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Shamli News: कुछ बाढ़ चौकियों पर ताले तो कुछ से कर्मचारी मिले नदारद
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अमर उजाला पड़ताल....
: यमुना तटबंध का कुछ हिस्सा टूटने के बावजूद बाढ़ नियंत्रण चौकियों पर कर्मचारी अलर्ट नहीं
: टीम ने पड़ताल लेकर लिया जायजा
डीएम बोले- कर्मचारियों की कांवड़ यात्रा में लगी है ड्यूटी, सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर भेजी जााएगी टीम
तैनात कर्मचारियों ने कॉल रिसीव करना तक न हीं समझा मुनासिब
शामली/ कैराना/ चौसाना/ झिंझाना। यमुना नदी में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को अलर्ट करने के साथ ही वहां पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की थी, लेकिन अधिकतर बाढ़ चौकी पर पर कर्मचारी ही तैनात नहीं है। टीम ने पड़ताल की तो कुछ बाढ़ चौकियों पर जहां ताले लटके मिले, वहीं कुछ पर कर्मचारी ही नहीं थे। ड्यूटी पर लगाए कुछ कर्मचारियों ने कॉल रिसीव करना तक मुनासिब नहीं स मझा।
जिलेभर में 17 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई है। पांच दिन पहले यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट करते हुए वहां पर हलका लेखपालों व प्रभारियों की तैनात की थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी तुरंत उच्चाधिकारियों को दी जा सके। लेकिन बृहस्पतिवार को दोपहर यमुना पुल के पास तटबंध पर बनी बाढ़ चौकी पर ताला लटका मिला। बाढ़ चौकी प्रभारी नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की बाढ़ चौकी के साथ ही कांवड़ में भी ड्यूटी लगी है। यमुना पुल बाढ़ चौकी पर तैनात सर्वे लेखपाल जमना प्रसाद ने बताया कि वह सुबह से ही यमुना पुल पर मौजूद है। यहां पर कांवड़ डयूटी के साथ ही यमुना पर भी नजर रखी जा रही है। कुछ सालों से यमुना पुल पर ही बाढ़ चौकी बना दी गई है।
उधर, फतेहपुर बाढ़ चौकी पर तैनात हलका लेखपाल शरद भारद्वाज ने बताया कि उनकी डयूटी बाढ़ चौकी के अलावा झिंझाना के गाडी वाला चौराहे पर कांवड़ यात्रा में भी लगी है। वो सुबह यमुना क्षेत्र में गये थे। वहां पर सब ठीक मिला है। इसके अलावा कांधला क्षेत्र की इस्सोपुर टील बाढ़ चौकी पर तैनात हलका लेखपाल प्रभात मलिक ने भी बताया कि उनकी चौकी का कार्यालय डुंडुखेडा प्राथमिक विद्यालय में बना है। फिलहाल कार्यालय बंद है तथा कर्मचारियों की डयूटी कांवड़ यात्रा में यमुना नदी के आसपास ही लगाई गई है, ताकि कांवड़ यात्रा के साथ साथ बाढ़ पर भी नजर रखी जा सके।
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बाढ़ चौकियों की व्यवस्था राम भरोसे, तैनात अधिकारी नही उठा रहे फोन
चौसाना। संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने चार अस्थाई बाढ़ प्रबंध चौकियों को स्थापित किया है, लेकिन जिन राजस्व विभाग व ग्राम पंचायत विभाग के अधिकारियों को बाढ़ आपदा प्रबंध व्यवस्था में शामिल किया गया उनमें से अधिकांश अधिकारियों को रात्रि में कांवड़ व्यवस्था का जिम्मा भी दिया गया है।
बाढ़ आपदा चौकियों की व्यवस्था परखने के लिये नियुक्त किये गये पंचायत विभाग के अधिकारियों को दोपहर दो बजे से तीन बजे के मध्या कॉल किया गया। जिसमें ऊदपुर चौकी पर तैनात दीपक शर्मा को दो बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। केरटू की चौकी पर तैनात अर्पण मलिक ने दो बार कॉल करने पर भी फोन नही उठाया, जबकि अनुज चौधरी बिडौली में तैनात मिले और शीतल गढ़ी में तटबंध के टूटने के बाद व्यवस्था कराई और जानकारी साझा की। बसी चुंधियारी में तैनात रणवीर सिंह का मोबाइल स्वीच ऑफ मिला। भडी के ग्रामीण कामिल का कहना है कि रात्रि में गांव में कोई अधिकारी नही रहता।
झिंझाना में बाढ़ चौकी पर नहीं मिला कोई भी कर्मचारी
तहसीलदार सचिन वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में चार चौकी स्थापित की है। जिनमें लेखपाल, सचिव, पंचायती राज का एक व्यक्ति तथा कानूनगो को चौकी प्रभारी बनाया गया है। इसके उलट पड़ताल करने पर किसी भी चौकी पर कोई लेखपाल, कानूनगो व पंचायती राज का व्यक्ति नहीं मिला। दूसरी ओर फतेहपुर में बाढ़ चौकी पर कोई नही मिला। इस बारे में फतेहपुर चौकी पर तैनात लेखपाल ने बताया कि उनकी ड्यूटी कांवड़ यात्रा में भी लगी हुई है।केयर टू बाढ़ नियंत्रण चौकी में जलभराव है। यहां पर भी कोई नहीं मिला। कर्मचारियों ने बताया कि वह सुबह गए थे।
वर्जन...............
बाढ़ चौकियों पर तैनात लेखपालों और कर्मचारियों की ड्यूटी कांवड़ यात्रा में लगाई गई है। यदि कोई सूचना मिलती है तो ग्राम प्रधान, सचिव और अन्य गठित समिति के सदस्यों की सहायता से टीमें मौके पर पहुंचेगी। सभी को अलर्ट रहने को कहा गया है। - रविंद्र सिंह, डीएम बागपत
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: यमुना तटबंध का कुछ हिस्सा टूटने के बावजूद बाढ़ नियंत्रण चौकियों पर कर्मचारी अलर्ट नहीं
: टीम ने पड़ताल लेकर लिया जायजा
डीएम बोले- कर्मचारियों की कांवड़ यात्रा में लगी है ड्यूटी, सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर भेजी जााएगी टीम
तैनात कर्मचारियों ने कॉल रिसीव करना तक न हीं समझा मुनासिब
शामली/ कैराना/ चौसाना/ झिंझाना। यमुना नदी में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को अलर्ट करने के साथ ही वहां पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की थी, लेकिन अधिकतर बाढ़ चौकी पर पर कर्मचारी ही तैनात नहीं है। टीम ने पड़ताल की तो कुछ बाढ़ चौकियों पर जहां ताले लटके मिले, वहीं कुछ पर कर्मचारी ही नहीं थे। ड्यूटी पर लगाए कुछ कर्मचारियों ने कॉल रिसीव करना तक मुनासिब नहीं स मझा।
जिलेभर में 17 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई है। पांच दिन पहले यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट करते हुए वहां पर हलका लेखपालों व प्रभारियों की तैनात की थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी तुरंत उच्चाधिकारियों को दी जा सके। लेकिन बृहस्पतिवार को दोपहर यमुना पुल के पास तटबंध पर बनी बाढ़ चौकी पर ताला लटका मिला। बाढ़ चौकी प्रभारी नरेश मलिक ने बताया कि कर्मचारियों की बाढ़ चौकी के साथ ही कांवड़ में भी ड्यूटी लगी है। यमुना पुल बाढ़ चौकी पर तैनात सर्वे लेखपाल जमना प्रसाद ने बताया कि वह सुबह से ही यमुना पुल पर मौजूद है। यहां पर कांवड़ डयूटी के साथ ही यमुना पर भी नजर रखी जा रही है। कुछ सालों से यमुना पुल पर ही बाढ़ चौकी बना दी गई है।
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उधर, फतेहपुर बाढ़ चौकी पर तैनात हलका लेखपाल शरद भारद्वाज ने बताया कि उनकी डयूटी बाढ़ चौकी के अलावा झिंझाना के गाडी वाला चौराहे पर कांवड़ यात्रा में भी लगी है। वो सुबह यमुना क्षेत्र में गये थे। वहां पर सब ठीक मिला है। इसके अलावा कांधला क्षेत्र की इस्सोपुर टील बाढ़ चौकी पर तैनात हलका लेखपाल प्रभात मलिक ने भी बताया कि उनकी चौकी का कार्यालय डुंडुखेडा प्राथमिक विद्यालय में बना है। फिलहाल कार्यालय बंद है तथा कर्मचारियों की डयूटी कांवड़ यात्रा में यमुना नदी के आसपास ही लगाई गई है, ताकि कांवड़ यात्रा के साथ साथ बाढ़ पर भी नजर रखी जा सके।
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बाढ़ चौकियों की व्यवस्था राम भरोसे, तैनात अधिकारी नही उठा रहे फोन
चौसाना। संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने चार अस्थाई बाढ़ प्रबंध चौकियों को स्थापित किया है, लेकिन जिन राजस्व विभाग व ग्राम पंचायत विभाग के अधिकारियों को बाढ़ आपदा प्रबंध व्यवस्था में शामिल किया गया उनमें से अधिकांश अधिकारियों को रात्रि में कांवड़ व्यवस्था का जिम्मा भी दिया गया है।
बाढ़ आपदा चौकियों की व्यवस्था परखने के लिये नियुक्त किये गये पंचायत विभाग के अधिकारियों को दोपहर दो बजे से तीन बजे के मध्या कॉल किया गया। जिसमें ऊदपुर चौकी पर तैनात दीपक शर्मा को दो बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। केरटू की चौकी पर तैनात अर्पण मलिक ने दो बार कॉल करने पर भी फोन नही उठाया, जबकि अनुज चौधरी बिडौली में तैनात मिले और शीतल गढ़ी में तटबंध के टूटने के बाद व्यवस्था कराई और जानकारी साझा की। बसी चुंधियारी में तैनात रणवीर सिंह का मोबाइल स्वीच ऑफ मिला। भडी के ग्रामीण कामिल का कहना है कि रात्रि में गांव में कोई अधिकारी नही रहता।
झिंझाना में बाढ़ चौकी पर नहीं मिला कोई भी कर्मचारी
तहसीलदार सचिन वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में चार चौकी स्थापित की है। जिनमें लेखपाल, सचिव, पंचायती राज का एक व्यक्ति तथा कानूनगो को चौकी प्रभारी बनाया गया है। इसके उलट पड़ताल करने पर किसी भी चौकी पर कोई लेखपाल, कानूनगो व पंचायती राज का व्यक्ति नहीं मिला। दूसरी ओर फतेहपुर में बाढ़ चौकी पर कोई नही मिला। इस बारे में फतेहपुर चौकी पर तैनात लेखपाल ने बताया कि उनकी ड्यूटी कांवड़ यात्रा में भी लगी हुई है।केयर टू बाढ़ नियंत्रण चौकी में जलभराव है। यहां पर भी कोई नहीं मिला। कर्मचारियों ने बताया कि वह सुबह गए थे।
वर्जन...............
बाढ़ चौकियों पर तैनात लेखपालों और कर्मचारियों की ड्यूटी कांवड़ यात्रा में लगाई गई है। यदि कोई सूचना मिलती है तो ग्राम प्रधान, सचिव और अन्य गठित समिति के सदस्यों की सहायता से टीमें मौके पर पहुंचेगी। सभी को अलर्ट रहने को कहा गया है। - रविंद्र सिंह, डीएम बागपत