{"_id":"5ad8d7a34f1c1b56098b55c3","slug":"letttefie-increased-costs-of-projects","type":"story","status":"publish","title_hn":"लेटलतीफी ने परियोजनाओं की लागत बढ़ाई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लेटलतीफी ने परियोजनाओं की लागत बढ़ाई
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Thu, 19 Apr 2018 11:23 PM IST
विज्ञापन
projects
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। कलक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, एसपी कार्यालय समेत जिले की अन्य परियोजनाओं की लागत करोड़ों बढ़ गई है। ऐसा समय से परियोजनाओं के लिए धनराशि नहीं मिलने के कारण हुआ है। जिला अस्पताल की दूसरी किश्त आने के बीस दिन बाद भी निर्माण एजेेेेंसी द्वारा अभी तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है।
शामली जिला बन जाने के बाद पूर्वी यमुना नहर के किनारे ग्राम मुंडेट, गोहरनी , बधेव और भैैैंसवाल गांव के जंगल की भूमि में जिला मुख्यालय का खाका तैयार करके शासन को भेजा गया था। शासन से कलक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, सीएमओ, एसपी कार्यालय, कलक्ट्रेट आवासीय भवनों की धनराशि स्वीकृत हो जाने के बाद जिला मुख्यालय का निर्माण शुरू हो गया था। जिला मुख्यालय की परियोजनाओं की दूूसरी अन्य किश्तों की धनराशि देरी से आने के कारण इनकी लागत बढ़ती जा रही है। जिला मुख्यालय पर गोहरनी गांव में कलक्ट्रेट कार्यालय भवन का सबसे पहले 10 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत थी।
धनराशि देरी से आने के कारण कलक्ट्रेट कार्यालय का एक साल पूर्व रिवाइज स्टीमेट 29 करोड़ हो गया था। अब 33 करोड़ 63 लाख रुपये का स्टीमेट बढ़ गया है। कलक्ट्रेट आवासीय भवनों का पहले पांच करोड़ 38 लाख रुपये का शासन से स्वीकृत होकर आया था। शासन से कलक्ट्रेट आवासीय भवनों का रिवाइज स्टीमेट 13 करोड़ 85 लाख रुपये का स्वीकृत होकर आया है।
विज्ञापन
विकास भवन निर्माण के लिए सबसे पहले 11 करोड़ 52 लाख स्टीमेट भेजा गया था। विकास भवन कार्यालय का रिवाइज स्टीमेट 15 करोड़ 87 लाख रुपये का शासन को भेजा गया है। इसी प्रकार 100 बेड के जिला अस्पताल का सबसे पहले 34 करोड़ 32 लाख रुपये का स्टीमेट भेजा गया था। शासन से दो साल तक जिला अस्पताल की दूसरी किश्त न आने से लागत बढ़ गई। जिला प्रशासन की ओर से जिला अस्पताल अब नई लागत 38 करोड़ 82 लाख रुपये हो गई है। सीएमओ कार्यालय के निर्माण कार्य
की लागत शासन को पहली लागत दो करोड़ एक लाख रुपये भेजी गई थी। दो साल तक दूसरी किश्त की धनराशि न आने से निर्माण लागत बढ़ गई है। सीएमओ कार्यालय की नई लागत तीन करोड़ छह लाख रुपये हो गई है।
गोहरनी गांव में पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन का सबसे पहले शासन से दो करोड़ 17 लाख रुपये निर्माण स्वीकृत हुआ था। देरी से पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन की धनराशि आने के बाद इस कार्यालय भवन का रिवाइज स्टीमेट दो करोड़ 36 लाख रुपये शासन को भेजा गया है। उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसाला का आईटीआई भवन थानाभवन का रिवाइज स्टीमेट शासन को भेजा गया है। सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसाला का पांच करोड 37 लाख रुपये का स्वीकृत हो गया था। फिर से रिवाइज स्टीमेट भेजा गया है।
आईटीआई भवन थानाभवन की छह करोड़ 27 लाख रुपये की लागत बढ़ गई है। डीएम इंद्र विक्रम सिह ने बताया कि जिला मुख्यालय भवनों की परियोजनाओं का तीन साल तक का स्टीमेट बनता है, यदि शासन से परियोजना की धनराशि नही आती है, तो स्वत: लागत रिवाइज कर स्टीमेट शासन को भेजा जाता है। रिवाइज स्टीमेट शासन को भेज दिया गया हैं।
17 फरवरी तक बनकर तैयार होना था अस्पताल
शामली। दो साल के लंबे समय के बाद जिला अस्पताल की दूसरी किश्त जारी होने व धनराशि निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के खाते में जाने के बाद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिला अस्पताल के निर्माण के लिए शासन से 15 करोड़ 93 लाख रुपये की धनराशि दूूूसरी किश्त के रूप में 24 मार्च को स्वीकृत हो पाई थी। निर्माण एजेंसी के खाते में 29 मार्च को यह धनराशि हस्तांतरित कर दी गई थी।
धनराशि जाने के बाद 20 दिन बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभनहीं हो पाया हैं। शासन ने जिला अस्पताल का निर्माण कार्य 17 फरवरी 2018 में पूूरा होने का लक्ष्य दिया गया था। आवास विकास परिषद के प्रोजेक्ट मैनेजर नीरज कुमार राजपूत ने बताया कि जिला अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य 17 फरवरी 2018 का दिया हुआ था। धनराशि न आने से निर्माण कार्य अटका रहा है। शासन से जारी दूसरी किश्त से जिला अस्पताल का मुख्य भवन भी तैयार नहीं हो पाएगा। शासन से अगर तीसरी किश्त जल्दी नही मिली तो पंचवर्षीय योजना में बनकर तैयार होगा। उन्होंने बताया कि सीएमओ कार्यालय का निर्माण कार्य 30 मई तक पूरा हो पाएगा।
क्या बनेगा 100 बेड जिला अस्पताल में
जिला अस्पताल की चहारदीवारी का कार्य 85 प्रतिशत पूरा हो पाया है। मुख्य भवन का दस प्रतिशत कार्य पूरा हो पाया है। पीआरएस भवन, नर्सेस हास्टल, शव गृह, गैराज और ओवर हैड टैंक का काम प्रारंभनहीं हो पाया है।
विज्ञापन
शामली जिला बन जाने के बाद पूर्वी यमुना नहर के किनारे ग्राम मुंडेट, गोहरनी , बधेव और भैैैंसवाल गांव के जंगल की भूमि में जिला मुख्यालय का खाका तैयार करके शासन को भेजा गया था। शासन से कलक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, सीएमओ, एसपी कार्यालय, कलक्ट्रेट आवासीय भवनों की धनराशि स्वीकृत हो जाने के बाद जिला मुख्यालय का निर्माण शुरू हो गया था। जिला मुख्यालय की परियोजनाओं की दूूसरी अन्य किश्तों की धनराशि देरी से आने के कारण इनकी लागत बढ़ती जा रही है। जिला मुख्यालय पर गोहरनी गांव में कलक्ट्रेट कार्यालय भवन का सबसे पहले 10 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत थी।
विज्ञापन
धनराशि देरी से आने के कारण कलक्ट्रेट कार्यालय का एक साल पूर्व रिवाइज स्टीमेट 29 करोड़ हो गया था। अब 33 करोड़ 63 लाख रुपये का स्टीमेट बढ़ गया है। कलक्ट्रेट आवासीय भवनों का पहले पांच करोड़ 38 लाख रुपये का शासन से स्वीकृत होकर आया था। शासन से कलक्ट्रेट आवासीय भवनों का रिवाइज स्टीमेट 13 करोड़ 85 लाख रुपये का स्वीकृत होकर आया है।
विज्ञापन
विकास भवन निर्माण के लिए सबसे पहले 11 करोड़ 52 लाख स्टीमेट भेजा गया था। विकास भवन कार्यालय का रिवाइज स्टीमेट 15 करोड़ 87 लाख रुपये का शासन को भेजा गया है। इसी प्रकार 100 बेड के जिला अस्पताल का सबसे पहले 34 करोड़ 32 लाख रुपये का स्टीमेट भेजा गया था। शासन से दो साल तक जिला अस्पताल की दूसरी किश्त न आने से लागत बढ़ गई। जिला प्रशासन की ओर से जिला अस्पताल अब नई लागत 38 करोड़ 82 लाख रुपये हो गई है। सीएमओ कार्यालय के निर्माण कार्य
की लागत शासन को पहली लागत दो करोड़ एक लाख रुपये भेजी गई थी। दो साल तक दूसरी किश्त की धनराशि न आने से निर्माण लागत बढ़ गई है। सीएमओ कार्यालय की नई लागत तीन करोड़ छह लाख रुपये हो गई है।
गोहरनी गांव में पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन का सबसे पहले शासन से दो करोड़ 17 लाख रुपये निर्माण स्वीकृत हुआ था। देरी से पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन की धनराशि आने के बाद इस कार्यालय भवन का रिवाइज स्टीमेट दो करोड़ 36 लाख रुपये शासन को भेजा गया है। उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसाला का आईटीआई भवन थानाभवन का रिवाइज स्टीमेट शासन को भेजा गया है। सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसाला का पांच करोड 37 लाख रुपये का स्वीकृत हो गया था। फिर से रिवाइज स्टीमेट भेजा गया है।
आईटीआई भवन थानाभवन की छह करोड़ 27 लाख रुपये की लागत बढ़ गई है। डीएम इंद्र विक्रम सिह ने बताया कि जिला मुख्यालय भवनों की परियोजनाओं का तीन साल तक का स्टीमेट बनता है, यदि शासन से परियोजना की धनराशि नही आती है, तो स्वत: लागत रिवाइज कर स्टीमेट शासन को भेजा जाता है। रिवाइज स्टीमेट शासन को भेज दिया गया हैं।
17 फरवरी तक बनकर तैयार होना था अस्पताल
शामली। दो साल के लंबे समय के बाद जिला अस्पताल की दूसरी किश्त जारी होने व धनराशि निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के खाते में जाने के बाद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिला अस्पताल के निर्माण के लिए शासन से 15 करोड़ 93 लाख रुपये की धनराशि दूूूसरी किश्त के रूप में 24 मार्च को स्वीकृत हो पाई थी। निर्माण एजेंसी के खाते में 29 मार्च को यह धनराशि हस्तांतरित कर दी गई थी।
धनराशि जाने के बाद 20 दिन बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभनहीं हो पाया हैं। शासन ने जिला अस्पताल का निर्माण कार्य 17 फरवरी 2018 में पूूरा होने का लक्ष्य दिया गया था। आवास विकास परिषद के प्रोजेक्ट मैनेजर नीरज कुमार राजपूत ने बताया कि जिला अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य 17 फरवरी 2018 का दिया हुआ था। धनराशि न आने से निर्माण कार्य अटका रहा है। शासन से जारी दूसरी किश्त से जिला अस्पताल का मुख्य भवन भी तैयार नहीं हो पाएगा। शासन से अगर तीसरी किश्त जल्दी नही मिली तो पंचवर्षीय योजना में बनकर तैयार होगा। उन्होंने बताया कि सीएमओ कार्यालय का निर्माण कार्य 30 मई तक पूरा हो पाएगा।
क्या बनेगा 100 बेड जिला अस्पताल में
जिला अस्पताल की चहारदीवारी का कार्य 85 प्रतिशत पूरा हो पाया है। मुख्य भवन का दस प्रतिशत कार्य पूरा हो पाया है। पीआरएस भवन, नर्सेस हास्टल, शव गृह, गैराज और ओवर हैड टैंक का काम प्रारंभनहीं हो पाया है।