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बढ़ता जल संकट: दम तोड़ रही जीर्णोद्घार परियोजना

Fri, 08 Apr 2022 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 11:57 PM IST
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Growing water crisis: Renovation project dying
चौसाना क्षेत्र के गांव सकौती में खोखरी नदी पर हुआ अनाधिकृत कब्जा। - फोटो : SHAMLI
शामली। ऊन तहसील क्षेत्र का काठा नाला और खोखरी नदी में पानी न होने से सूख गई है। खोखरी और काठा की जीर्णोद्घार योजना ने भी दम तोड़ दिया। पांच साल पहले तैयार की गई काठा नाले की 296 करोड़ रुपये की परियोजना सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई।
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खोखरी नदी का हाल यह हो गया है कि सहारनपुर जिले के गंगोह ब्लाक के लखनौती गांव से शुरू होकर शामली जिले के चौसाना, सकौती, कमालपुर केरटू गांव से होते हुए यमुना नदी में गिर जाती है। खोखरी नदी की भूमि पर जिले के चौसाना, सकौती गांवों में अतिक्रमण हटाने के लिए ड्रेनेज खंड ने गत 17 जून 2021 को ग्रामीणों को नोटिस जारी करके अभियान शुरू किया था। लेकिन अतिक्रमण हटाओ अभियान दम तोड़ गया। खोखरी नदी की भूमि ग्रामीण आवासीय आबादी में आई गई है। खोखरी नदी पर ग्रामीणों का अतिक्रमण बरकरार है।
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तत्कालीन भाजपा सांसद एवं स्थायी संसदीय जल समिति के चेयरमैन बाबू हुकुम सिंह ने जल संसाधन मंत्रालय के सामने मामला रखते हुए गत 20 जून 2017 को कैराना रोड स्थित होटल में जल संसाधन मंत्रालय और सिंचाई विभाग के अफसरों की बैठक हुई थी। जिसमें काठा नाले की सिल्ट आदि की सफाई तालाबों और पूर्वी यमुना नहर की जीर्णशीर्ण प्रणाली के जीर्णोद्धार की 296 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई थी। परियोजना के तहत सिर्फ काठा नाले में चेक डेम बन पाए हैं। तीन फरवरी 2018 पूर्व सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद यह परियोजना भी फाइलों में दम तोड़ गई।
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ये थी काठा जीर्णोद्धार परियोजना
सहारनपुर और शामली जिले के 29 तालाबों में एक हेक्टेयर से कम के 12 तालाबों में से 11 तालाब सहारनपुर और एक तालाब शामली जिले का शामिल किया गया। काठा नदी की जीर्णोद्घार के लिए तालाबों की तीन मीटर गहराई करने और तालाबों के बीचोंबीच रिचार्ज फाउंटेंन का निर्माण और पूर्वी यमुना नहर प्रणाली जीर्ण शीर्ण पड़ी परियोजना की पुर्नस्थापना, सरकारी भवनों में जल संवर्द्धन केेेे लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वर्षा काल में भूजल रिचार्ज के लिए काठा पर कम ऊंचाई के बांधों का निर्माण, किनारों पर वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा पंप से टपक सिंचाई योजना, हथनी कुंड बैराज से काठा नदी तक लिंक परियोजना के तहत भूजल में वृद्धि, तीतरो कट ड्रेन के माध्यम से काठा नदी में 30 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराना शामिल था।
जल संकट बढ़ना सरकार और समाज के लिए चिंताजनक
गंगा-यमुना सहायक नदियों और तालाबो का सूख जाना देश में जल का संकट बढ़ना है। सरकार और समाज की जल संकट से बचने के लिए कोई तैयारी न होना चिंताजनक है। जल संकट बढ़ने से 21 सदी में देश की हालात मध्य एशिया और अफ्रीका जैसी हो जाएगी। पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए जल उपयोग की दक्षता को बढ़ाना होगा। - जलपुरुष राजेंद्र सिंह

यमुना का ई- फ्लो पानी शून्य, प्रधानमंत्री हस्तक्षेप करें
हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और उत्तराखंड राज्यो में जल बंटवारा होने से यमुना नदी में जल संकट होने से बरसाती नदी बन गई है। राज्यों के जल बंटवारे के बाद यमुना में ई फ्लो पानी शून्य हो गया है। यमुना मेें जीव जंतु की रक्षा के लिए दस प्रतिशत ई- फ्लो होना आवश्यक है। इस मामले में यमुना एक्शन प्लान कमेटी के अफसरों को अवगत कराया जा चुका है। यमुना जल संकट से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हस्तक्षेप करना होगा। - डा. उमर सैफ हिंडन निर्मल अभियान समिति
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