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‘दिल का आंगन भीगा-भीगा, आंखों के आंसू सूखे हैं’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Mar 2017 11:53 PM IST
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शामली टंकी रोड पर मुशायरे में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली। होली के उपलक्ष्य में प्रसिद्ध कवि शैलेंद्र मिश्रा के काव्य संग्रह ‘कुसुम’ के विमोचन पर हुए कवि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के चेयरमैन एवं शायर डा. नवाज देवबंदी समेत कई कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। कई घंटे तक शायरों के कलाम सुनाएं और तालियां बंटोरीं।
सोमवार रात टंकी रोड़ स्थित राजारानी बैंक्वेट हाल में होली के उपलक्ष्य में कवि शैलेंद्र मिश्रा के काव्य संग्रह का विमोचन शायर डा. नवाज देवबंदी ने किया। अध्यक्षता सूर्यवीर सिंह ने की। डा. देवबंदी ने ये शेर पढ़ा-‘वो रुलाकर हंस ना पाया देर तक, जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक।’ शहर के कवि प्रदीप मायूूस ने सुनाया- ‘मेेरे होठों को अब दिलकश हंसी अच्छी नहीं लगती, बिछुड़कर तुझसे मुझको जिंदगी अच्छी नहीं लगती, हुआ है दूर जबसे वो मेरी जान-ए-वफा मुझसे, मुझे ऐ चांद तेरी चांदनी अच्छी नहीं लगती।’ डा. वसीम राजोपुरी ने फरमाया- ‘दिल का आंगन भीगा-भीगा, आंखों के आंसू सूखे हैं, अल्लाह अब तो काम दिला दे, कल से बच्चे भूखे हैं।’
योगेंद्र सुंदरियाल ने कुछ यूं कहा- ‘अर्जुन की तरह कोई जंग छेड़ो तो मै अपनी अस्थि को दधिचि कर दूंगा’। अंसार सिद्दीकी ने सुनाया- ‘मैने सोचा था कि उसके ख्वाब में शिरकत करूं, क्या खबर थी आज वो भी जागता रह जाएगा’। डा. प्रदीप मायूस के संयोजन में हुए कार्यक्रम में प्रीतम सिंह प्रीतम, सुनील अरोड़ा टम्मी, शाहनवाज सिद्दीकी एवं बलराज मलिक ने काव्य पाठ किया।
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कार्यक्रम का संचालन डा. विपिन कौशिक, डा. शुभम रानी त्यागी ने संयुुक्त रूप से किया। इस दौरान शामली के तहसीलदार राकेश त्यागी, शामली नगर पालिका परिषद के पूर्व अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र मिश्रा, अधिशासी अधिकारी समीर कश्यप, महबूब राणा, अजय पाठक, देवराज, सोनू चावला, देवेंद्र, हंसराज, मास्टर विजय, देवेंद्र बिड़ला, विजय पाठक, दिनेश पाठक आदि मौजूूूद रहे।
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सोमवार रात टंकी रोड़ स्थित राजारानी बैंक्वेट हाल में होली के उपलक्ष्य में कवि शैलेंद्र मिश्रा के काव्य संग्रह का विमोचन शायर डा. नवाज देवबंदी ने किया। अध्यक्षता सूर्यवीर सिंह ने की। डा. देवबंदी ने ये शेर पढ़ा-‘वो रुलाकर हंस ना पाया देर तक, जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक।’ शहर के कवि प्रदीप मायूूस ने सुनाया- ‘मेेरे होठों को अब दिलकश हंसी अच्छी नहीं लगती, बिछुड़कर तुझसे मुझको जिंदगी अच्छी नहीं लगती, हुआ है दूर जबसे वो मेरी जान-ए-वफा मुझसे, मुझे ऐ चांद तेरी चांदनी अच्छी नहीं लगती।’ डा. वसीम राजोपुरी ने फरमाया- ‘दिल का आंगन भीगा-भीगा, आंखों के आंसू सूखे हैं, अल्लाह अब तो काम दिला दे, कल से बच्चे भूखे हैं।’
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योगेंद्र सुंदरियाल ने कुछ यूं कहा- ‘अर्जुन की तरह कोई जंग छेड़ो तो मै अपनी अस्थि को दधिचि कर दूंगा’। अंसार सिद्दीकी ने सुनाया- ‘मैने सोचा था कि उसके ख्वाब में शिरकत करूं, क्या खबर थी आज वो भी जागता रह जाएगा’। डा. प्रदीप मायूस के संयोजन में हुए कार्यक्रम में प्रीतम सिंह प्रीतम, सुनील अरोड़ा टम्मी, शाहनवाज सिद्दीकी एवं बलराज मलिक ने काव्य पाठ किया।
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कार्यक्रम का संचालन डा. विपिन कौशिक, डा. शुभम रानी त्यागी ने संयुुक्त रूप से किया। इस दौरान शामली के तहसीलदार राकेश त्यागी, शामली नगर पालिका परिषद के पूर्व अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र मिश्रा, अधिशासी अधिकारी समीर कश्यप, महबूब राणा, अजय पाठक, देवराज, सोनू चावला, देवेंद्र, हंसराज, मास्टर विजय, देवेंद्र बिड़ला, विजय पाठक, दिनेश पाठक आदि मौजूूूद रहे।