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बदहाल व्यवस्था, दांव पर लगा भविष्य
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 30 Nov 2016 12:03 AM IST
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education
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। सरकारी स्कूलों में शैक्षिक स्तर सुधारने और संसाधन दुरुस्त करने के चाहे कितने दावे किए जाएं, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा। सरकारी स्कूलों में बच्चों को टाट पट्टी और चटाई पर बैठकर पढाई करनी पड़ती है, तो अध्यापक-अध्यापिकाओं में बच्चों की पढ़ाई के प्रति गंभीरता दिखाई नहीं देती।
सरकारी स्कूलों में व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अमर उजाला टीम ने मंगलवार को कुछ स्कूलों में पहुंचकर जायजा लिया, तो वहां के हालत देखते ही बयां हो रहे थे। कहीं पर अध्यापिकाएं आपस में बैठकर गुफ्तगू करती मिलीं, तो कहीं पर अध्यापक मोबाइल पर बातचीत करते मिले। बच्चों को पढ़ाने से ज्यादा अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहकर समय बिताया जा रहा है।
प्राथमिक विद्यालय नंबर दो लिलौन: यह स्कूल दिल्ली सहारनपुर हाईवे के किनारे है। गेट पर अंदर से ताला लगा हुआ था। तीन बच्चे हैंडपंप पर पानी पी रहे थे। कक्षा चार में बच्चे बैठे मिले, मगर अध्यापक मौजूद नहीं थे। एक ट्रेनी अध्यापक और अध्यापिका प्रधानाध्यापक के कार्यालय में बैठे थे, तो एक अध्यापिका मैदान में टहलती हुई मोबाइल फोन पर वार्ता में व्यस्त थी। इस विद्यालय में 187 बच्चों का दाखिला है, जिनमें से मंगलवार को 123 बच्चे
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उपस्थित थे। प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार के अलावा छह अध्यापक हैं, जिनमें तीन ट्रेनी अध्यापक हैं।
दो अध्यापिकाएं सीसीएल (अवकाश) पर हैं, तो प्रधानाध्यापक और एक अध्यापक तहसील में मीटिंग के संबंध में गए थे। एक अध्यापक वेतन आहरण के संबंध में बीएसए दफ्तर गए हुए थे। स्कूल दिल्ली सहारनपुर हाइवे किनारे पर है। स्कूल में बच्चों को मेट (जूट का फर्श) पर बैठाया हुआ था। ज्यादा संख्या में बच्चे बगैर ड्रेस के मिले, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से बच्चों को निशुल्क ड्रेस वितरण कराया गया था। खास बात यह है कि कक्षा चार में पहुंचते ही बच्चों ने अंग्रेजी में संबोधन करते हुए गुड आफ्टर नून सर और बैठ जाओ कहने पर थैंक्यू सर भी बोला। मध्याह्न भोजन वितरण के बारे में बच्चों ने कहा रोजाना मिलता है।
प्राथमिक विद्यालय खोड़समा
विद्यालय की गैलरी में बच्चे टाट पट्टी और चटाई पर बैठे थे। ब्लैक बोर्ड के आगे अध्यापक की बाइक खड़ी थी, तो उसके पीछे खड़े होकर अध्यापक बच्चों को ब्लैक बोर्ड पर लिखकर पढ़ा रहे थे।
एक अध्यापक कमरे में बैठे मोबाइल फोन पर किसी से बात करते मिले, तो एक अध्यापिका कमरे में बैठी हुई थीं। स्कूल में 38 छात्रा और 31 छात्रों का दाखिला है, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए दो महिला अध्यापक और दो पुरुष अध्यापकों की तैनाती है। प्रधानाध्यापक का कार्यभार शिक्षिका रेनू पर है। वह करनाल से आती हैं, मगर मंगलवार को वह स्कूल में नहीं मिलीं। बच्चों से पूछा कि मिड डे मील मिलता है या नहीं, तो कहा कि मिल रहा है। ड्रेस कुछ ही बच्चों को वितरित की गई।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक मालैंडी
स्कूल का गेट बंद था। अंदर मैदान में बैठी तीन अध्यापिकाएं आपस में बातचीत कर रही थीं। बच्चे भी मैदान में इधर उधर घूम रहे थे। एक बच्चे ने आकर गेट खोला। फोटो खींचने पर एक अध्यापिका ने टोका कि फोटो क्यों खींच रहे हो।
स्कूल में 111 बच्चों का दाखिला है, जिनमें से मंगलवार को 60 की उपस्थिति थी। इन्हें पढ़ाने के लिए एक पुरुष और पांच महिला शिक्षिकाओं की तैनाती है। कमरे के बाहर बरामदे में कुछ बच्चे जूट के मैट पर, तो कुछ बरामदे की छोटी दीवार पर ही बैठे थे। इनमें एक बच्चा सोता हुआ भी मिला। छात्र बगैर ड्रेस के मिले, तो छात्राएं ड्रेस पहने हुए थीं। किताबों का वितरण भी कुछ ही बच्चों को हुआ, जबकि अधिकांश पुरानी किताबों से पढ़ाई करते हैं।
हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन शिक्षण कार्य के लिए अध्यापकों को समय-समय पर निर्देशित किया जाता है। फिलहाल जो व्यवस्था है उसी के अनुसार बच्चों को स्कूलों में बैठाया जा रहा है। - चंद्रशेखर, बीएसए।
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सरकारी स्कूलों में व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अमर उजाला टीम ने मंगलवार को कुछ स्कूलों में पहुंचकर जायजा लिया, तो वहां के हालत देखते ही बयां हो रहे थे। कहीं पर अध्यापिकाएं आपस में बैठकर गुफ्तगू करती मिलीं, तो कहीं पर अध्यापक मोबाइल पर बातचीत करते मिले। बच्चों को पढ़ाने से ज्यादा अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहकर समय बिताया जा रहा है।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर दो लिलौन: यह स्कूल दिल्ली सहारनपुर हाईवे के किनारे है। गेट पर अंदर से ताला लगा हुआ था। तीन बच्चे हैंडपंप पर पानी पी रहे थे। कक्षा चार में बच्चे बैठे मिले, मगर अध्यापक मौजूद नहीं थे। एक ट्रेनी अध्यापक और अध्यापिका प्रधानाध्यापक के कार्यालय में बैठे थे, तो एक अध्यापिका मैदान में टहलती हुई मोबाइल फोन पर वार्ता में व्यस्त थी। इस विद्यालय में 187 बच्चों का दाखिला है, जिनमें से मंगलवार को 123 बच्चे
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उपस्थित थे। प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार के अलावा छह अध्यापक हैं, जिनमें तीन ट्रेनी अध्यापक हैं।
दो अध्यापिकाएं सीसीएल (अवकाश) पर हैं, तो प्रधानाध्यापक और एक अध्यापक तहसील में मीटिंग के संबंध में गए थे। एक अध्यापक वेतन आहरण के संबंध में बीएसए दफ्तर गए हुए थे। स्कूल दिल्ली सहारनपुर हाइवे किनारे पर है। स्कूल में बच्चों को मेट (जूट का फर्श) पर बैठाया हुआ था। ज्यादा संख्या में बच्चे बगैर ड्रेस के मिले, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से बच्चों को निशुल्क ड्रेस वितरण कराया गया था। खास बात यह है कि कक्षा चार में पहुंचते ही बच्चों ने अंग्रेजी में संबोधन करते हुए गुड आफ्टर नून सर और बैठ जाओ कहने पर थैंक्यू सर भी बोला। मध्याह्न भोजन वितरण के बारे में बच्चों ने कहा रोजाना मिलता है।
प्राथमिक विद्यालय खोड़समा
विद्यालय की गैलरी में बच्चे टाट पट्टी और चटाई पर बैठे थे। ब्लैक बोर्ड के आगे अध्यापक की बाइक खड़ी थी, तो उसके पीछे खड़े होकर अध्यापक बच्चों को ब्लैक बोर्ड पर लिखकर पढ़ा रहे थे।
एक अध्यापक कमरे में बैठे मोबाइल फोन पर किसी से बात करते मिले, तो एक अध्यापिका कमरे में बैठी हुई थीं। स्कूल में 38 छात्रा और 31 छात्रों का दाखिला है, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए दो महिला अध्यापक और दो पुरुष अध्यापकों की तैनाती है। प्रधानाध्यापक का कार्यभार शिक्षिका रेनू पर है। वह करनाल से आती हैं, मगर मंगलवार को वह स्कूल में नहीं मिलीं। बच्चों से पूछा कि मिड डे मील मिलता है या नहीं, तो कहा कि मिल रहा है। ड्रेस कुछ ही बच्चों को वितरित की गई।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक मालैंडी
स्कूल का गेट बंद था। अंदर मैदान में बैठी तीन अध्यापिकाएं आपस में बातचीत कर रही थीं। बच्चे भी मैदान में इधर उधर घूम रहे थे। एक बच्चे ने आकर गेट खोला। फोटो खींचने पर एक अध्यापिका ने टोका कि फोटो क्यों खींच रहे हो।
स्कूल में 111 बच्चों का दाखिला है, जिनमें से मंगलवार को 60 की उपस्थिति थी। इन्हें पढ़ाने के लिए एक पुरुष और पांच महिला शिक्षिकाओं की तैनाती है। कमरे के बाहर बरामदे में कुछ बच्चे जूट के मैट पर, तो कुछ बरामदे की छोटी दीवार पर ही बैठे थे। इनमें एक बच्चा सोता हुआ भी मिला। छात्र बगैर ड्रेस के मिले, तो छात्राएं ड्रेस पहने हुए थीं। किताबों का वितरण भी कुछ ही बच्चों को हुआ, जबकि अधिकांश पुरानी किताबों से पढ़ाई करते हैं।
हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन शिक्षण कार्य के लिए अध्यापकों को समय-समय पर निर्देशित किया जाता है। फिलहाल जो व्यवस्था है उसी के अनुसार बच्चों को स्कूलों में बैठाया जा रहा है। - चंद्रशेखर, बीएसए।