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Shamli News: बंतीखेड़ा से निकल रहे कबड्डी के धुरंधर, गांव का नाम कर रहे रोशन
Mon, 12 Aug 2024 12:57 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 12 Aug 2024 12:57 AM IST
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बन्तीखेडा में कबडडी खेलते खिलाडी
शामली। गांव बंतीखेड़ा की पहचान कबड्डी खिलाड़ियों के रूप में हो रही है। इस गांव से राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल रहे है। अभी तक 15 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी खेल कोटे से अलग-अलग विभागों में सरकारी नौकरी हासिल कर गांव का नाम रोशन कर चुके हैं। हाल में भी गांव में 30 से ज्यादा युवक व युवतियां कबड्डी के दांवपेच सीख रहे हैं।
शामली से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर मुजफ्फरनगर रोड पर स्थित गांव बंतीखेड़ा की जनपद में अलग ही पहचान है। गांव की आबादी लगभग 14 हजार और वोटिंग 9500 का है। गांव में सभी जाति के लोग रहते है। जिसमें ज्यादा संख्या जाट और मुस्लिम वर्ग की है। यहां के युवाओं को कबड्डी खेल का जबरदस्त शौक है। अभी तक गांव के 15 से ज्यादा युवा राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेल में पहचान बनाते हुए थल सेना, कोच, पुलिस, रेलवे व अन्य विभागों में नौकरी पा चुके हैं।
ग्रामीण भी अपने बच्चों को कबड़्डी खेल की ओर बढ़ावा दे रहे हैं। हर दिन सुबह और शाम को युवक व युवतियों को गांव के ही प्राथमिक स्कूल में कबड्डी की तैयारी कराई जाती है। युवा भी जी तोड़ मेहनत कर खेल में आगे बढ़ते हुए गांव का नाम रोशन करने से पीछे नहीं हट रहे है।
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-वर्ष 1972 से गांव के महिपाल ने की थी शुरूआत
गांव के महिपाल ने वर्ष 1972 से कबड्डी खेलने की शुरूआत की थी। जिसके बाद महिपाल ने 1978 में इंडिया कैंप किया और उसके बाद 1982 में उसकी नौकरी सर शादीलाल मिल शामली में लग गई। उसके बाद उन्होंने गांव के अन्य युवाओं को जागरूक किया। वह मिल की ओर से खेलते थे। उनकी वर्ष 2020 में कोरोना काल में मृत्यु हो गई।
-गांव के नरेश और प्रमोद ने युवाओं के अंदर भरा जोश
गांव के नरेश और प्रमोद ने नेशनल तक पहुंचकर युवाओं में जोश भरा। कबड्डी के कारण नरेश की मवाना मिल में और प्रमोद की सीआरपीएफ में नौकरी लग गई। कुछ समय बाद दोनों ने नौकरी छोड़ गांव के युवाओं को कबड्डी के प्रति जागरूक कर उन्हें प्रशिक्षण देते हुए तैयार किया। उन्होंने 1995 से 2002 तक काफी युवाओं को तैयार कर अंतर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाते हुए सरकारी नौकरी दिलवाई।
-कोच संदीप, कमल, उपेंद्र, प्रवेंद्र देते है निशुल्क प्रशिक्षण
शुरू से ही गांव के प्राथमिक स्कूल में ही कबड्डी का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खिलाड़ी प्रवेंद्र व प्रधानाध्यापक पद पर तैनात उपेंद्र कुमार गांव के युवाओं को सुबह और शाम को प्रशिक्षण देते है। हफ्ते में दो दिन मैट पर भी प्रशिक्षण दिया जाता है।सहारनपुर कोच संदीप कुमार व पीटीआई कमल हफ्ते में दो से तीन दिन का समय निकालकर गांव के युवाओं को प्रशिक्षण व किट आदि का सहयोग करते है।
-कबड्डी में मुकाम हासिल करने वाले गांव के युवा
-दीपचंद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बीपीसीएल मुंबई।
-अमित कुमार भारतीय थल सेना बंगलुरु।
-रोहित कुमार उत्तर प्रदेश पुलिस।
-संदीप कुमार कबड्डी कोच सहारनपुर।
-राजीव कुमार इंडियन रेलवे में टीटी हापुड़।
-आशीष जागलान श्रम एवं रोजगार मंत्रालय दिल्ली।
- कमल पीटीआई मेरठ।
- प्रमेंद्र कबड्डी कोच बंतीखेड़ा।
- निशांत इंडियन रेलवे मुरादनगर।
- अनुभव इंडियन रेलवे पटना।
- मोहित इंडियन रेलवे पटना।
- गौरव थल सेना नासिक।
- सिद्वार्थ चौधरी थल सेना नासिक।
- उपेंद्र कुमार प्रधानाध्यापक बंतीखेड़ा।
गांव के युवा पिछले काफी समय से कबड़्डी के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर सरकारी नौकरी पा रहे है। अभी भी गांव के अंडर 14 में 20 और अंडर 19 में 20 युवक व इस वर्ष से 10 लड़कियों भी प्रशिक्षण ले रही है। गांव के युवाओं को कबड्डी के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
-सावित्री देवी, ग्राम प्रधान
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शामली से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर मुजफ्फरनगर रोड पर स्थित गांव बंतीखेड़ा की जनपद में अलग ही पहचान है। गांव की आबादी लगभग 14 हजार और वोटिंग 9500 का है। गांव में सभी जाति के लोग रहते है। जिसमें ज्यादा संख्या जाट और मुस्लिम वर्ग की है। यहां के युवाओं को कबड्डी खेल का जबरदस्त शौक है। अभी तक गांव के 15 से ज्यादा युवा राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेल में पहचान बनाते हुए थल सेना, कोच, पुलिस, रेलवे व अन्य विभागों में नौकरी पा चुके हैं।
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ग्रामीण भी अपने बच्चों को कबड़्डी खेल की ओर बढ़ावा दे रहे हैं। हर दिन सुबह और शाम को युवक व युवतियों को गांव के ही प्राथमिक स्कूल में कबड्डी की तैयारी कराई जाती है। युवा भी जी तोड़ मेहनत कर खेल में आगे बढ़ते हुए गांव का नाम रोशन करने से पीछे नहीं हट रहे है।
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-वर्ष 1972 से गांव के महिपाल ने की थी शुरूआत
गांव के महिपाल ने वर्ष 1972 से कबड्डी खेलने की शुरूआत की थी। जिसके बाद महिपाल ने 1978 में इंडिया कैंप किया और उसके बाद 1982 में उसकी नौकरी सर शादीलाल मिल शामली में लग गई। उसके बाद उन्होंने गांव के अन्य युवाओं को जागरूक किया। वह मिल की ओर से खेलते थे। उनकी वर्ष 2020 में कोरोना काल में मृत्यु हो गई।
-गांव के नरेश और प्रमोद ने युवाओं के अंदर भरा जोश
गांव के नरेश और प्रमोद ने नेशनल तक पहुंचकर युवाओं में जोश भरा। कबड्डी के कारण नरेश की मवाना मिल में और प्रमोद की सीआरपीएफ में नौकरी लग गई। कुछ समय बाद दोनों ने नौकरी छोड़ गांव के युवाओं को कबड्डी के प्रति जागरूक कर उन्हें प्रशिक्षण देते हुए तैयार किया। उन्होंने 1995 से 2002 तक काफी युवाओं को तैयार कर अंतर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाते हुए सरकारी नौकरी दिलवाई।
-कोच संदीप, कमल, उपेंद्र, प्रवेंद्र देते है निशुल्क प्रशिक्षण
शुरू से ही गांव के प्राथमिक स्कूल में ही कबड्डी का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खिलाड़ी प्रवेंद्र व प्रधानाध्यापक पद पर तैनात उपेंद्र कुमार गांव के युवाओं को सुबह और शाम को प्रशिक्षण देते है। हफ्ते में दो दिन मैट पर भी प्रशिक्षण दिया जाता है।सहारनपुर कोच संदीप कुमार व पीटीआई कमल हफ्ते में दो से तीन दिन का समय निकालकर गांव के युवाओं को प्रशिक्षण व किट आदि का सहयोग करते है।
-कबड्डी में मुकाम हासिल करने वाले गांव के युवा
-दीपचंद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बीपीसीएल मुंबई।
-अमित कुमार भारतीय थल सेना बंगलुरु।
-रोहित कुमार उत्तर प्रदेश पुलिस।
-संदीप कुमार कबड्डी कोच सहारनपुर।
-राजीव कुमार इंडियन रेलवे में टीटी हापुड़।
-आशीष जागलान श्रम एवं रोजगार मंत्रालय दिल्ली।
- कमल पीटीआई मेरठ।
- प्रमेंद्र कबड्डी कोच बंतीखेड़ा।
- निशांत इंडियन रेलवे मुरादनगर।
- अनुभव इंडियन रेलवे पटना।
- मोहित इंडियन रेलवे पटना।
- गौरव थल सेना नासिक।
- सिद्वार्थ चौधरी थल सेना नासिक।
- उपेंद्र कुमार प्रधानाध्यापक बंतीखेड़ा।
गांव के युवा पिछले काफी समय से कबड़्डी के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर सरकारी नौकरी पा रहे है। अभी भी गांव के अंडर 14 में 20 और अंडर 19 में 20 युवक व इस वर्ष से 10 लड़कियों भी प्रशिक्षण ले रही है। गांव के युवाओं को कबड्डी के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
-सावित्री देवी, ग्राम प्रधान