{"_id":"5c951f16bdec2213e3054812","slug":"kairaana-par-fasa-peach","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैराना पर फंसा पेंच, रात तक असमंजस के हालात ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैराना पर फंसा पेंच, रात तक असमंजस के हालात
Fri, 22 Mar 2019 11:15 PM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
amarujala
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Fri, 22 Mar 2019 11:15 PM IST
विज्ञापन
file
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन के सिर्फ दो दिन बचे हैं। लिहाजा दुल्हैंडी के दिन सुबह से ही कयास लगाए जा रहे थे कि शाम या रात तक टिकट का फाइनल हो जाएगा। देर शाम भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की, लेकिन कैराना का नाम नहीं था। जिसके बाद कयासों का दौर शुरू हो गया और कई नाम चर्चाओं में आने लगे।
भाजपा द्वारा जारी प्रत्याशियों की सूची में कैराना का नाम न होना हैरान करने वाला था। सूची में प्रत्याशी का नाम होने से ही ये कयास लगने लगे थे कि आखिर इस सीट पर कोई न कोई बड़ा पेंच फंसा है जो पार्टी को टिकट फाइनल करने में इतना वक्त लग रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कैराना लोकसभा सीट इस बार पार्टी के लिए काफी अहम है। वो इसलिए कि इस सीट पर पिछले साल मई में हुए उपचुनाव में पार्टी हाईकमान द्वारा पूरी ताकत झोंकने के बाद भी पार्टी प्रत्याशी मृगांका सिंह चुनाव हार गई थीं। यही वजह थी कि इस सीट पर पार्टी हाईकमान ने चार बार सर्वे कराया। अलग अलग टीमों ने गोपनीय वर्क किया। इनमें संभावित दावेदारों की क्षेत्र में सक्रियता, उसकी छवि, बैक ग्राउंड, उसका राजनीतिक कैरियर से लेकर उसके साथ लगकर काम करने वाली टीम के बारे में भी तमाम जानकारियां जुटाई गईं। सर्वे में इस बात पर भी ध्यान रखा गया कि इस क्षेत्र में सक्रिय दावेदारों के अलावा यहां कोई बड़ा बाहरी प्रत्याशी कितना कारगर हो सकता है। ये भी विकल्प तलाशा गया कि किसी दूसरी पार्टी का कोई मजबूत स्थानीय नेता पार्टी में शामिल कर टिकट दिया जाए तो वो कितना कारगर होगा।
यही वजह थी कि कुछ दिन पहले गुर्जर नेता वीरेंद्र सिंह और उनके बेटे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान के भाजपा में शामिल होने का शोर मचा, लेकिन मामला शांत हो गया। बुधवार रात भर कयास लगते रहे। भाजपा की सूची में कैराना का नाम ना होने से खुद दावेदारों की धड़कने बढ़ गई थीं। उन्हें भी लगने लगा कि कहीं न कहीं कोई बड़ा पेंच फंसा है जो पार्टी इस सीट को लेकर प्रत्याशी तय नहीं कर पा रहा है। कई दावेदारों के नाम सुर्खियों में हैं। गंगोह से भाजपा विधायक प्रदीप कुमार का नाम चर्चाओं में है। वीरेंद्र सिंह परिवार को टिकट होने की चर्चा भी चली। झिंझाना क्षेत्र के कश्यप नेता का भी उड़ा। लोग एक दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने में लगे रहे लेकिन स्थिति साफ नहीं हुई। उधर टिकट के दावेदारों के भी फोन आधी रात तक व्यस्त रहे। टिकट की दावेदार मृगांका सिंह का फोन भी मध्यरात्रि के बाद तक व्यस्त रहा।
विज्ञापन
वकील ने नामांकनपत्र लिया
शुक्रवार सुबह मृगांका सिंह दिल्ली पहुंच गईं। जिसके बाद उनके अधिवक्ता ने कलक्ट्रेट जाकर नामांकनपत्र लिया। बाकायदा भाजपा प्रत्याशी की ओर से फार्म लिया गया। कागजात तैयार होने शुरू हो गए। इससे फिर से चर्चा हुई कि मृगांका का टिकट हो सकता है। इसी वजह से वे दिल्ली गई हैं और शायद शाम तक सिंबल मिल जाए, लेकिन किसी भी स्तर से पुष्टि नहीं हो रही थी।
फार्म हाउस पर डटे रहे समर्थक
शुक्रवार को मायापुर फार्म हाउस पर भाजपा नेत्री मृगांका सिंह के समर्थक दिल्ली भाजपा हाईकमान की घोषणा के इंतजार में बैठे रहे। मृगांका सिंह सुबह ही दिल्ली चली गई थीं। उनकी गैर मौजूदगी में उनके समर्थक फार्म हाउस पर घोषणा के इंतजार में डटे हुए थे। मौके पर प्रमोद प्रधान सहपत, राजकुमार शर्मा, नीरज मलिक प्रधान सलफा, सतवीर वर्मा कांधला, सतेन्द्र तोमर झिंझाना, बंटी तोमर, त्रिलोक चंद प्रधान ऐरटी, अशोक चौहान कांधला, जगदीश चौहान तीतरवाड़ा, नरेश चौहान, ओपी कौशिक, रविन्द्र कश्यप, कृष्ण मित्तल, मुस्तकीम, प्रमोद कोरी ऐरटी, आलिम बसेडा, रूपेश कंडेला, रवि कंडेला आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भाजपा द्वारा जारी प्रत्याशियों की सूची में कैराना का नाम न होना हैरान करने वाला था। सूची में प्रत्याशी का नाम होने से ही ये कयास लगने लगे थे कि आखिर इस सीट पर कोई न कोई बड़ा पेंच फंसा है जो पार्टी को टिकट फाइनल करने में इतना वक्त लग रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कैराना लोकसभा सीट इस बार पार्टी के लिए काफी अहम है। वो इसलिए कि इस सीट पर पिछले साल मई में हुए उपचुनाव में पार्टी हाईकमान द्वारा पूरी ताकत झोंकने के बाद भी पार्टी प्रत्याशी मृगांका सिंह चुनाव हार गई थीं। यही वजह थी कि इस सीट पर पार्टी हाईकमान ने चार बार सर्वे कराया। अलग अलग टीमों ने गोपनीय वर्क किया। इनमें संभावित दावेदारों की क्षेत्र में सक्रियता, उसकी छवि, बैक ग्राउंड, उसका राजनीतिक कैरियर से लेकर उसके साथ लगकर काम करने वाली टीम के बारे में भी तमाम जानकारियां जुटाई गईं। सर्वे में इस बात पर भी ध्यान रखा गया कि इस क्षेत्र में सक्रिय दावेदारों के अलावा यहां कोई बड़ा बाहरी प्रत्याशी कितना कारगर हो सकता है। ये भी विकल्प तलाशा गया कि किसी दूसरी पार्टी का कोई मजबूत स्थानीय नेता पार्टी में शामिल कर टिकट दिया जाए तो वो कितना कारगर होगा।
विज्ञापन
यही वजह थी कि कुछ दिन पहले गुर्जर नेता वीरेंद्र सिंह और उनके बेटे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान के भाजपा में शामिल होने का शोर मचा, लेकिन मामला शांत हो गया। बुधवार रात भर कयास लगते रहे। भाजपा की सूची में कैराना का नाम ना होने से खुद दावेदारों की धड़कने बढ़ गई थीं। उन्हें भी लगने लगा कि कहीं न कहीं कोई बड़ा पेंच फंसा है जो पार्टी इस सीट को लेकर प्रत्याशी तय नहीं कर पा रहा है। कई दावेदारों के नाम सुर्खियों में हैं। गंगोह से भाजपा विधायक प्रदीप कुमार का नाम चर्चाओं में है। वीरेंद्र सिंह परिवार को टिकट होने की चर्चा भी चली। झिंझाना क्षेत्र के कश्यप नेता का भी उड़ा। लोग एक दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने में लगे रहे लेकिन स्थिति साफ नहीं हुई। उधर टिकट के दावेदारों के भी फोन आधी रात तक व्यस्त रहे। टिकट की दावेदार मृगांका सिंह का फोन भी मध्यरात्रि के बाद तक व्यस्त रहा।
विज्ञापन
वकील ने नामांकनपत्र लिया
शुक्रवार सुबह मृगांका सिंह दिल्ली पहुंच गईं। जिसके बाद उनके अधिवक्ता ने कलक्ट्रेट जाकर नामांकनपत्र लिया। बाकायदा भाजपा प्रत्याशी की ओर से फार्म लिया गया। कागजात तैयार होने शुरू हो गए। इससे फिर से चर्चा हुई कि मृगांका का टिकट हो सकता है। इसी वजह से वे दिल्ली गई हैं और शायद शाम तक सिंबल मिल जाए, लेकिन किसी भी स्तर से पुष्टि नहीं हो रही थी।
फार्म हाउस पर डटे रहे समर्थक
शुक्रवार को मायापुर फार्म हाउस पर भाजपा नेत्री मृगांका सिंह के समर्थक दिल्ली भाजपा हाईकमान की घोषणा के इंतजार में बैठे रहे। मृगांका सिंह सुबह ही दिल्ली चली गई थीं। उनकी गैर मौजूदगी में उनके समर्थक फार्म हाउस पर घोषणा के इंतजार में डटे हुए थे। मौके पर प्रमोद प्रधान सहपत, राजकुमार शर्मा, नीरज मलिक प्रधान सलफा, सतवीर वर्मा कांधला, सतेन्द्र तोमर झिंझाना, बंटी तोमर, त्रिलोक चंद प्रधान ऐरटी, अशोक चौहान कांधला, जगदीश चौहान तीतरवाड़ा, नरेश चौहान, ओपी कौशिक, रविन्द्र कश्यप, कृष्ण मित्तल, मुस्तकीम, प्रमोद कोरी ऐरटी, आलिम बसेडा, रूपेश कंडेला, रवि कंडेला आदि मौजूद रहे।