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काठा को पुनर्जीवित करने के प्रयास की सराहना
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 29 Jun 2016 12:12 AM IST
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नदी
- फोटो : फाइल फोटो
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शामली। लखनऊ में आयोजित हिंडन यात्रा मल्टी स्टाक होल्डर जर्नी टुवर्डस रिवर रिजुएनेशन नाम से सिपोंजियम में काठा नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को सराहना मिली।
सोमवार को लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संगठन वाटर रिसोर्स ग्रुप 2030 द्वारा बनाई गई रिपोर्ट का मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह, प्रमुख सचिव आलोक रंजन और कईं देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से विमोचन किया। इस रिपोर्ट में शामली में काठा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रोफेसर उमर सैफ के प्रयासों को प्रमुख जगह दी गई है। रिसर्च रिपोर्ट में नदी को जिन्दा करने के प्रयासों को बहादुरी भरा प्रयास लिखा गया है और प्रोफेसर उमर सैफ द्वारा किए जा रहे पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्निर्माण के तरीकों की सराहना की गई।
कार्यक्रम में काठा नदी पुनर्जीवन अभियान एक प्रेरणादायी कथा पर जोखेम स्मिट, नीदरलैंड द्वारा बनाई गये वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। इसी दौरान विचार गोष्ठी में प्रोफेसर उमर सैफ ने जैव विविधता विशेषज्ञ के रूप में भाग लेते हुए पैनल डिस्कसन में कहा कि जलसंचय के हमारे प्रयास बिना परिस्थितिकी तंत्रों के निर्माण के अधूरे हैं और जीवनहीन जल को जीवित करने के लिए हमें वहां सदियों से रह रहे जीव जंतुओं का पुनर्वास करना होगा। अगर हमने ऐसा नहीं किया तो वो दिन दूर नहीं जब जीवनहीन जल स्रोत, चाहे वो पोखर हो या नदी, जीवन के नहीं बल्कि बीमारियों और कैंसर के स्रोत बन जाएंगें।
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सोमवार को लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संगठन वाटर रिसोर्स ग्रुप 2030 द्वारा बनाई गई रिपोर्ट का मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह, प्रमुख सचिव आलोक रंजन और कईं देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से विमोचन किया। इस रिपोर्ट में शामली में काठा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रोफेसर उमर सैफ के प्रयासों को प्रमुख जगह दी गई है। रिसर्च रिपोर्ट में नदी को जिन्दा करने के प्रयासों को बहादुरी भरा प्रयास लिखा गया है और प्रोफेसर उमर सैफ द्वारा किए जा रहे पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्निर्माण के तरीकों की सराहना की गई।
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कार्यक्रम में काठा नदी पुनर्जीवन अभियान एक प्रेरणादायी कथा पर जोखेम स्मिट, नीदरलैंड द्वारा बनाई गये वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। इसी दौरान विचार गोष्ठी में प्रोफेसर उमर सैफ ने जैव विविधता विशेषज्ञ के रूप में भाग लेते हुए पैनल डिस्कसन में कहा कि जलसंचय के हमारे प्रयास बिना परिस्थितिकी तंत्रों के निर्माण के अधूरे हैं और जीवनहीन जल को जीवित करने के लिए हमें वहां सदियों से रह रहे जीव जंतुओं का पुनर्वास करना होगा। अगर हमने ऐसा नहीं किया तो वो दिन दूर नहीं जब जीवनहीन जल स्रोत, चाहे वो पोखर हो या नदी, जीवन के नहीं बल्कि बीमारियों और कैंसर के स्रोत बन जाएंगें।
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