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Shamli News: तेजेंद्र निर्वाल के लिए अग्नि परीक्षा होगा लोकसभा चुनाव

Sun, 17 Sep 2023 01:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 17 Sep 2023 01:11 AM IST
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Lok Sabha elections will be a litmus test for Tejendra Nirwal
शामली भाजपा जिला अध्यक्ष तेजेंद्र र्निवाल
शामली। भाजपा जिलाध्यक्ष तेजेंद्र निर्वाल को जिले में भाजपा को लोकसभा चुनाव 2024 का चुनाव जिताने के लिए कठिन अग्नि परीक्षा का सामना करना होगा। क्योंकि संगठन में इस वक्त गुटबाजी के बीच बिखराव साफ नजर आ रहा है। यह बात अलग है कि भाजपा ने जाटों को रिझाने के लिए पूर्व विधायक तेजेंद्र निर्वाल की ताजपोशी की है।
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विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा की हार के बाद भाजपा हाईकमान ने संगठन को मजबूत करने और लोक सभा चुनाव 2024 के मिशन को फतह करने के लिए संगठन में बदलाव किया है। शामली में जाटों के वर्चस्व को देखते हुए भाजपा ने जातीय वोट बैंक साधने के लिए जिलाध्यक्ष पर सदर के पूर्व विधायक तेजेंद्र निर्वाल की ताजपोशी करके अपना दांव खेला है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाकियू टिकैत और रालोद के प्रभाव कम करने के लिए शामली जिले में जाट समीकरण के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अहम है।
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जिला बनने के बाद देखा जाए तो 2011 में वैश्य जाति के अरविंंद संगल, एक बार कश्यप जाति के रामजीलाल कश्यप और दो बार जाट जिनमें पवन तरार सिलावर और 2020 में जाट बिरादरी से सतेंद्र तोमर की भाजपा जिलाध्यक्ष बनाया गया था। विधानसभा सभा चुनाव 2022 में भाजपा को जिले में तीनों विधानसभा सीटों पर शिकस्त मिली थी। इस करारी हार के बाद प्रदेश में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर जाट बिरादरी से भूपेंद्र चौधरी, पश्चिमी क्षेत्रीय अध्यक्ष पर ठाकुर बिरादरी के सतेंद्र सिसौदिया को जिम्मेदारी साैंपी गई।
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गौर किया जाए तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव तक जाट मतदाता भाजपा के साथ नजर आया। लेकिन इसके बाद जाटों का प्रभाव रालोद और सपा की ओर रहा है। यहां भाजपा को जाटों का साथ नहीं मिला। विपक्ष इस बार एकजुट होकर भाजपा के सामने है, सिर्फ बसपा ही गठबंधन से अलग है। ऐसे में विपक्ष के दाव को निष्प्रभावी बनाने के लिए भाजपा हाईकमान ने सदर के पूर्व विधायक तेजेंद्र निर्वाल को भाजपा की कमान सौंपी है।

विधानसभा और निकाय चुनाव के बाद भाजपा में बिखराव ओर गुट बंदी समाप्त करने के लिए भाजपा के सदर के पूर्व विधायक तेजेंद्र निर्वाल को कड़ी मशक्कत करनी होगी। ब्राहमण, ठाकुर, पंजाबी, वैश्य आदि के साथ ही गुर्जर, कश्यप, सैनी आदि अति पिछडी जाति भाजपा के साथ ही मानी जा रही हैं, लेकिन इनकी एकजुटता को बनाए रखना और इसके साथ ही जाट वोटों को भाजपा के पक्ष में लाना तेजेंद्र निर्वाल के लिए बड़ी चुनौती होगा। हालांकि तेजेंद्र निर्वाल पार्टी को एक जुट करने और सरकार और पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने के लिए काम करने की बात कह रहे हैं।
कैराना लोकसभा चुनाव का इतिहास
-1977-चंदन सिंह- बीएलडी
-1980 -गायत्री देवी- जनता पार्टी एस

-1984-चौधरी अख्तर हसन- कांग्रेस
-1989-हरपाल पंवार -जनता दल

-1991 -हरपाल पंवार - जनता दल

-1996-मुनव्वर हसन सपा
-1998-वीरेंद्र वर्मा - भाजपा
-1999 -अमीर आलम - रालोद

-2004-अनुराधा चौधरी - सपा-रालोद गठबंधन
-2009-तबस्सुम हसन - बसपा
- 2014-हुकुम सिंह - भाजपा

-2018-तबस्सुम हसन- सपा-रालोद गठबंधन (उपचुनाव)

-2019-प्रदीप चौधरी - भाजपा
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