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हरियाणा प्रशासन की लापरवाही निकला सीमा विवाद की जड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:19 AM IST
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कैराना में सीमा विवाद को लेकर अभिलेखों की जांच करते हरियाणा आैर यूपी के अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी- हरियाणा सीमा विवाद को हल करने की दिशा में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के कैराना में तहसीलदार की अध्यक्षता में दोनों प्रदेशों के कानूनगो और लेखपालों की बैठक हुई। राजस्व अभिलेखों का मिलान किया गया। विवाद की असली जड़ हरियाणा प्रशासन की बताई जा रही है, क्योंकि दीक्षित आयोग के गठन के बाद यूपी को ट्रांसफर की गई करीब 6824 बीघा भूमि को हरियाणा प्रशासन ने अपने राजस्व अभिलेख से हटाया ही नहीं है। इसकी रिपोर्ट दोनों प्रदेशों के उच्च अधिकारियों को भेजकर जल्द समस्या का हल कराने का निर्णय लिया गया।
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यूपी-हरियाणा सीमा पर यमुना नदी की धारा बदलते रहने के कारण यूपी की जमीन यमुना के पार चली गई थी। इस समस्या को देखते हुए 1974 में दीक्षित आयोग का गठन किया गया था। उस समय यमुना की मध्य धारा को सीमा माना था। तय हुआ था कि जमीन पर मालिकाना हक उसी किसान का होगा जिसके नाम जमीन है, जबकि यमुना के पार गई जमीन पर राजस्व अधिकार हरियाणा प्रशासन का होगा। इसी तरह हरियाणा के किसानों की जमीन इस ओर आ गई, जिस पर राजस्व रिकार्ड यूपी के प्रशासन का माना गया था। इसके बाद कैराना तहसील से लगते हरियाणा के गांव राणा माजरा, नन्हेडा, रीशपुर सहित नौ गांवों की 6824 बीघा जमीन यूपी राजस्व विभाग को ट्रांसफर कर दी गई थी। मगर, हरियाणा प्रशासन ने 44 साल बाद भी उस जमीन को अपने अभिलेखों से नहीं हटाया।
शुक्रवार को पीडब्लूडी गेस्ट हाउस पर यूपी के कैराना तहसीलदार राकेश कुमार त्यागी की अध्यक्षता में कैराना और हरियाणा की बापौली तहसील के कानूनगो और लेखपालों की टीम की बैठक हुई। इसमें दोनों प्रदेशों के राजस्व रिकार्ड का मिलान किया गया। कैराना तहसीलदार ने हरियाणा कानूनगो से पूछा कि आपके यहां 1935 के बाद लाल किताब में रकबा दर्ज किया जाता था। उस किताब को दिखा कर अपना रकबा बताएं। इस पर कानूनगो ने कहा कि लाल किताब नहीं लाए हैं। टीम ने 1961 का हरियाणा चकबंदी रिकार्ड भी देखा। इस दौरान बताया गया कि 1974 से पहले 125 हेक्टेयर भूमि यमुना के पार चली गई थी जो यूपी के किसानों की थी। मगर, हरियाणा प्रशासन ने उक्त जमीन को अपने यहां के किसानों के नाम चढ़ा दिया। वहीं, तहसीलदार ने पूछा कि हरियाणा ने 1982 में जमाबंदी यूपी को दे दी थी लेकिन उक्त जमीन की खरीद फरोख्त हरियाणा प्रशासन कर रहा है। जब हरियाणा प्रशासन ट्रांसफर की गई 6824 बीघा जमीन की ब्रिकी और खरीदारी अपने यहां करता है तो उसी जमीन को कैराना तहसील में किस आधार पर खरीदा बेचा जा सकता है। काफी देर चली चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि विवाद की जड़ हरियाणा प्रशासन द्वारा ट्रांसफर की गई भूमि का रिकार्ड अपने अभिलेखों से नहीं हटाना है। इस दौरान हरियाणा की बापौली तहसील के कानूनगो राकेश त्यागी, लेखपाल मनीष, राममेहर तथा कैराना तहसील के लेखपाल यमुना प्रसाद, कोमिंद्र कुमार, मुकेश कुमार के अलावा यूपी के दर्जनों किसान मौजूद रहे।
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1974 के बाद यूपी को ट्रांसफर की गई 6824 बीघा जमीन को हरियाणा प्रशासन अभी तक अपने अभिलेख में दर्ज किए हुए है। इस संबंध में हरियाणा और यूपी के उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। साथ ही विवादित भूमि पर कुर्क की गई गेहूं की फसल को 16 अप्रैल को यूपी प्रशासन नीलाम करेगा। क्योंकि उक्त जमीन पर राजस्व अधिकार यूपी प्रशासन का बनता है। - राकेश कुमार त्यागी, कैराना तहसीलदार, यूपी।
किसानों ने कहा, कुर्क फसल की
नीलामी न रोकी जाए
कैराना। बैठक के दौरान यूपी के गांव मवी और सहपत के किसान दिलशाद, शिवकुमार, कलेक्टर, जयकुमार, अतर सिंह, मित्र सैन, अय्यूब और मेघराज भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि यमुना खादर में विवाद के चलते कुर्क की गई गेहूं की फसल को नीलाम होने से रोका नहीं जाना चाहिए। वहीं, किसानों ने आरोप लगाया कि कुर्क की गई फसल को हरियाणा के किसान जबरन काटकर ले जा रहे हैं, उसे भी रुकवाया जाए। तहसीलदार कैराना ने बताया कि कुर्क फसल की नीलामी जरूर होगी, जिसके लिए 16 अप्रैल की तारीख निर्धारित है।
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