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जनपद में बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए खतरा
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शामली। तीन हाईवे को जोड़ने वाले जनपद शामली में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जो सेहत के लिए खतरा बना हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार प्रदूषण सामान्य स्थिति से अधिक एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) चल रहा है। मगर जनपद में अभी तक न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग का कार्यालय खुला है, और न ही किसी चौराहे पर प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं।
एनसीआर में शामिल जनपद शामली में मेरठ-करनाल, पानीपत खटीमा और दिल्ली सहारनपुर हाईवे गुजरते है। तीनों हाईवे पर दिनरात हल्के और भारी वाहन दौड़ते रहते हैं, जो प्रदूषण फैला रहे हैं। शामली को जनपद का दर्जा भले ही मिल गया हो, लेकिन आठ साल बाद भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग का कार्यालय नहीं खुला है। अभी मुजफ्फरनगर के सहारे ही जनपद में प्रदूषण की स्थिति संभाली जा रही है। शामली में किसी भी चौराहे पर प्रदूषण मापने के यंत्र भी नहीं लग पाए हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग मुजफ्फरनगर के अधिकारियों के मुताबिक प्रदूषण सामान्य तौर पर 50 से 60 तक एक्यूआई होना चाहिए, लेकिन शामली में वर्तमान में 130 से 150 के बीच एक्यूआई चल रहा है। सर्दी के दिनों में वातावरण में नमी होने के कारण एक्यूआई और अधिक बढ़ जाता है।
पराली जलाने से भी फैल रहा वायु प्रदूषण
एनजीटी ने पराली जलाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जनपद में कैराना, कांधला और झिंझाना के खादर क्षेत्र में धान का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जाता है। धान की कटाई के बाद खेत को जल्दी खाली करने के लिए किसान पराली को खेतों में ही जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। कृषि विभाग द्वारा पिछले साल पराली जलाने वाले कांधला और कैराना क्षेत्र के लगभग 23 किसानों को चिह्नित करते हुए एनजीटी को रिपोर्ट भेजी गई थी। इस बार भी पराली जलाने वालों पर विभाग की नजर है।
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ऑनलाइन प्रदूषण जांचने की नहीं व्यवस्था
जनपद में ऑनलाइन प्रदूषण मापने के लिए स्वचलित वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र (सीएएक्यूएमएस) की व्यवस्था नहीं है। अभी तक जिले में ऑफ लाइन तरीके से प्रदूषण मापा जाता है। मुजफ्फरनगर से प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम समय-समय पर आकर प्रदूषण की जांच करती है। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसमें कम से कम 24 घंटे का समय लगता है। अगर ऑनलाइन व्यवस्था हो तो हर घंटे प्रदूषण की जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही हवा का वेग और उसकी दिशा की भी जानकारी होगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शामली के एनसीआर में शामिल होने के बाद पिछले साल ऑनलाइन मापने की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
प्रदूषण पर सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव
सीएचसी के बाल रोग विशेषज्ञ एवं पैथोलोजिस्ट डा. अनुपम सक्सेना का कहना है कि प्रदूषण से वैसे तो बच्चों से लेकर बुजुर्ग के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। खासतौर पर बच्चे अधिक प्रभावित होते है। वायु प्रदूषण से सांस फूलना, खांसी होना, छाती में जकड़न, उल्टी, घुटन महसूस होना, सिर दर्द और आंखों में जलन आदि समस्या बन जाती है। इससे बचाव के लिए मास्क पहनकर बाहर निकलना चाहिए।
कोट
जनपद शामली में अभी प्रदूषण मापने के लिए ऑफलाइन व्यवस्था है। ऑनलाइन व्यवस्था में एसएसक्यूएमएस के लिए शासन को करीब एक साल पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जनपद में वर्तमान में 130 से 150 एक्यूआई चल रहा है, जो सामान्य स्थिति से करीब 100 अधिक है। हालांकि जिले में अभी प्रदूषण की समस्या गंभीर नहीं है। - विवेक राय, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग मुजफ्फरनगर।
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एनसीआर में शामिल जनपद शामली में मेरठ-करनाल, पानीपत खटीमा और दिल्ली सहारनपुर हाईवे गुजरते है। तीनों हाईवे पर दिनरात हल्के और भारी वाहन दौड़ते रहते हैं, जो प्रदूषण फैला रहे हैं। शामली को जनपद का दर्जा भले ही मिल गया हो, लेकिन आठ साल बाद भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग का कार्यालय नहीं खुला है। अभी मुजफ्फरनगर के सहारे ही जनपद में प्रदूषण की स्थिति संभाली जा रही है। शामली में किसी भी चौराहे पर प्रदूषण मापने के यंत्र भी नहीं लग पाए हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग मुजफ्फरनगर के अधिकारियों के मुताबिक प्रदूषण सामान्य तौर पर 50 से 60 तक एक्यूआई होना चाहिए, लेकिन शामली में वर्तमान में 130 से 150 के बीच एक्यूआई चल रहा है। सर्दी के दिनों में वातावरण में नमी होने के कारण एक्यूआई और अधिक बढ़ जाता है।
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पराली जलाने से भी फैल रहा वायु प्रदूषण
एनजीटी ने पराली जलाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जनपद में कैराना, कांधला और झिंझाना के खादर क्षेत्र में धान का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जाता है। धान की कटाई के बाद खेत को जल्दी खाली करने के लिए किसान पराली को खेतों में ही जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। कृषि विभाग द्वारा पिछले साल पराली जलाने वाले कांधला और कैराना क्षेत्र के लगभग 23 किसानों को चिह्नित करते हुए एनजीटी को रिपोर्ट भेजी गई थी। इस बार भी पराली जलाने वालों पर विभाग की नजर है।
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ऑनलाइन प्रदूषण जांचने की नहीं व्यवस्था
जनपद में ऑनलाइन प्रदूषण मापने के लिए स्वचलित वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र (सीएएक्यूएमएस) की व्यवस्था नहीं है। अभी तक जिले में ऑफ लाइन तरीके से प्रदूषण मापा जाता है। मुजफ्फरनगर से प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम समय-समय पर आकर प्रदूषण की जांच करती है। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसमें कम से कम 24 घंटे का समय लगता है। अगर ऑनलाइन व्यवस्था हो तो हर घंटे प्रदूषण की जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही हवा का वेग और उसकी दिशा की भी जानकारी होगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शामली के एनसीआर में शामिल होने के बाद पिछले साल ऑनलाइन मापने की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
प्रदूषण पर सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव
सीएचसी के बाल रोग विशेषज्ञ एवं पैथोलोजिस्ट डा. अनुपम सक्सेना का कहना है कि प्रदूषण से वैसे तो बच्चों से लेकर बुजुर्ग के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। खासतौर पर बच्चे अधिक प्रभावित होते है। वायु प्रदूषण से सांस फूलना, खांसी होना, छाती में जकड़न, उल्टी, घुटन महसूस होना, सिर दर्द और आंखों में जलन आदि समस्या बन जाती है। इससे बचाव के लिए मास्क पहनकर बाहर निकलना चाहिए।
कोट
जनपद शामली में अभी प्रदूषण मापने के लिए ऑफलाइन व्यवस्था है। ऑनलाइन व्यवस्था में एसएसक्यूएमएस के लिए शासन को करीब एक साल पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जनपद में वर्तमान में 130 से 150 एक्यूआई चल रहा है, जो सामान्य स्थिति से करीब 100 अधिक है। हालांकि जिले में अभी प्रदूषण की समस्या गंभीर नहीं है। - विवेक राय, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग मुजफ्फरनगर।