{"_id":"5db1eae98ebc3e93b7750baa","slug":"in-protest-against-the-trade-agreement-bakiu-staged-shamli-news-mrt4503411104","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापार समझौते के विरोध में भाकियू ने दिया धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यापार समझौते के विरोध में भाकियू ने दिया धरना
विज्ञापन
शामली कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : SHAMLI
शामली। सरकार द्वारा 14 देशों के साथ चल रही क्षेत्रीय आर्थिक भागीदारी (आईसीईपी) व्यापार समझौते के विरोध में भाकियू ने कलक्ट्रेट पर धरना दिया।
भाकियू जिलाध्यक्ष किसान नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) वार्ता के अंतिम चरण में एक मेगा-व्यापार समझौता है, जिसमें भारतीय किसानों के लिए कोई भी फायदा नहीं है उल्टा वे भारी सब्सिडी वाले उत्पादों के बिना किसी अतिरिक्त मूल्य और सुरक्षा तंत्र के देश में झोंक दिए जाने से गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। 15 अन्य देशों के साथ जहां भारत पहले से ही उन देशों में से 11 के साथ व्यापार घाटे के साथ संघर्ष कर रहा है, यह समझौता भारतीय किसानों के लिए एक बहुत बड़ी मुसीबत साबित होगा। किसानों ने गन्ना मूल्य भुगतान ना होने और थानाभवन में एसडीओ द्वारा किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने और अभद्रता का आरोप भी लगाया। हालांकि एसडीओ ने आरोपों को नकारा है। उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन एसडीएम शामली को दिया । इस मौके पर जावेद तोमर, रजनीश, बिट़्टू, कुलदीप पंवार, आदि कई भाकियू कार्यकर्ता मौजूद थे।
किसानों की मांग
- आरसीईपी किसानों को अस्वीकार है। मांग करते हैं कि भारत सरकार को इस पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए अगर सरकार अभी भी आगे बढ़ना चाहती है, तो यह कृषि क्षेत्र को इस समझौते से बाहर रखा जाये।
- सरकार को समझौते का मसौदा सार्वजनिक करना चाहिए और किसान संगठनों और किसान आंदोलनों के साथ बातचीत और राज्य सरकारों को शामिल करके संसद में इस पर बातचीत होनी चाहिए।
विज्ञापन
- भारत सरकार को बुनियादी लोकतांत्रिक दायित्वों को पूरा किए बिना इस मामले पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
विज्ञापन
भाकियू जिलाध्यक्ष किसान नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) वार्ता के अंतिम चरण में एक मेगा-व्यापार समझौता है, जिसमें भारतीय किसानों के लिए कोई भी फायदा नहीं है उल्टा वे भारी सब्सिडी वाले उत्पादों के बिना किसी अतिरिक्त मूल्य और सुरक्षा तंत्र के देश में झोंक दिए जाने से गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। 15 अन्य देशों के साथ जहां भारत पहले से ही उन देशों में से 11 के साथ व्यापार घाटे के साथ संघर्ष कर रहा है, यह समझौता भारतीय किसानों के लिए एक बहुत बड़ी मुसीबत साबित होगा। किसानों ने गन्ना मूल्य भुगतान ना होने और थानाभवन में एसडीओ द्वारा किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने और अभद्रता का आरोप भी लगाया। हालांकि एसडीओ ने आरोपों को नकारा है। उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन एसडीएम शामली को दिया । इस मौके पर जावेद तोमर, रजनीश, बिट़्टू, कुलदीप पंवार, आदि कई भाकियू कार्यकर्ता मौजूद थे।
किसानों की मांग
- आरसीईपी किसानों को अस्वीकार है। मांग करते हैं कि भारत सरकार को इस पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए अगर सरकार अभी भी आगे बढ़ना चाहती है, तो यह कृषि क्षेत्र को इस समझौते से बाहर रखा जाये।
विज्ञापन
- सरकार को समझौते का मसौदा सार्वजनिक करना चाहिए और किसान संगठनों और किसान आंदोलनों के साथ बातचीत और राज्य सरकारों को शामिल करके संसद में इस पर बातचीत होनी चाहिए।
विज्ञापन
- भारत सरकार को बुनियादी लोकतांत्रिक दायित्वों को पूरा किए बिना इस मामले पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।