आतंकी संगठनों का नया तरीका: होश उड़ा देगा एजेंट बनाने का ये सच, जाल में फंसे वेस्ट यूपी के 50 से ज्यादा लोग
UP News : कलीम ने पुलिस और एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा किया है कि आईएसआई एजेंट दिलशाद मिर्जा भारत के उन लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करता है, जो मजदूरी, सब्जी आदि बेचकर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
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वेस्ट यूपी में पिछले 17 सालों में पचास से अधिक आतंकी संगठनों से जुड़े एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। अहम बात ये है कि इनमें एक भी हाईप्रोफाइल नहीं है। अधिकांश मजदूरी करने वाले थे, तो कुछ जरूर शिक्षक या धर्मगुरु जैसे पेशे से जुड़े थे। अब कलीम से पूछताछ में भी यह सच खुलकर सामने आ रहा है। क्योंकि कलीम खुद सब्जी बेचने का काम करता है।
कलीम के आईएसआई एजेंट का खुलासा होने के बाद फिर से वेस्ट यूपी के सभी जिलों में एसटीएफ, एनआईए ने एजेंटों की तलाश शुरू कर दी है। कलीम ने पुलिस और एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा किया है कि आईएसआई एजेंट दिलशाद मिर्जा भारत के उन लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करता है, जो मजदूरी, सब्जी आदि बेचकर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
उन्हें चंद दिनों में अमीर बनने का झांसा देकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार कराया जाता है। कलीम भी सब्जी बेचकर परिवार का पालन पोषण करता था। जबकि उसका भाई तहसीम भी मजदूरी व सब्जी बेचता था। इसके अलावा कलीम का पिता नफीस आढ़ती था।
आईएसआई एजेंट व आतंकियों के लिए मजदूर और गरीब तबके के लोग एक तरह से सॉफ्ट टारगेट बन गए हैं। ये आसानी से झांसे में भी आ जाते हैं। खास बात यह है कि लोगों को शक न हो, इसलिए ये एजेंट अपने घरों का निर्माण नहीं कराते हैं। पहले की तरह ही घर को रखते हैं। लोगों के सामने सब्जी बेचने से लेकर मजदूरी का ढोंग रचते हैं।
इसके अलावा नकली करेंसी प्रकरण में कुछ दिन पूर्व ही पकड़ा गया शामली का इमरान भी सब्जी बेचकर ही परिवार का पालन पोषण करता था।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, वेस्ट यूपी से आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, इंडियन मुजाहिद्दीन ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपनी गहरी पैठ जमाई हुई है। इसलिए अभी तक पकड़े गए आतंकी व जासूस उक्त संगठनों से जुड़े हुए मिले हैं। वहीं, आइएसआइ के एजेंट भी पकड़े गए हैं।
सैन्य ठिकाने अधिक निशाने पर
एसटीएफ के अनुसार, जांच में सामने आया है कि आईएसआई के निशाने पर मेरठ कैंट, राजस्थान का पुल या फिर अन्य सैन्य ठिकाने होते हैं। कलीम के भाई ने सैन्य ठिकानोंं के फोटो आईएसआई को भेजे थे।
ये है वेस्ट में आतंकी गतिविधियों की तस्वीर
शामली : वर्ष 2005 में एसटीएफ ने पांच किलो आरडीएक्स और अत्याधुनिक असलाह के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जो जम्मू कश्मीर निवासी थे। कैराना निवासी इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तान में रहकर नकली नोटों का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। गठरी उद्योग के जरिये समझौता एक्सप्रेस से कैराना पहुंची 40 पिस्टल बरामद हुई थीं। नकली नोटों की खेप कई बार पकड़ी जा चुकी है।
मेरठ : कुछ साल पहले मेरठ की रूबी और पाकिस्तानी असद को रुड़की (हरिद्वार) में गिरफ्तार किया गया था। असद नाम बदलकर रह रहा था। दोनों आईएसआई एजेंट बताए गए थे। लिसाड़ी गेट का सलीम उर्फ पतला का नाम भी सुर्खियों में रहा है।
मुजफ्फरनगर : बुढ़ाना के गांव जौला से आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद का कमांडर मोहम्मद वारस गिरफ्तार हुआ था। अटारी ऑर्डर पर हेरोइन के साथ कांधला निवासी साबिर और नसीरन पकड़ी गई थी। आठ साल पहले महलकी निवासी कारी सलीम गिरफ्तार हुआ था, वह नेत्रहीन था।
सहारनपुर : शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल पटियाला में पकड़ा गया था। सहारनपुर में उसने जन्म प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया था। दो कश्मीरी छात्र पकड़े, जो चार महीना पहले ही मेरठ जेल से सजा पूरी होने के बाद छूट गए। अयोध्या में आतंकी हमले की साजिश से जुड़ा एक आरोपी डाक्टर सहारनपुर के तीतरो से गिरफ्तार हुआ था।
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बिजनौर निवासी दो युवकों को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था, जो आतंकी संगठन हूजी के लिए काम कर रहे थे। इसके अलावा बिजनौर से मुकीम और नासिर को गिरफ्तार किया गया, जो मेरठ जेल में बंद हैं।
हापुड़ के कस्बा पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा बम बनाने में माहिर रहा है और आतंकी संगठन के लिए काम करता रहा। हापुड़ से चार आतंकी गिरफ्तार हुए थे, जिन पर पोटा भी लगा था।
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बागपत 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद बड़ौत के पठानकोट निवासी यूनुस का नाम प्रकाश में आया था। इसके बाद वर्ष 2005 में वाराणसी के संकट मोचक मंदिर पर हुए हमले के बाद आरोपी वलीउल्ला ने भी टांडा में जुबेर के घर शरण ली थी।