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जिले में सुविधा न संसाधन, कैसे निखरे प्रतिभा
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शामली शहीद उधम सिंह स्टेडियम
- फोटो : SHAMLI
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जिले में सुविधा न संसाधन, कैसे निखरे प्रतिभा
शामली। जनपद में खेल और खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं है। जिला का दर्जा मिलने के बाद भी अभी तक खिलाड़ियों को जिला स्टेडियम नहीं मिल पाया है। जनपद में एक मात्र शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम है, वह भी सिर्फ नाम का स्टेडियम बनकर रह गया है। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने की कोई सुविधा यहां उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहर दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
शामली को 28 सितंबर 2011 को जिला बनाया गया था। जिला बनने पर युवाओं और खिलाड़ियों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही जिला स्टेडियम का निर्माण होगा और सुविधाओं एवं संसाधन उपलब्ध होंगे, लेकिन 10 साल बाद भी जिला स्टेडियम नहीं मिल सका। जिला स्टेडियम के लिए भैंसवाल गांव में भूमि चिह्नित की गई है, लेकिन उसके निर्माण के लिए अभी बजट तक नहीं मिल पाया है। शामली में करीब 20 साल पहले भैंसवाल रोड पर नवीन मंडी के पीछे शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम का निर्माण हुआ था। यह स्टेडियम सिर्फ नाम का है, इसमें खिलाड़ियों के लिए सुविधा और संसाधन के नाम पर कुछ नहीं है। स्टेडियम बनने के समय जो खेल का सामान आया था, वह भी खराब हो चुका है। इसके बाद से कोई सामान खिलाड़ियों के लिए नहीं आया है। मैदान में युवा दौड़ लगाते हैं। इसके अलावा कुश्ती और कबड्डी आदि खेलते हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए कोच उपलब्ध नहीं है। खेल के लिए कोई सामान यहां पर उपलब्ध नहीं है। खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं न होने से प्रतिभाएं यहां पर दबकर रह जाती है।
नहीं खुला क्रीड़ा विभाग का दफ्तर
शामली। जिले में क्रीड़ा विभाग का कार्यालय आज तक नहीं खुल पाया। जिला क्रीड़ा अधिकारी की नियुक्ति भी नहीं हो सकी है। सहारनपुर के क्रीड़ा अधिकारी पर ही शामली जिले का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
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ये बोले खिलाड़ी
शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी वेट लिफ्टर मयंक हुड्डा ने बताया कि शामली जिले में प्रैक्टिस के लिए कोई सुविधा न होने के कारण वेट लिफ्टिंग की उसने पहले बड़ौत, फिर बागपत में प्रैक्टिस करनी पड़ी। अब वह मेरठ में प्रैक्टिस कर रहा है। साथ में यहीं पर रहकर वह चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी कैंपस में बीपीएड कर रहा है।
शहर के मोहल्ला लाजपतराय निवासी प्रशांत सूर्य ने बताया कि वह देहरादून में क्रिकेट बैट्समैन की प्रैक्टिस कर रहा हूं। प्रैक्टिस करने के साथ वह वहीं पर बीपीएड कर रहा है। जिले में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा न होने के कारण दूसरे राज्य में जाना पड़ता है।
गांव टिटौली निवासी नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट फ्री पिस्टल के निशानेबाज खिलाड़ी अक्षय कुमार ने बताया कि शामली में 50 मीटर रेंज की सुविधा न होने के कारण दिल्ली में रहकर प्वाइंट 22 बोर की प्रेक्टिस करनी पड़ रही है। दिल्ली में प्रैक्टिस करना महंगा और असुविधाजनक होता है। बहुत से साथी निशानेबाज दिल्ली व देहरादून नहीं जा पाते और शामली में यह सुविधा न होने से प्रैक्टिस करने से वंचित रह जाते हैं।
------
कोट
शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम में युवाओं के लिए एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती और रेस करने के लिए मैदान में ट्रैक बना हुआ है। स्टेडियम में खेल का सामान करीब 20 साल से नहीं आया है। पुराना जो सामान कभी पहले आया था, वह खराब हो चुका है।
- एमएस तोमर, प्रभारी युवा कल्याण अधिकारी।
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शामली। जनपद में खेल और खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं है। जिला का दर्जा मिलने के बाद भी अभी तक खिलाड़ियों को जिला स्टेडियम नहीं मिल पाया है। जनपद में एक मात्र शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम है, वह भी सिर्फ नाम का स्टेडियम बनकर रह गया है। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने की कोई सुविधा यहां उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहर दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
शामली को 28 सितंबर 2011 को जिला बनाया गया था। जिला बनने पर युवाओं और खिलाड़ियों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही जिला स्टेडियम का निर्माण होगा और सुविधाओं एवं संसाधन उपलब्ध होंगे, लेकिन 10 साल बाद भी जिला स्टेडियम नहीं मिल सका। जिला स्टेडियम के लिए भैंसवाल गांव में भूमि चिह्नित की गई है, लेकिन उसके निर्माण के लिए अभी बजट तक नहीं मिल पाया है। शामली में करीब 20 साल पहले भैंसवाल रोड पर नवीन मंडी के पीछे शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम का निर्माण हुआ था। यह स्टेडियम सिर्फ नाम का है, इसमें खिलाड़ियों के लिए सुविधा और संसाधन के नाम पर कुछ नहीं है। स्टेडियम बनने के समय जो खेल का सामान आया था, वह भी खराब हो चुका है। इसके बाद से कोई सामान खिलाड़ियों के लिए नहीं आया है। मैदान में युवा दौड़ लगाते हैं। इसके अलावा कुश्ती और कबड्डी आदि खेलते हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए कोच उपलब्ध नहीं है। खेल के लिए कोई सामान यहां पर उपलब्ध नहीं है। खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं न होने से प्रतिभाएं यहां पर दबकर रह जाती है।
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नहीं खुला क्रीड़ा विभाग का दफ्तर
शामली। जिले में क्रीड़ा विभाग का कार्यालय आज तक नहीं खुल पाया। जिला क्रीड़ा अधिकारी की नियुक्ति भी नहीं हो सकी है। सहारनपुर के क्रीड़ा अधिकारी पर ही शामली जिले का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
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ये बोले खिलाड़ी
शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी वेट लिफ्टर मयंक हुड्डा ने बताया कि शामली जिले में प्रैक्टिस के लिए कोई सुविधा न होने के कारण वेट लिफ्टिंग की उसने पहले बड़ौत, फिर बागपत में प्रैक्टिस करनी पड़ी। अब वह मेरठ में प्रैक्टिस कर रहा है। साथ में यहीं पर रहकर वह चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी कैंपस में बीपीएड कर रहा है।
शहर के मोहल्ला लाजपतराय निवासी प्रशांत सूर्य ने बताया कि वह देहरादून में क्रिकेट बैट्समैन की प्रैक्टिस कर रहा हूं। प्रैक्टिस करने के साथ वह वहीं पर बीपीएड कर रहा है। जिले में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा न होने के कारण दूसरे राज्य में जाना पड़ता है।
गांव टिटौली निवासी नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट फ्री पिस्टल के निशानेबाज खिलाड़ी अक्षय कुमार ने बताया कि शामली में 50 मीटर रेंज की सुविधा न होने के कारण दिल्ली में रहकर प्वाइंट 22 बोर की प्रेक्टिस करनी पड़ रही है। दिल्ली में प्रैक्टिस करना महंगा और असुविधाजनक होता है। बहुत से साथी निशानेबाज दिल्ली व देहरादून नहीं जा पाते और शामली में यह सुविधा न होने से प्रैक्टिस करने से वंचित रह जाते हैं।
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कोट
शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम में युवाओं के लिए एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती और रेस करने के लिए मैदान में ट्रैक बना हुआ है। स्टेडियम में खेल का सामान करीब 20 साल से नहीं आया है। पुराना जो सामान कभी पहले आया था, वह खराब हो चुका है।
- एमएस तोमर, प्रभारी युवा कल्याण अधिकारी।

शामली शहीद उधम सिंह स्टेडियम खराब पडे उपकरण- फोटो : SHAMLI