला बबली ने बताया कि वह कई दिनों से आधार केंद्र व राशन डीलर के यहां चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ये समस्या सिर्फ बबली देवी की नहीं बल्कि ऐसी सैकड़ों महिलाओं की है। जिन्हें अब तक अपने हिस्से के राशन का इंतजार है।
विज्ञापन
सिर्फ एक फीसदी को राशन
विभाग की मानें तो किसी उपभोक्ता के फिंगर प्रिंट नहीं मिल रहे हैं तो उसे कार्ड देखकर राशन दिया जाए। लेकिन डीलरों का कहना है कि ये नियम सिर्फ एक फीसदी उपभोक्ताओं के लिए है।